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बागपत: कृषि कानून के विरोध में 19 दिसंबर को बड़ौत से खोला जाएगा मोर्चा, खाप चौधरी बोले-अब आर-पार की लड़ाई

Thu, 17 Dec 2020 06:04 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत Published by: Dimple Sirohi Updated Thu, 17 Dec 2020 06:04 PM IST
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Farmers agitation: Front will be opened in Baraut on December ninteen to protest against agricultural legislation
बैठक को संबोधित करते खाप चौधरी - फोटो : amar ujala

कृषि कानून के विरोध में सिंघु बॉर्डर और यूपी गेट पर किसान आंदोलन कर रहे हैं। तीसरा मोर्चा अब दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर बड़ौत में औद्योगिक पुलिस चौकी पर खोला जाएगा। 19 दिसंबर का दिल्ली-सहारनपुर हाईवे जाम किया जाएगा। किसान अनिश्चितकालीन धरना देंगे। बड़ौत में चौधरी सुरेंद्र सिंह के आवास पर देशखाप के थांबेदारो की बैठक हुई। एलान किया गया कि सरकार से आरपार की लड़ाई होगी।

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गुरुवार को पश्चिमी यूपी के किसान संगठनों के नेताओ और कार्यकर्ताओं ने दिल्ली कूच किया। भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने दिल्ली रवाना होने से पहले बड़ौत में खाप चौधरियों के साथ बैठक की।  बता दें कि किसान आंदोलन के समर्थन में अब खाप पंचायनों ने भी अपना समर्थन दिया है। गुरुवार को हुई बैठक के बाद तीसरा मोर्चा बड़ौत से खोलने का एलान किया गया है।
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बड़ौत में चौधरी सुरेंद्र सिंह के आवास पर देशखाप के थांबेदारो की बैठक हुई। चौधरी सुरेंद्र सिंह ने बताया कि औद्योगिक पुलिस चौकी पर आंदोलन को चौबीसी खाप छपरौली के चौधरी सुभाष और पंवार खाप के चौधरी धर्मवीर सिंह ने भी समर्थन दिया है। जिले की जनभावना को देखते हुए बड़ौत में आंदोलन शुरू करेंगे।

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यह होता है थांबेदार
बता दें कि खाप व्यवस्था का शब्द है। देश खाप 84 गांव की है। व्यवस्था संचालन के लिए इन 84 गांव को टुकड़ों में बांटकर उन पर एक-एक चौधरी बनाया जाता है, जिसे थांबेदार कहा जाता है।  

उधर, खाप चौधरियों के साथ बैठक के दौरान पत्रकारों से बातचीत करते हुए भाकियू राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने कहा कि सरकार हठधर्मिता कर रही है। अब तक छह दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन कोई हल नहीं निकल सका। सरकार को सर्वदलीय बैठक बुलाकर किसानों की समस्या का हल निकालना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आज किसानों के आंदोलन का 21वां दिन हो चुके हैं, किसान सर्दी के मौसम में खुले आसमान के नीचे पड़ें हैं, लेकिन सरकार कोई ध्यान नहीं दे रही है। कहा कि सरकार चाहती है कि किसानों में टकराव पैदा हो। किसान टकराव नहीं चाहते, वे अपनी समस्याओं का समाधान चाहते हैं। सरकार इस मामले को मामूली मानकर चल रहा है जबकि यह गंभीर मामला है।

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