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जंगल की विधुत बिजली कम मिलने के कारण किसानो के सामने धान की रोपाई का संकट खडा हुआ
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खेतों की सिंचाई के लिए दिन में मिले किसानों को बिजली
माछरा। क्षेत्र के गांवों में खेतों की विद्युत आपूर्ति कम होने से धान की रोपाई का संकट खड़ा हो गया है। किसानों को जनरेटर द्वारा नलकूप चलाकर खेत में पानी भरना पड़ रहा है।
केंद्र व प्रदेश सरकार जहां किसानों की आय दोगुना करने की घोषणा कर रही है। वहीं किसानों को सिंचाई के लिए भी मात्र 10 घंटे बिजली रात्रि के समय मिल रही है। किसान जितेंद्र, प्रमोद, कृष्णपाल आदि का कहना है कि किसानों को रात्रि की बजाय दिन में बिजली आपूर्ति होनी चाहिए। इस संबंध में हसनपुर कलां, माछरा, गोविंदपुरी, मुंडाली, सिसौली आदि के अवर अभियंताओं से पूछताछ की गई। उपखंड किठौर व अधिशासी अभियंता से पूछा तो बताया गया कि सरकार ने यह निर्णय लिया है कि गांवों की बिजली को दो स्थानों पर बांटा गया है कि जिसमें दिन में 18 घंटे बिजली दी जाएगी। रात्रि में किसान को जंगल की ट्यूबवैल चलाने के लिए 10 घंटे बिजली दी जा रही है जिसमें वह कुछ नहीं कर सकते हैं। जैसा शासन से आदेश है वह उसी अनुरूप कार्य करेंगे।
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माछरा। क्षेत्र के गांवों में खेतों की विद्युत आपूर्ति कम होने से धान की रोपाई का संकट खड़ा हो गया है। किसानों को जनरेटर द्वारा नलकूप चलाकर खेत में पानी भरना पड़ रहा है।
केंद्र व प्रदेश सरकार जहां किसानों की आय दोगुना करने की घोषणा कर रही है। वहीं किसानों को सिंचाई के लिए भी मात्र 10 घंटे बिजली रात्रि के समय मिल रही है। किसान जितेंद्र, प्रमोद, कृष्णपाल आदि का कहना है कि किसानों को रात्रि की बजाय दिन में बिजली आपूर्ति होनी चाहिए। इस संबंध में हसनपुर कलां, माछरा, गोविंदपुरी, मुंडाली, सिसौली आदि के अवर अभियंताओं से पूछताछ की गई। उपखंड किठौर व अधिशासी अभियंता से पूछा तो बताया गया कि सरकार ने यह निर्णय लिया है कि गांवों की बिजली को दो स्थानों पर बांटा गया है कि जिसमें दिन में 18 घंटे बिजली दी जाएगी। रात्रि में किसान को जंगल की ट्यूबवैल चलाने के लिए 10 घंटे बिजली दी जा रही है जिसमें वह कुछ नहीं कर सकते हैं। जैसा शासन से आदेश है वह उसी अनुरूप कार्य करेंगे।
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