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किसान आंदोलन: हरिद्वार से मेरठ तक शांति, दिल्ली में बवाल, ये रही अन्नदाताओं की 10 बड़ी मांगें

Tue, 02 Oct 2018 07:08 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Updated Tue, 02 Oct 2018 07:08 PM IST
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Farmers Movement News Haridwar to Meerut Peace and struggle in Delhi and huge demands of farmers
किसान आंदोलन - फोटो : अमर उजाला

भारतीय किसान यूनियन ने 23 सितंबर को उत्तराखंड के हरिद्वार से किसान क्रांति यात्रा आंदोलन का बिगुल फूंका था। किसानों की पदयात्रा मेरठ तक तो सही चलती रही लेकिन, मंगलवार को दिल्ली में घुसते ही यूपी गेट पर बवाल हो गया। इस दौरान पुलिस ने किसानों को रोकने की कोशिश की। लेकिन अपनी मांगों लेकर अड़े किसानों ने कदम पीछे नहीं हटाए और पुलिस का विरोध कर दिया। वहीं पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठी-चार्ज के साथ पानी की बौछारें की।

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वहीं किसान संघ और गृहमंत्री राजनाथ सिंह के बीच हुई बैठक में किसानों की 7 मांगों पर सहमति बन गई है। सुरेश राणा ने राजनाथ सिंह के घर के बाहर हो रही बैठक खत्म होने के बाद ऐलान किया कि किसानों और सरकार के बीच 7 मुद्दों पर सहमति बनी है। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र शेखावत किसान संघ के नेताओं के साथ गाजीपुर सीमा पर बैठे किसानों से मिले और जिन मुद्दों पर बैठक में सहमति बनी थी उनका ऐलान भी किया।
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ये है किसानों की अहम मांगें
- डॉ. स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू की जाए, ताकि किसानों को फल, सब्जी, दूध और फसलों का उचित व लाभकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य मिल सके। 

- किसानों के सभी तरह के कर्ज एक ही समय सीमा में माफ किए जाएं, क्योंकि किसानों पर 80 प्रतिशत कर्ज राष्ट्रीयकृत बैंकों का है। 

- बीते दस वर्ष में सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक देश के तीन लाख किसानों ने आत्महत्या की। पीड़ित किसानों के परिवार का पुनर्वास किया जाए और एक सदस्य को सरकारी नौकरी मिले। 
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- पीएम फसल बीमा योजना में बदलाव हो, ताकि प्रत्येक किसान को इकाई मान कर सभी फसलों में स्वैच्छिक रूप से लागू किया जाए। 

- किसानों की न्यूनतम आमदनी सुनिश्चित हो। लघु एवं सीमांत किसानों को 60 वर्ष से अधिक आयु में पांच हजार रुपये मासिक पेंशन मिले।
 
- फसल की सुरक्षा को जंगली जानवरों से बचाव हेतु क्षेत्रीय आधार पर वृहत कार्य योजना बने। देश के कुछ राज्यों में प्रचलित अन्ना प्रथा पर रोक लगाई जाए। 

- चीनी मिलों पर बकाया गन्ना भुगतान को ब्याज सहित दिलाया जाए। सिंचाई हेतु नलकूप की बिजली निशुल्क मिले। 

- राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण द्वारा दिल्ली-एनसीआर में दस वर्ष से पुराने डीजल वाहनों पर रोक से किसानों को मुक्त किया जाए।
 
- सरकार मनरेगा को खेती से लिंक करे। खेती में प्रयुक्त वस्तुओं को जीएसटी से मुक्त किया जाए और कृषि को विश्व व्यापार संगठन से बाहर रखे। 

- देश में पर्याप्त मात्रा में उत्पादित फसलों का आयात बंद किया जाए। एशियन मुक्त व्यापार समझौते की आड़ में ऐसे देशों का निर्यात बंद हो, जो उत्पादक नहीं हैं। 

- देश में भूमि अधिग्रहण एवं पुनर्वास अधिनियम 2013 को सभी मामलों में लागू करें। भूमि अधिग्रहण को केंद्रीय सूची में रखे, ताकि राज्यों में किसान विरोधी कानून न बने। 

- किसानों की समस्याओं को लेकर संसद में संयुक्त अधिवेशन बुलाया जाए। एक माह तक की समीक्षा के बाद किसान हक में समाधान निर्णय हो।

Farmers Movement News Haridwar to Meerut Peace and struggle in Delhi and huge demands of farmers
भाकियू किसान यात्रा - फोटो : अमर उजाला

हरिद्वार के चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत घाट से दिल्ली कूच को भाकियू का रणसिंघा बजा था। राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने क्रांति यात्रा का शुभारंभ किया। दस दिन के तय कार्यक्रम के अनुरूप पदयात्रा में पश्चिमी यूपी के साथ पूर्वांचल और अन्य प्रांतों के किसानों ने भी भागीदारी की। इंडियन कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ फार्मर मूवमेंट, इंटरनेशनल संगठन एलवीसी सहित कई किसान संघों का क्रांति यात्रा को समर्थन मिला। व्यवस्थित और शांतिपूर्ण तरीके से प्रारंभ हुई यात्रा में रिमझिम बारिश के मौसम ने अड़चनें भी डाली, लेकिन किसान जोश और जज्बे के साथ आगे बढ़ते रहे।

पदयात्रा का पहला पड़ाव स्वामी रामदेव के पतंजलि योग विद्या पीठ बहादराबाद में रहा, जहां किसानों के भोजन और विश्राम का पूरा बंदोबस्त बाबा रामदेव की देखरेख में हुआ। अगले दिन क्रांति यात्रा मंगलौर पहुंची। यूपी द्वार पर पुरकाजी के भूराहेड़ी में 25 सितंबर को किसानों का पुष्प वर्षा से स्वागत हुआ। ढोल, नगाड़े और रणसिंघे की गूंज के साथ पदयात्रा ने बरला इंटर कॉलेज बरला में पड़ाव किया।

क्षेत्रीय गांव के किसानों और ग्रामीणों ने खानपान की जिम्मेदारी संभाली। आंदोलन में कहीं भी कोई बेइंतजामी दिखाई नहीं दी। आम आदमी भी पैदल यात्रा के हक में नजर आया। मुजफ्फरनगर शहर में शिव चौक पर स्वागत में फूलों की बारिश की गई। चौधरी नरेश टिकैत ने हर्ष और उल्लास से आमजन का अभिवादन स्वीकार किया। हिंदू और मुस्लिम कार्यकर्ता गले मिले। कूकड़ा मंडी में यात्रा का ठहराव रहा, जहां किसानों को आतिथ्य देने में सामाजिक संगठनों, व्यापारियों और उद्यमियों ने फर्ज निभाया।

खतौली के भैंसी में 27 सितंबर को भाकियू जिलाध्यक्ष राजू अहलावत की अगुवाई में क्रांति यात्रा को किसानों ने सिर-माथे पर रखा। खतौली नगर में भी पदयात्रा का जोरदार स्वागत हुआ। मेरठ के दौराला पहुंची यात्रा में भाकियू के प्रवक्ता राकेश टिकैत की कई दिन पैदल चलने से तबीयत भी खराब हुई, मगर हौसले के साथ किसान आगे बढ़ते रहे। परतापुर, मुरादनगर में पड़ाव के बाद एक अक्टूबर को किसान क्रांति यात्रा गाजियाबाद पहुंच गई। महात्मा गांधी और लालबहादुर शास्त्री की जयंती पर यात्रा का अंतिम पड़ाव दिल्ली का किसान घाट था, जहां क्रांति यात्रा पंचायत में बदल जाती और केंद्र सरकार के समक्ष अपनी मांगें रखी जाती। दिल्ली के गाजीपुर स्थित यूपी बॉर्डर से आगे यात्रा को नहीं जाने दिया गया, जिससे टकराव के हालात पैदा हुए।

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