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World Athletics Day: संसाधन कम, इरादे मजबूत... सफलता के शिखर पर एथलीट
Sun, 07 May 2023 08:18 AM IST
मेरठ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 07 May 2023 08:18 AM IST
सार
प्रत्येक वर्ष 7 मई को विश्व एथलेटिक्स दिवस मनाया जाता है मेरठ के खिलाड़ियों ने अपने दम पर न सिर्फ देश में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी जिले का नाम रोशन किया है
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रूपल चौधरी, एथलेटिक्स
- फोटो : amar ujala
विस्तार
अपने दम पर मेरठ के खिलाड़ियों ने एथलेटिक खेलों में जिले का नाम राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है। कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक विजेता प्रियंका गोस्वामी और कांस्य पदक विजेता अन्नु रानी ने क्रांतिधरा की कीर्ति दूर तक फैलाया है। राष्ट्रीय स्तर के कई खिलाड़ियों ने भी अपनी प्रतिभा दिखाई है।
मेरठ में कैलाश प्रकाश स्टेडियम इकलौता खेल मैदान है, जहां जिले भर के खिलाड़ी अभ्यास करने आते हैं। लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि कैलाश प्रकाश स्टेडियम में सिंथेटिक ट्रैक तक नहीं बन पाया है। जिले में सिंथेटिक ट्रैक नहीं होने के कारण खिलाड़ियों को दूसरे प्रदेशों की ओर रुख करना पड़ रहा है। सिंथेटिक ट्रेक न होने के बावजूद पैदल चाल में प्रियंका और दौड़ में रूपल चौधरी जैसी खिलाड़ियों ने अपने दम पर मुकाम हासिल किया है। स्टेडियम में एथलेटिक का कोई स्थाई कोच नहीं है, अस्थाई कोच के भरोसे ही खिलाड़ी अभ्यास करने को मजबूर हैं।
छोटे गांव से निकलकर छुआ आसमान
सरधना के बहादरपुर गांव निवासी अन्नु रानी ने खेतों में गन्ना फेंककर अभ्यास किया और भाला फेंक में अंतरराष्ट्रीय फलक को छुआ। ओलंपियन अन्नु ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में कांस्य पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया। 2014 में एशियन गेम्स में कांस्य, 2017 में एशियन चैंपियनशिप में कांस्य और 2019 में रजत पदक झटके। दक्षिण एशियन गेम्स में 2016 में रजत पदक अपने नाम किए हैं।
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बैग के लालच ने बनाया अंतरराष्ट्रीय एथलीट
माधवपुरम निवासी प्रियंका गोस्वामी ने कभी जिला स्तरीय प्रतियोगिता में बैग के लालच में खेलों की शुरुआत की थी। इसी लालच ने प्रियंका गोस्वामी को अंतरराष्ट्रीय एथलीट बना दिया। ओलंपिक गेम्स में पदक से चूकने के बाद बाद उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक जीतकर प्रियंका गोस्वामी ने एक नया इतिहास रच दिया। पैदल चाल खेल में देश को पहली बार पदक मिला। वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 20 से ज्यादा पदक जीत चुकी हैं।
मेरठ की उड़नपरी से बड़ी उम्मीदें
शाहपुर जैनपुर गांव निवासी रूपल चौधरी मेरठ की उड़नपरी कही जाती हैं, पिछले साल उन्होंने जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में चार सौ मीटर व्यक्तिगत और रिले दौड़ में दो पदक देश को दिलाए। उनके कोच विशाल सक्सेना ने बताया रूपल एक अच्छी एथलीट है, भविष्य में रूपल से बड़ी उम्मीदें हैं, वो देश की अगली ओलंपियन खिलाड़ी हो सकती हैं।
एथलीट बहनों की राष्ट्रीय खेलों में धमक
मूल रूप से बागपत जिला निवासी बहनें शिवानी और मानसी कलीना गांव में अपने नाना राजपाल सिंह के यहां रहती हैं। कैलाश प्रकाश स्टेडियम में प्रशिक्षण लेकर दोनों बहनों ने राष्ट्रीय खेलों में धमक कायम की है। मानसी ने शनिवार को वाराणसी में उप्र ओपन एथलेटिक्स में 1.71 मीटर के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इससे पहले वो राष्ट्रीय स्तर पर 4 पदक और राज्य स्तर में 16 पदक अपने नाम कर चुकीं हैं। जबकि बड़ी बहन शिवानी ने 4 राष्ट्रीय ओर दो इंटर रेलवे में पदक जीते हैं। दोनों अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं के लिए मेहनत कर रहीं हैं।
पहली अंतरराष्ट्रीय खेलों में बनाई जगह
रोहटा रोड हसनपुर रजापुर गांव निवासी विधि चौधरी ने हाल में ही जून में होने वाली एशियन जूनियर चैंपियनशिप के लिए क्वालिफाई किया है। विधि राष्ट्रीय स्तर पर सात पदक अपने नाम कर चुकी हैं। ये उनकी पहली अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा होगी।
