फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Fire department and police administrative officials conducted a joint operation in the district.

Meerut News: छात्रों की सुरक्षा से खिलवाड़... कोचिंग सेंटरों में आपातकालीन द्वार और आग बुझाने के उपकरण नदारद

Tue, 23 Jun 2026 09:45 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 23 Jun 2026 09:45 PM IST
विज्ञापन
Fire department and police administrative officials conducted a joint operation in the district.
दमकल और पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों ने जिले में चलाया संयुक्त अभियान
विज्ञापन

लखनऊ अग्निकांड के बाद 14 कोचिंग सेंटरों का निरीक्षण, अधिकांश में मिली खामियां
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। जिले में संचालित अधिकांश कोचिंग सेंटर छात्रों की सुरक्षा से खिलवाड़ कर मानकों और नियमों को दरकिनार कर संचालित किए जा रहे हैं। लखनऊ के कोचिंग सेंटर में हुए अग्निकांड को देखते हुए यहां शहर में मंगलवार को दमकल और पुलिस-प्रशासनिक अधिकारियों के संयुक्त अभियान चलाकर 14 कोचिंग सेंटरों का निरीक्षण किया। इनमें अधिकतर में आपातकालीन निकास द्वार और आग से बचाव के उपकरण नहीं मिले। अधिकारियों का कहना है कि निरीक्षण अभियान जारी रहेगा और नोटिस देकर खामियों को पूरा कराया जाएगा।

सीएफओ सुरेंद्र सिंह ने बताया कि मंगलवार को पुलिस लाइन, परतापुर और घंटाघर फायर स्टेशन की तीन टीमों ने मंगल पांडेय नगर, पीएल शर्मा रोड, गढ़ रोड, ईस्टर्न कचहरी रोड, बागपत रोड, पुलिस लाइन के आसपास के कोचिंग सेंटरों में सुरक्षा मानकों की जांच की। उन्होंने बताया कि किसी भी भवन में आग लगने पर लोगों की जान बचाने में सबसे अधिक कारगर आपातकालीन निकास द्वार होते हैं। लखनऊ अग्निकांड में भी आपातकालीन निकास द्वार न होने के कारण छात्र कोचिंग सेंटर में फंस गए थे।
विज्ञापन

मंगलवार को दमकल विभाग की टीम ने कोचिंग सेंटरों का निरीक्षण किया तो पता चला कि यहां भी आपातकालीन निकास द्वार न होने और जीना संकीर्ण होने के कारण छात्रों के फंसने का खतरा है। अधिकांश संचालकों के पास एनओसी नहीं है। कई संचालकों ने अपने केंद्रों का रजिस्ट्रेशन भी नहीं कराया है। कुछ केंद्रों में क्षमता से अधिक छात्र पढ़ रहे हैं। कई केंद्रों में लगे अग्निशमन यंत्र एक्सपायर हो चुके हैं। छात्रों को कभी आग से बचाव के लिए प्रशिक्षित नहीं किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

एफएसओ आकाश चौहान ने बताया कि उनकी टीम ने बागपत रोड और बुढ़ाना रोड पर कोचिंग सेंटरों का निरीक्षण किया यहां दूसरी मंजिल पर कोचिंग सेंटर संचालित हो रहे थे। इनमें न तो आपातकालीन द्वार था और न ही आग बुझाने के उपकरण थे। निरीक्षण के दौरान एसपी सिटी विनायक गोपाल भोसले व पुलिस टीम भी मौजूद रही।

कदम-कदम पर शार्ट सर्किट का खतरा
अधिकांश केंद्रों पर एसी लगे थे। टीम ने जिन भवनों या कॉम्पलेक्स में कोचिंग सेंटर चल रहे थे। उनकी भी जांच की। केंद्रों के बाहर व अंदर खुले बिजली के तार लटके थे। इससे यहां शार्ट सर्किट का खतरा भी बना हुआ था। कई बार एसी के कंप्रेशर फटने से आग लगती है और खुले और ढीले तार शार्ट सर्किट का खतरा बनते हैं।

नहीं मिले स्मूक डिटेक्टर, दम घुटने से जाती हैं जान
आग लगने के बाद अधिकांश हादसों में सामने आया है कि लोगों की जान दम घुटने के कारण कारण जाती है। धुएं के कारण लोग बेहोश हो जाते हैं। कई वह वह आग से झुलस जाते और कई बार उनका दम घुट जाता है। इसके बावजूद कई कोचिंग सेंटरों में न तो धुआं निकलने का पर्याप्त प्रबंध था और न ही स्मूक डिटेक्टर लगे थे।

