बर्तन, कपडे़ और चक्की लेकर कलक्ट्रेट पहुंचे किसान, आर-पार की लड़ाई का एलान, ये रहीं प्रमुख मांगें
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बिजनौर जनपद में गन्ना बकाया सहित अनेक समस्याओं के समाधान के लिए किसानों ने कलक्ट्रेट में धरना दिया। किसान अपने बर्तन, कपड़े, चक्की आदि के साथ कलक्ट्रेट पहुंचे। डीएम कार्यालय के सामने पार्क में किसानों ने तमोटी गाड़ ली और बरामदों में कपड़े बिछाकर बैठ गए। किसानों ने गन्ना भुगतान व अन्य समस्याओं के समाधान के लिए आरपार की लड़ाई का एलान किया।
किसान सोमवार सुबह से ही रशीदपुर गढ़ी चौक पर भारी संख्या में एकत्र हुए। वहां से किसानों ने नारेबाजी करते हुए कलक्ट्रेट कूच किया। प्रशासन ने कहीं पर भी किसानों को रोकने की कोशिश नहीं की। कलक्ट्रेट में पहुंचकर किसानों ने आंदोलन शुरू कर दिया। भाकियू जिलाध्यक्ष दिगंबर सिंह ने कहा कि किसानों की आवाज उठाने वालों पर मुकदमे किए जा रहे हैं और सेटिंग करने वालों को कुछ नहीं कहा जा रहा है।
जिले में अमीरों के लिए अलग और गरीबों के लिए अलग कानून चल रहा है। दो हजार का बिजली बिल होने पर किसान का कनेक्शन काट दिया जाता है। लेकिन किसानों के अरबों रुपये की कर्जदार मिलों के खिलाफ कोई एक शब्द नहीं बोलता है। लेकिन अब ये बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अब या तो किसानों की समस्याओं का समाधान होगा या फिर महाभारत होगा। प्रशासन की मर्जी है चाहे वह जिले में क्रांति लाए या फिर शांति लाए।
कहा कि कई गांवों में 35-35 सालों से चकबंदी चल रही है। चकबंदी विभाग के अफसरों के चक्कर काटते- काटते किसानों की जिंदगी खत्म हो गई है। लेकिन भ्रष्ट अफसरों पर कार्रवाई नहीं की गई। कहा कि किसान के ट्रैक्टर का बीमा न होने पर किसान का जुर्माना किया जाता है। लेकिन जिले के डीएम और एसपी और सभी थानों की गाड़ियों का भी बीमा नहीं है। किसानों को रोकने के लिए जिला प्रशासन धारा 144 लगाई है। लेकिन अब जिले के किसान कलक्ट्रेट में धारा 188 लगाते हैं। अगर कोई अधिकारी कलक्ट्रेट में घुसा तो उसे किसान यूनियन गिरफ्तार कर लेगी।
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किसानों के लिए पानी की व्यवस्था की मांग करते हुए कहा कि पानी नहीं आया तो किसान डीएम आवास में घुस जाएंगे। वहां जगह कलक्ट्रेट से ज्यादा है। वक्ताओं ने कहा कि किसानों की अनदेखी को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। किसान भुगतान सहित बाकी मांगें मनवाकर रहेंगे। धरने की अध्यक्षता रूकन सिंह और संचालन सुनील पहलवान ने किया। इस दौरान राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य ओमपाल सिंह, रामौतार सिंह, संदीप त्यागी, दीपक तोमर, राजेंद्र सिंह, अतुल कुमार, कुलदीप सिंह, मदन सिंह, विजयपाल सिंह, विनोद परमार, समरपाल सिंह, नतेंद्र प्रधान, लुधियान सिंह, रामपाल सिंह, बलराम सिंह, जसवीर सिंह, बिजेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
पुलिस और पीएसी को किया गया तैनात
कलक्ट्रेट में आसपास भारी पुलिस व पीएसी बल तैनात रहा। पहली बार किसानों के आंदोलन में अर्द्धसैनिक बल के जवान लगाए गए थे। हालांकि किसी ने किसानों को रोकने की कोशिश नहीं की। आंदोलन के दौरान कुछ जगह पर किसानों की पुलिस से नोकझोंक हुई। एसपी कार्यालय के बाहर किसानों ने अपने वाहन खड़े किए थे।
वहां वाहन हटाने को लेकर किसानों व एक एलआईयू कर्मचारी में कहासुनी हो गई। किसानों ने कलक्ट्रेट में आंदोलन कई दिन चलाने का एलान किया। डीएम ऑफिस के सामने किसानों ने तमोटी भी गाड़ ली। कहा कि दिन रात किसान यहीं रुकेंगे। किसान खाने पीने का सामान, बर्तन, ईंधन चक्की भी साथ लाए हैं।
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पॉलिथिन का किया बहिष्कार
सरकारी कार्यक्रमों में भी प्रशासन पॉलिथीन का बहिष्कार नहीं करता है। लेकिन आंदोलन में शामिल किसानों ने पॉलिथीन का प्रयोग न करने की बात कही। वक्ताओं ने घर से बर्तन लाने या बाजार से बर्तन खरीदकर उनमें खाना खाने को कहा। नया ट्रैफिक एक्ट भी किसानों के निशाने पर रहा। कहा कि किसानों को फसलों की लागत का लाभकारी मूल्य आज तक नहीं मिला और उन पर ट्रैफिक के नए नए नियम थोपे जा रहे हैं। कोई भी कुछ देखने को तैयार नहीं है।
ये रहीं प्रमुख मांगें
- महंगाई को आधार मानकर गन्ना मूल्य बढ़ाने।
- नजीबाबाद चीनी मिल की क्षमता बढ़ाने।
- बकाया भुगतान ब्याज सहित दिलाने।
- रावली से बालावाली तक गंगा पर तटबंध बनवाने।
- अफजलगढ़ के किसानों को जमीन का मालिकाना हक दिलाने।
- तहसील में दाखिल खारिज समय से करने व खतौनी में दर्ज गलत नामों में संशोधन करने।
- कोऑपरेटिव सहकारी समितियों में भ्रष्टाचार की जांच कराने।
- बिजली की जर्जर लाइन बदलवानें।
- फूंके ट्रांसफार्मर 24 घंटे में बदलवाने।
- चकबंदी की लंबित प्रक्रियाएं शीघ्र पूरी कराने।
- नहरों में टेल तक पानी पहुंचाने।
- सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा सेवा बहाल करने।
- निजी विद्यालयों में हो रही अवैध वसूली बंद कराने।
- किसान सम्मान निधि से छूटे किसानों का पंजीकरण कराने।
- चक मार्गों से अवैध कब्जे हटाए जाएं।
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