फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   FIR not done for eight years, how will the crime be attacked

आठ साल से नहीं हुई एफआईआर, अपराध पर कैसे होगा वार

Fri, 07 Oct 2022 01:45 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 07 Oct 2022 01:45 AM IST
विज्ञापन
FIR not done for eight years, how will the crime be attacked
आठ साल से नहीं हुई एफआईआर, अपराध पर कैसे होगा वार
विज्ञापन

लावड़। उत्तर प्रदेश सरकार अपराध को कम करने के लिए कानून व्यवस्था को मजबूत करने के दावे कर रही है। परंतु, मेरठ जिले की एक ऐसी रिपोर्टिंग चौकी है, जहां ऑनलाइन व्यवस्था होने के बावजूद पिछले आठ साल से एफआईआर दर्ज नहीं हुई। कंप्यूटर और ऑपरेटर आठ साल बाद भी चौकी को मुहैया न होने पर फरियादियों को 10 किमी दूर थाने पर एफआईआर दर्ज कराने के लिए जाना पड़ता है। कई बार स्थानीय लोग रिपोर्टिंग चौकी पर एफआईआर दर्ज कराने की मांग कर चुके हैं।
2014 तक होती थी एफआईआर
मेरठ जिले की लावड़ रिपोर्टिंग चौकी सालों पुुरानी है। लावड़ चौकी के अंतर्गत कई गांव अतिसंवेदनशील माने जाते हैं। 2014 तक लावड़ चौकी पर ही एफआईआर की व्यवस्था थी। इसके बाद ऑनलाइन व्यवस्था लागू की गई। परंतु, यह प्रणाली रिपोर्टिंग चौकी लावड़ को रास नहीं आई। जिस कारण पिछले आठ साल से यहां कोई मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। लोगों को 10 किमी दूर इंचौली थाने में मुकदमा दर्ज कराने के लिए जाना पड़ता है। इस मार्ग पर रात में सवारी नहीं चलती, जिस कारण फरियादियों को सुबह होने का इंतजार करना पड़ता है। आर्थिक रूप से कमजोर लोग थाने तक भी नहीं पहुंच पाते।
विज्ञापन

ऑपरेटर नहीं मिलने पर कंप्यूटर हुआ वापस
एफआईआर ऑनलाइन दर्ज करने की व्यवस्था लागू होने के बाद 2015 में लावड़ चौकी पर कंप्यूटर सेट भेजा गया था। एक साल तक भी रिपोर्टिंग चौकी को ऑपरेटर नहीं मिला। जिस कारण कंप्यूटर सेट इंचौली थाने भेज दिया गया। लावड़ कस्बे के अलावा चौकी क्षेत्र से 12 गांव जुड़े हैं। जिनमें, खरदौनी सबसे बड़ा गांव है और अतिसंवेदनशील भी है। चौकी क्षेत्र पर लगभग 80 हजार से अधिक लोगों की जिम्मेदारी है। लावड़ रिपोर्टिंग चौकी को दो बार थाना बनाने का प्रस्ताव आया परंतु, दोनों बार निराशा हाथ लगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

क्या कारण रहे, इसकी जानकारी नहीं
ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने के बाद इंचौली थाने पर ही मुकदमा दर्ज किया जाता है। हालांकि, जीडी चौकी पर ही चलती है। ऑनलाइन व्यवस्था लागू होने के बाद थानों पर ही मुकदमा दर्ज करने के आदेश किए गए थे। दो बार थाना बनाने का प्रस्ताव लावड़ के लिए आया। परंतु, क्या कारण रहे, इसकी जानकारी नहीं है। -प्रवीन चौधरी, चौकी इंचार्ज, लावड़
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed