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नकली पेट्रोल-डीजल मामला: 10 साल बाद खुली काले धंधे की पोल, कार्रवाई के बाद चुप्पी साध गए अधिकारी
Fri, 23 Aug 2019 02:53 AM IST
कपिल kapil
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: कपिल kapil
Updated Fri, 23 Aug 2019 02:53 AM IST
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नकली पेट्रोल-डीजल का मामला
- फोटो : अमर उजाला
मेरठ जिले में 190 पेट्रोल पंप हैं। अमूमन 2.85 लाख लीटर पेट्रोल और 1.90 लाख डीजल रोजाना पेट्रोल पंपों से बिकता है। भारी मात्रा में नकली तेल बेचकर पब्लिक को लूटा जा रहा है। पुलिस ने इसकी पोल खोल दी, कार्रवाई भी की और अब चुप्पी साध ली। तेल माफियाओं के आगे सरकारी मशीनरी कैसे नतमस्तक हुई कि अधिकारी भी बयान देने से बचने लगे। लोगों को लूटकर करोड़ों की काली कमाई करने वाले उजागर क्यों नहीं हो रहे, इसको लेकर शहर में अलग-अलग चर्चा है।
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नकली पेट्रोल-डीजल बनाने का भंडाफोड़ होने के बाद तेल माफियाओं में खलबली मच गई। इस मामले में कई बड़े व्यापारी शामिल हैं। काली कमाई करने वालों की परतें खुलनी शुरू हुई। तमाम सिफारिशों का दौर चला। नकली तेल बनने वाले कानून के शिकंजे में फंस चुके थे। कई लोगों के नाम उजागर होने बाकी थे। मामला तूल पकड़ते ही सत्ताधारी नेता भी तेल माफियाओं के बचाव में कूद गए। सरकारी मशीनरी खामोश हुई और कार्रवाई करने वाले भी पीछे हटने लगे। तेल माफियाओं के खिलाफ गठित एसआईटी भी शांत हो गई। चर्चा है कि जांच भी प्रभावित करने की पूरी प्लानिंग बन चुकी है।
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दस साल थे खामोश...
दस साल से परतापुर व टीपीनगर में नकली तेल बनाने की बात आरोपियों ने ही पुलिस को बताई। जिसमें जिला आपूर्ति विभाग और पुलिस की मिलीभगत से ये धंधा चलना बताया गया। माफियाओं के पास थिनर, सॉल्वेंट और बेंजिन पंजाब और हरियाणा से आता था। इनसे नकली तेल बनता रहा और जिला आपूर्ति विभाग सोता रहा। केमिकल का प्रयोग होने पर भी संबंधित विभाग ने एक बार भी जांच नहीं की। दस साल से सरकारी मशीनरी खामोश थी। अब फिर वही ढर्रा शुरू हो गया।
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