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पैरा एथलेटिक्स ग्रैंड प्रिक्स चैंपियनशिप: मेरठ की फातिमा खातून ने बीजिंग में जीता कांस्य पदक

Sat, 11 May 2019 07:56 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Sat, 11 May 2019 07:56 PM IST
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Fatima Khatoon win bronze medal in Paragraph athletics world grand prix championship at beijing
फातिमा खातून - फोटो : अमर उजाला

चीन की राजधानी बीजिंग में चल रही 7वीं चाइना पैरा एथलेटिक्स वर्ल्ड ग्रैंड प्रिक्स चैंपियनशिप में मेरठ की फातिमा खातून ने डिस्कस थ्रो में कांस्य पदक जीत कर प्रदेश और देश का नाम रोशन किया है।

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पढ़िए फातिमा के संघर्ष की पूरी कहानी...
‘ख्वाब टूटे हैं मगर हौसले जिंदा हैं, हम वो हैं जहां मुश्किलें शर्मिंदा हैं’ ये चंद पंक्तियां मेरठ की राधना निवासी 27 वर्षीय फातिमा खातून पर सटीक बैठती हैं। एक सड़क हादसे के बाद फातिमा ने महीनों जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष किया। छह महीने कोमा में रहीं। होश आया तो खुद को व्हीलचेयर पर पाया। इसके बाद भी उन्होंने अपने हौसले को टूटने नहीं दिया। फिर से जिंदगी की शुरुआत की और खेलों में नए मुकाम की तलाश की। पैरा खेलों में राष्ट्रीय स्तर के पदक जीतने के बाद अब वह एशियन चैंपियनशिप की तैयारी में जुटी हैं।
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बिजली विभाग में स्टेनोग्राफर के पद पर तैनात फातिमा ने कभी सोचा भी नहीं था कि वह खेलों में अपना करियर बनाएंगी। पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद उसकी नौकरी लग गई थी। वह बेगमपुल स्थित बिजली विभाग की टेस्ट डिवीजन में नौकरी कर रही थीं। 2014 में राधना गांव से वह एक्टिवा से ऑफिस आ रही थीं। किठौर स्थित आरके कालेज के सामने कार चालक ने उसे टक्कर मार दी। हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हुईं। दोनों हाथ और पैर टूट गए। शरीर में 194 टांके लगे। घर वाले फातिमा के जिंदा रहने की उम्मीद छोड़ चुके थे। करीब छह माह बाद फातिमा कोमा से बाहर आईं। हादसे के बाद उसके दोनों हाथों व पैरों में रॉड डाली गई। रॉड के साथ नौ जगह बोल्ट लगाए गए। इसके बाद वो व्हील चेयर पर आ गई। दुर्घटना के बाद फातिमा डेढ़ वर्ष तक बिस्तर पर रहीं।

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Fatima Khatoon win bronze medal in Paragraph athletics world grand prix championship at beijing
अपने कोच के साथ फातिमा खातून - फोटो : अमर उजाला

फातिमा ने खेलों से जोड़ा नाता
सड़क हादसे से पहले फातिमा का खेलों से कोई नाता नहीं था। हादसे के बाद वो ऑफिस से निकलते हुए कभी कभी व्हील चेयर से भामाशाह पार्क घूमने जाती थीं। 4 जुलाई 2017 को उनकी मुलाकात एथलेटिक कोच गौरव त्यागी से हुई। गौरव ने उन्हें पैरा खेलों में हाथ आजमाने को कहा। यहां से फातिमा ने खेलों में शुरूआत की। आज फातिमा आत्मविश्वास से लबरेज हैं और यही उनकी ताकत है। 

एक ही प्रतियोगिता में जीते तीन गोल्ड 
मार्च 2018 में लखनऊ में आयोजित पैरा स्टेट प्रतियोगिता में फातिमा ने एक साथ तीन गोल्ड मैडल जीते। उन्होंने डिस्कस थ्रो, जेवलिन थ्रो, शॉटपुट में पदक जीता। इसके बाद चंडीगढ़ में पैरा नेशनल में सिल्वर मेडल, दो जनवरी को फातिमा ने दिल्ली में आयोजित पैरा एशियन चैंपियनशिप के लिए ट्रायल दिया है। 

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