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फादर्स डे आज: मिस यू पापा... हमेशा यादों में रहेंगे आप, पिता को खोने वाले बेटे-बेटियों का छलका दर्द

Sun, 20 Jun 2021 12:21 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sun, 20 Jun 2021 12:21 AM IST
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Fathers Day: Miss you papa, pain comes out of sons and daughters who lost their father
आशीष तोमर, मानसी वर्मा, रिया अग्रवाल - फोटो : amar ujala

जिंदगी के हर कदम पर पिता हौसला देते हैं। कुछ भी हो जाए, एक वही होते हैं जो साथ खड़े रहते हैं। उंगली पकड़कर चलना सिखाना हो या पहली बार स्कूल छोड़कर आना। मनपसंद चीज मंगानी हो या कहीं घूमने जाना। पिता जिंदगी के हर पड़ाव पर एक वृक्ष की तरह छांव देते हैं। पिता के भाव को शब्दों से नहीं समझाया जा सकता। हर बार फादर्स डे बच्चों के लिए खास होता था, लेकिन इस बार महामारी ने इसे दुखद बना दिया है।

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कोरोना ने कितने ही परिवारों को जिंदगी भर का गम दे दिया है। कितने ही ऐसे परिवार हैं, जिनके घर में हर बार जैसी खुशियां नहीं होंगी। जिनको हर साल बेटे-बेटी गिफ्ट देते थे... अपनी जिद पूरी कराते थे... वे पापा नहीं होंगे। आज इस दुखद क्षण में अपने पिता को खोने वाले ऐसे बच्चों से बात हुई तो इस दिन के मायने और भी बढ़ गए। ये बच्चे आज फादर्स डे पर यही कह रहे हैं कि उनकी कमी तो अब जिंदगीभर रहेगी... लेकिन उनके सपनों को पूरा करना ही अब हमारा लक्ष्य होगा। जो जिम्मेदारी परिवार की वो उठाते थे... उसे अब हम संभालेंगे। मिस यू पापा... आप हमेशा हमारी यादों में रहेंगे।
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‘पापा के हर सपने को पूरा करूंगा’
फादर्स डे पर पापा एडवोकेट भोज प्रताप सिंह घुमाने ले जाते थे। अब हर बार ये दिन बहुत रुलाएगा। मुझे कभी पापा ने सोते नहीं उठाया। मेरे पास आकर बैठ जाते थे और जोर-जोर से अखबार पढ़ने लगते थे, ताकि मैं खुद उठ जाऊं। कभी पढ़ाई को लेकर दबाव नहीं बनाया। बस यही कहते थे कि जो भी करो, मन से करो। कभी पढ़ाई में मुझ पर नंबरों के लिए दबाव नहीं बनाया। अब तो परिवार की जिम्मेदारी संभालनी है। मन लगाकर और मेहनत से पढ़ाई करनी है। पढ़ाई के दम पर ही पापा के सपने को पूूरा करना है। उन सारी बातों को पूरा करना है जो वे परिवार के लिए सोचा करते थे। उनकी यादें हमेशा मेरे साथ रहेंगी। - आशीष तोमर, 12वीं के छात्र, गंगानगर  
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‘किसी और बच्चे के साथ ऐसा न हो’ 
हर बार पापा विनोद वर्मा फादर्स डे पर पूरा दिन भाई और मेरे साथ रहते थे। घर आते तो कहते कि एक बार हंस दे, मुझे ताकत मिल जाती है। बस यही कहते थे कि शुभम और तुम पढ़-लिखकर कामयाब हो जाओ तो मुझे आराम मिले। कभी भी उन्होंने कुछ मना नहीं किया। वे हमेशा यही कहते थे कि जिस क्षेत्र में जाओ मेरा नाम करना। उन्होंने कभी खुशी हो या गम किसी भी क्षण मुझे अकेलापन महसूस नहीं होने दिया। उनकी कमी बहुत खल रही है। हर बार फादर्स डे पर उनकी याद सताती रहेगी। अब मेहनत से पढ़ाई करके उनके सपने को पूरा करना है। इंजीनियरिंग में मेहनत करके अच्छी नौकरी पानी है, ताकि उनके सपने को पूरा कर सकूं। दूसरे किसी बच्चे के साथ ऐसा न हो।  - मानसी वर्मा, इंजीनियरिंग की छात्रा, ब्रह्मपुरी 

