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Meerut News: किसानों को गन्ने में सहफसली खेती की जानकारी दी
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संवाद न्यूज एजेंसी
हस्तिनापुर। कस्बे के कृषि विज्ञान केंद्र में बुधवार को गणेशपुर क्षेत्र के किसानों के लिए गन्ने के साथ सहफसली खेती विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में किसानों ने भाग लेकर वैज्ञानिकों से उन्नत खेती की जानकारी प्राप्त की।
केंद्र के प्रभारी अधिकारी डॉ. राकेश तिवारी ने किसानों को बताया कि बलुई दोमट एवं भारी मिट्टी वाले खेतों में भी गन्ने की सहफसली खेती की जा सकती है। बुवाई से पहले खेत में नमी के लिए पलेवा करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अंतिम जुताई से पूर्व सूक्ष्म पोषक तत्वों का प्रयोग अवश्य करें। प्रति हेक्टेयर 175 किग्रा जिप्सम, 25 किग्रा जिंक सल्फेट (21 प्रतिशत), 12 किग्रा फैरस सल्फेट, 12 किग्रा कॉपर सल्फेट तथा 5 किग्रा बोरेक्स का प्रयोग लाभकारी रहेगा।
उन्होंने बताया कि मृदा परीक्षण न होने की स्थिति में 375 किग्रा सिंगल सुपर फास्फेट, 100 किग्रा म्यूरेट ऑफ पोटाश और 162 किग्रा यूरिया प्रति हेक्टेयर दें। डीएपी का प्रयोग करने वाले किसान 130 किग्रा डीएपी, 100 किग्रा म्यूरेट ऑफ पोटाश और 100 किग्रा यूरिया का प्रयोग करें। खड़ी फसल में 75-75 किग्रा यूरिया दो बार बरसात से पूर्व देना चाहिए।
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पादप सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. नवीन चंद्रा ने बताया कि तना छेदक की रोकथाम के लिए परजीवी ट्राइकोग्रामा जैपोनिकम के दो से तीन कार्ड प्रति एकड़, पतंग दिखने के सात से दस दिन बाद लगाएं। खेत में उचित नमी बनाए रखने से परजीवियों की संख्या बढ़ती है और कीट नियंत्रण में मदद मिलती है।
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हस्तिनापुर। कस्बे के कृषि विज्ञान केंद्र में बुधवार को गणेशपुर क्षेत्र के किसानों के लिए गन्ने के साथ सहफसली खेती विषय पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में किसानों ने भाग लेकर वैज्ञानिकों से उन्नत खेती की जानकारी प्राप्त की।
केंद्र के प्रभारी अधिकारी डॉ. राकेश तिवारी ने किसानों को बताया कि बलुई दोमट एवं भारी मिट्टी वाले खेतों में भी गन्ने की सहफसली खेती की जा सकती है। बुवाई से पहले खेत में नमी के लिए पलेवा करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अंतिम जुताई से पूर्व सूक्ष्म पोषक तत्वों का प्रयोग अवश्य करें। प्रति हेक्टेयर 175 किग्रा जिप्सम, 25 किग्रा जिंक सल्फेट (21 प्रतिशत), 12 किग्रा फैरस सल्फेट, 12 किग्रा कॉपर सल्फेट तथा 5 किग्रा बोरेक्स का प्रयोग लाभकारी रहेगा।
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उन्होंने बताया कि मृदा परीक्षण न होने की स्थिति में 375 किग्रा सिंगल सुपर फास्फेट, 100 किग्रा म्यूरेट ऑफ पोटाश और 162 किग्रा यूरिया प्रति हेक्टेयर दें। डीएपी का प्रयोग करने वाले किसान 130 किग्रा डीएपी, 100 किग्रा म्यूरेट ऑफ पोटाश और 100 किग्रा यूरिया का प्रयोग करें। खड़ी फसल में 75-75 किग्रा यूरिया दो बार बरसात से पूर्व देना चाहिए।
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पादप सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. नवीन चंद्रा ने बताया कि तना छेदक की रोकथाम के लिए परजीवी ट्राइकोग्रामा जैपोनिकम के दो से तीन कार्ड प्रति एकड़, पतंग दिखने के सात से दस दिन बाद लगाएं। खेत में उचित नमी बनाए रखने से परजीवियों की संख्या बढ़ती है और कीट नियंत्रण में मदद मिलती है।