-----
कई कोचिंग सेंटर पर लटके ताले
सुरक्षा से खिलवाड़ कर संचालित हो रहे कई कोचिंग सेंटर टीमों के निरीक्षण के दौरान बंद मिले। कई संचालक कार्रवाई के डर से कोचिंग सेंटर बंद कर चले गए। इसके चलते इन कोचिंग सेंटरों पर ताले लटके मिले और इनकी जांच नहीं हो पाई।
------

कोचिंग सेंटर में आग से बचाव के लिए ये जरूरी है..

फायर एक्सटिंग्विशर (अग्निशामक यंत्र): हर मंजिल और क्लासरूम के बाहर चालू हालत में सीओ2 और ड्राई पाउडर वाले सिलिंडर टंगे होने चाहिए।
फायर अलार्म सिस्टम: आग या धुआं लगते ही पूरी बिल्डिंग में तेज घंटी बजने वाला ऑटोमैटिक अलार्म लगा होना चाहिए।

स्मोक डिटेक्टर्स:
छतों पर धुएं को भांपने वाले सेंसर होने चाहिए। ये आग की शुरुआत में ही सचेत कर सकते हैं।

होज रील और वाटर स्प्रिंकलर:
बड़ी इमारतों की छतों पर पानी का पाइप (होज रील) और क्लासरूम के अंदर ऑटोमैटिक पानी छिड़कने वाले स्प्रिंकलर होने चाहिए।

निकास और मॉक ड्रिल :
सीढ़ियों और कॉरिडोर में कोई भी सामान (जैसे पुरानी बेंच, कबाड़ या साइकिल) नहीं रखा होना चाहिए। आपातकालीन निकास द्वार पर चमकने और अंधरे में भी दिखने वाला एग्जिट बोर्ड होना चाहिए। मुख्य निकास पर कोई भी ऐसा बायोमेट्रिक या इलेक्ट्रॉनिक लॉक नहीं होना चाहिए। ये बिजली गुल होने पर जाम हो सकते हैं। दरवाजे बाहर की तरफ खुलने वाले होने चाहिए। कोचिंग स्टाफ, शिक्षकों और छात्रों उपकरणों को चलाने का प्रशिक्षण देना चाहिए। फायर मॉक ड्रिल होनी चाहिए। इससे आपातकाल में बाहर निकलने के लिए प्रशिक्षित होने का मौका मिलता है।
----

14 कोचिंग सेंटरों का निरीक्षण किया गया है। अधिकांश में खामियां मिली हैं। इनकी खामियों का जिक्र करते हुए 15 दिन का नोटिस दिया जाएगा। इसके अलावा लखनऊ से मिले निर्देशों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
सुरेंद्र सिंह, मुख्य अग्निशमन अधिकारी

--------
मवाना में जांच में कई जगह मिली खामियां

मवाना। एसडीएम संतोष कुमार सिंह, सीओ पंकज लवानिया और थाना प्रभारी बीके त्रिपाठी सहित टीम ने जैन मंडी का दौरा किया। उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर टेक्निकल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, आरविका लाइब्रेरी, आचार्य विद्या सागर लाइब्रेरी और एडविका लाइब्रेरी का निरीक्षण किया। इन सभी में छात्रों की संख्या के अनुसार रास्ता बहुत कम चौड़ा था। जीने भी संकरे थे और बाहर निकलने का कोई वैकल्पिक मार्ग नहीं था। कुछ स्थानों पर अग्नि शमन यंत्र या तो एक्सपायर थे या मौजूद ही नहीं थे। ब्रिटिश लाइब्रेरी में भी मानक से अधिक बच्चे मिले और अग्नि शमन यंत्र नहीं थे। एसडीएम ने मानक पूरे न होने पर नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगने के निर्देश दिए हैं।


कोचिंग संघ ने सौंपा ज्ञापन
मवाना। मवाना कोचिंग संघ ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपा है। संघ ने कोचिंग सेंटरों को सूचीबद्ध करने और अग्नि शमन यंत्रों से लैस करने की मांग की है। उन्होंने 25 फीट से कम चौड़े मार्ग पर सेंटर न होने की बात कही। संघ ने पर्याप्त खुले स्थान और प्रत्येक तीन माह में सुरक्षा निरीक्षण सुनिश्चित करने की भी मांग की।
------------
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article