लगातार स्वर्ण पदक जीत रहीं ख्याति
हाईजंप में मेरठ की ख्याति माथुर ने राष्ट्रीय खेलों में दबदबा बना रहीं हैं। वो अभी तक सात स्वर्ण पदक अपने नाम कर चुकीं हैं। साई सेंटर के एक्सीलेंसी सेंटर के लिए चयनित ख्याति माथुर अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं के लिए खुद को तैयार कर रहीं हैं।
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मेरठ में कैलाश प्रकाश स्टेडियम इकलौता खेल मैदान है, जहां जिले भर के खिलाड़ी अभ्यास करने आते हैं। लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि कैलाश प्रकाश स्टेडियम में सिंथेटिक ट्रैक तक नहीं बन पाया है। जिले में सिंथेटिक ट्रैक नहीं होने के कारण खिलाड़ियों को दूसरे प्रदेशों की ओर रुख करना पड़ रहा है। सिंथेटिक ट्रेक न होने के बावजूद पैदल चाल में प्रियंका और दौड़ में रूपल चौधरी जैसी खिलाड़ियों ने अपने दम पर मुकाम हासिल किया है। स्टेडियम में एथलेटिक का कोई स्थाई कोच नहीं है, अस्थाई कोच के भरोसे ही खिलाड़ी अभ्यास करने को मजबूर हैं।
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छोटे गांव से निकलकर छुआ आसमान
सरधना के बहादरपुर गांव निवासी अन्नु रानी ने खेतों में गन्ना फेंककर अभ्यास किया और भाला फेंक में अंतरराष्ट्रीय फलक को छुआ। ओलंपियन अन्नु ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में कांस्य पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया। 2014 में एशियन गेम्स में कांस्य, 2017 में एशियन चैंपियनशिप में कांस्य और 2019 में रजत पदक झटके। दक्षिण एशियन गेम्स में 2016 में रजत पदक अपने नाम किए हैं।
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बैग के लालच ने बनाया अंतरराष्ट्रीय एथलीट
माधवपुरम निवासी प्रियंका गोस्वामी ने कभी जिला स्तरीय प्रतियोगिता में बैग के लालच में खेलों की शुरुआत की थी। इसी लालच ने प्रियंका गोस्वामी को अंतरराष्ट्रीय एथलीट बना दिया। ओलंपिक गेम्स में पदक से चूकने के बाद बाद उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में रजत पदक जीतकर प्रियंका गोस्वामी ने एक नया इतिहास रच दिया। पैदल चाल खेल में देश को पहली बार पदक मिला। वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 20 से ज्यादा पदक जीत चुकी हैं।
मेरठ की उड़नपरी से बड़ी उम्मीदें
शाहपुर जैनपुर गांव निवासी रूपल चौधरी मेरठ की उड़नपरी कही जाती हैं, पिछले साल उन्होंने जूनियर वर्ल्ड चैंपियनशिप में चार सौ मीटर व्यक्तिगत और रिले दौड़ में दो पदक देश को दिलाए। उनके कोच विशाल सक्सेना ने बताया रूपल एक अच्छी एथलीट है, भविष्य में रूपल से बड़ी उम्मीदें हैं, वो देश की अगली ओलंपियन खिलाड़ी हो सकती हैं।
एथलीट बहनों की राष्ट्रीय खेलों में धमक
मूल रूप से बागपत जिला निवासी बहनें शिवानी और मानसी कलीना गांव में अपने नाना राजपाल सिंह के यहां रहती हैं। कैलाश प्रकाश स्टेडियम में प्रशिक्षण लेकर दोनों बहनों ने राष्ट्रीय खेलों में धमक कायम की है। मानसी ने शनिवार को वाराणसी में उप्र ओपन एथलेटिक्स में 1.71 मीटर के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इससे पहले वो राष्ट्रीय स्तर पर 4 पदक और राज्य स्तर में 16 पदक अपने नाम कर चुकीं हैं। जबकि बड़ी बहन शिवानी ने 4 राष्ट्रीय ओर दो इंटर रेलवे में पदक जीते हैं। दोनों अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं के लिए मेहनत कर रहीं हैं।
पहली अंतरराष्ट्रीय खेलों में बनाई जगह
रोहटा रोड हसनपुर रजापुर गांव निवासी विधि चौधरी ने हाल में ही जून में होने वाली एशियन जूनियर चैंपियनशिप के लिए क्वालिफाई किया है। विधि राष्ट्रीय स्तर पर सात पदक अपने नाम कर चुकी हैं। ये उनकी पहली अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा होगी।
लगातार स्वर्ण पदक जीत रहीं ख्याति
हाईजंप में मेरठ की ख्याति माथुर ने राष्ट्रीय खेलों में दबदबा बना रहीं हैं। वो अभी तक सात स्वर्ण पदक अपने नाम कर चुकीं हैं। साई सेंटर के एक्सीलेंसी सेंटर के लिए चयनित ख्याति माथुर अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं के लिए खुद को तैयार कर रहीं हैं।