 

‘जिंदगी भर हौसला देंगी पापा की बातें’
पापा रवि वाधवन फादर्स डे पर हर बार कुछ न कुछ उपहार देते थे। उन्होंने मेरी हर इच्छा पूरी की। कभी पढ़ाई को लेकर कुछ नहीं कहा। कहते थे कि कभी दुखी मत होना। उन्होंने बचपन से लेकर अब तक सभी जिम्मेदारी पूरी कीं। कभी किसी भी मौके पर अकेलापन नहीं लगा। लेकिन अब तो ऐसा लग रहा है कि ये सब क्या हो गया। आज कोरोना महामारी ने हमारी खुशियां छीन लीं। कितने ही ऐसे बच्चे हैं जिनके पिता इस बार उनके साथ नहीं हैं। मेरी शादी के उनको बड़े अरमान थे। फरवरी में शादी तय हुई थी, पापा तैयारियों में लगे थे। लेकिन अब सिर्फ यादें रह गई हैं। पापा के सपनों को पूरा करना है। जिंदगी के मुश्किल क्षणों में उनकी हिम्मत देने वाली बातें यादें रहेंगी। - रूपाली, तिलक रोड

‘पापा-मम्मी के सपनों को करेंगे पूरा’ 
पापा मुकेश जैन पीडब्ल्यूडी में ठेकेदार थे। मैं और मेरी बहन अवनी दोनों हर साल धूमधाम से फादर्स डे मनाते थे। पापा के हाथों की बनी आलू-पूरी और पकोड़े खाते थे। उन्होंने कभी पढ़ाई में दबाव नहीं बनाया। कहते थे, जो अच्छा लगे वो करो। मम्मी भी बहुत खुश रहती थीं। कोरोना ने सारी खुशियां छीन लीं। मम्मी-पापा दोनों चले गए। अब चाचा के घर पर हैं। फादर्स डे अब हर साल रुलाएगा। पापा हमारे आदर्श थे, उनकी बातें जिंदगी भर याद रहेंगी। जो सपने उन्होंने देखे थे, उनको पूरा करेंगे। किसी और के साथ ऐसी मुश्किलें न आएं। फादर्स और मदर्स डे पर सबके मम्मी-पापा उनके साथ रहें। - वंशिका, बीटेक फाइनल, सदर 
 

‘उनकी कमी जिंदगी भर रहेगी’
हर बार इस दिन पापा नितिन अग्रवाल घुमाने ले जाते थे। हम तीनों बहनों बहनों को कुछ न कुछ दिलाते थे। कभी भी नंबरों के बारे में नहीं पूछते थे। कहते थे कि बेटे नॉलेज के लिए पढ़ो, नंबरों के लिए नहीं। जो मन में हो वही करो। पापा रहते थे तो लगता था कि कोई कमी नहीं है। अब तो कमी ही कमी है। हर बार ये दिन उनकी याद दिलाएगा। उनकी बात हमेशा याद आती रहती हैं। पढ़ाई करके उनके देखे हुए सपनों को पूरा करना है। जो वो हम लोगों से बात करते थे, उनको पूरा करना है। मैं बड़ी हूं तो मेरी जिम्मेदारी सबसे अधिक है। फादर्स डे ही नहीं उनकी कमी हर खुशी में रहेगी। किसी भी बच्चे के ऐसा नहीं हो, जो हमारे साथ हुआ है। पापा मिस यू। - रिया अग्रवाल, 12वीं की छात्रा, सोमदत्त सिटी 
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