Meerut: जाली डिग्री से चल रहा था अस्पताल, आठ डाॅक्टरों पर प्राथमिकी, ब्लैकमेलिंग गिरोह का खुलासा
मेरठ के मेडिकल थाना क्षेत्र में जाली डिग्री और फर्जी पंजीकरण के आधार पर चल रहे सहारा अस्पताल का बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में दस्तावेज फर्जी पाए जाने पर आठ डॉक्टरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। अस्पताल का लाइसेंस दो साल पहले ही निरस्त किया जा चुका था।
विस्तार
मेरठ के मेडिकल थाना क्षेत्र में जाली डिग्री और फर्जी पंजीकरण प्रमाणपत्रों के आधार पर सहारा अस्पताल संचालित किए जाने का बड़ा मामला सामने आया है। शिकायत मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग की जांच में दस्तावेज पूरी तरह फर्जी पाए गए।
दिल्ली निवासी मोहम्मद साजिद की तहरीर पर पुलिस ने अस्पताल के संचालक सुकुमार यादव सहित अनिता यादव, इकबाल, सदफ इकबाल, वसीफ और तीन अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है। पुलिस के अनुसार आरोपी संगठित गिरोह की तरह काम कर रहे थे।
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शिकायत के बाद खुला पूरा मामला
दिल्ली के गोविंदपुरी निवासी मोहम्मद साजिद ने बताया कि आरोपियों ने कथित रूप से फर्जी डिग्रियों और उत्तर प्रदेश चिकित्सा परिषद के जाली पंजीकरण प्रमाणपत्रों के आधार पर अस्पताल का पंजीकरण कराया था।
पीड़ित ने दो वर्ष पहले जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद मामला मुख्य चिकित्सा अधिकारी के संज्ञान में आया और स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू की।
जांच के दौरान अस्पताल प्रबंधन द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेज संदिग्ध पाए गए। संबंधित शिक्षण संस्थानों से सत्यापन कराने पर डॉक्टरों की डिग्रियां और प्रमाणपत्र पूरी तरह फर्जी निकले। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल का पंजीकरण निरस्त कर दिया।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि यह गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम करता है और अलग-अलग नामों से अन्य जिलों में भी अस्पताल संचालित कर रहा है।
बताया गया कि अलीगढ़, बुलंदशहर और हाथरस जैसे जिलों में भी इस नेटवर्क की गतिविधियां सामने आई हैं। अलीगढ़ के ज्ञान श्री और देव अस्पताल तथा बुलंदशहर के ममता नर्सिंग होम और गौड़ अस्पताल पर भी कार्रवाई हो चुकी है।
तहरीर में यह भी आरोप लगाया गया है कि गिरोह प्रतिष्ठित और सरकारी नौकरी करने वाले युवकों को प्रेमजाल और विवाह के झांसे में फंसाता था। इसके बाद उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी दी जाती थी।
इन अवैध अस्पतालों में तैयार की जाने वाली मनगढ़ंत चिकित्सकीय रिपोर्ट को मुकदमों का आधार बनाकर पीड़ितों पर दबाव बनाया जाता था। इसके बाद समझौते के नाम पर उनसे मोटी रकम वसूली जाती थी।
पुलिस ने शुरू की कार्रवाई
नगर पुलिस अधीक्षक विनायक गोपाल भोसले ने बताया कि तहरीर के आधार पर आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और मामले की जांच की जा रही है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अशोक कटियार ने बताया कि यह मामला उनके कार्यभार संभालने से पहले का है और शिकायत मिलने के बाद विभागीय जांच कर कार्रवाई की गई थी।