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Meerut News: जर्मनी की महिला की शिकायत पर फर्जी नशा मुक्ति केंद्र का खुलासा, 24 बंधन मुक्त
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मेरठ। शातिराना अंदाज में अपनों को सजा देने का नया ट्रेंड समाज में फर्जी नशा मुक्ति केंद्र बन गया है। बहाना तो इलाज का है, लेकिन यहां पर मानसिक उत्पीड़न कर जुर्म की इंतहा पार होती है। बिना रजिस्ट्रेशन चल रहे ये नशा मुक्ति केंद्र रिश्तों की कब्रगाह बन रहे हैं और यहां के हालात जेल से भी बदतर हैं। यह खुलासा सोमवार को जर्मनी की महिला की शिकायत पर जिला प्रशासन ने किया है।
महिला के देवर को यहां सात साल तक बंधक बनाकर रखा गया। प्रशासन ने बिना रजिस्ट्रेशन चल रहे कुल चार नशा मुक्ति केंद्रों पर छापा मारकर 24 लोगों को बंधनमुक्त कराया है। जिनकी मानसिक स्थिति को देखते हुए सुभारती मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया। फर्जी नशा मुक्ति केंद्र को सील करके संचालक पर मुकदमा कराया। इस मामले में परिवार के लोगों से भी पूछताछ हो सकती है।
कोतवाली के एक मोहल्ले में रहने वाला एक युवक को सात साल से परतापुर के भूड़बराल स्थित नशा मुक्ति केंद्र में इलाज के नाम पर रखा हुआ था। उक्त युवक का कसूर था कि वह शराब पीने का आदी है। परिवार हर माह पांच हजार रुपये संचालक को पहुंचा देते है, लेकिन कभी उसका हाल नहीं जाना। जर्मनी में बैठी भाभी को तरस आया और उन्होंने देवर की तलाश शुरू कर दी। महिला ने गृह मंत्रालय और मानवाधिकार आयोग में शिकायत कर दी।
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खोजबीन की तो नशा मुक्ति केंद्र की जानकारी भी महिला को मिल गई। जर्मनी से महिला मेरठ पहुंची और डीएम से मुलाकात की। सूचना गोपनीय बताई तो डीएम ने एसडीएम सदर कमल किशोर देशभूषण कंडारकर की देखरेख में कमेटी गठित कर दी। एसडीएम सदर ने सीओ ब्रह्मपुरी प्रमोद कुमार सिंह, परतापुर पुलिस के साथ सोमवार शाम भूड़बराल में नशा मुक्ति केंद्र में छापा मारा।
शराब की बोतलें और सिगरेेट मिलीं
जहां से उक्त युवक सहित 12 लोगों को मुक्त करा दिया। नशा मुक्ति केंद्र का रजिस्ट्रे्शन नहीं था और मानकों के विरुद्ध संचालित होता मिला। मुक्त हुए युवकों ने बताया कि उनका मानसिक उत्पीड़न हो रहा है। पुलिस ने तलाशी ली, जहां पर सिगरेट और शराब की बोतलें मिली। बताया गया कि उक्त युवकों को नशे का सेवन भी कराया जाता था। सवाल उठता कि यहां पर इलाज के नाम पर परिवार की दुश्मनी का दंश लोग झेल रहे हैं। परिवार उनके इलाज के नाम पर रिश्तों को खत्म कर रहे हैं। कई लोगों ने अपने परिवार में जाने से इनकार कर दिया।
चार केेंद्रों पर पर मारा छापा
पुलिस-प्रशासन को देखकर आसपास के लोगों की भीड़ लग गई। लोगों ने परतापुर में कई फर्जी नशा मुक्ति केंद्र संचालित होने बताए। पुलिस टीम ने चार केंद्रों पर छापा मारा। जहां से कुल 24 लोगों को बंधन मुक्त कराया। सभी नशा मुक्ति केंद्र फर्जी चलते मिले हैं। वहां पर इलाज नहीं, मुक्ति के नाम पर अवैध हिरासत में लोगों को रखा हुआ था।
परिवार का दंश झेल रहा देवर
महिला ने बताया कि वह मूलरूप से मेरठ के शास्त्रीनगर की रहने वाली हैं और अब जर्मनी में शिफ्ट हो गई हैं। मंगलवार को सुभारती मेडिकल कॉलेज में पहुंचकर वह देवर से मिलेंगी और आगे की कार्रवाई भी करेंगी। महिला का कहना है कि उनके देवर अपने ही परिवार का दंश झेल रहे हैं। सात साल से उनको बंधक बनाकर रखा हुआ था। फर्जी नशा मुक्ति केंद्र में जब पुलिस और प्रशासन की टीम पहुंची तो उन्होंने खुद देखा कि वहां पर किस तरह लोगों को रखा हुआ था।
क्या पुलिस की मिलीभगत से चल रहा था केंद्र
परतापुर में एक नहीं, चार फर्जी नशा मुक्ति केंद्र का भंडाफोड़ हुआ है। जहां पर लोगों को इलाज के नाम पर परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर लोगों को अवैध हिरासत में रखा हुआ था। लोगों ने बताया कि नशा मुक्ति केंद्र में पुलिस भी आती रहती थी। सवाल उठता है कि क्या पुलिस की मिलीभगत से यह अवैध नशा मुक्ति केंद्र चल रहे थे। जहां पर न कोई मनोचिकित्सक और न नशा छुड़ाने की दवाई मिली।
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जर्मनी में रहने वाली एक महिला ने शिकायत की थी। जिस पर प्रशासन ने कार्रवाई की है। फर्जी नशा मुक्ति केंद्र में लोगों को अवैध तरीके से रखा हुआ था, जिनको मुक्त कराया है। लोगों के इलाज के बहाने उनका मानसिक उत्पीड़न हो रहा था। केंद्र को सीज कर दिया है और डिप्टी सीएमओ की ओर से परतापुर में मुकदमा दर्ज कराया गया है। दो लोग पुलिस ने हिरासत में लिए हुए हैं।
दीपक मीणा, डीएम
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महिला के देवर को यहां सात साल तक बंधक बनाकर रखा गया। प्रशासन ने बिना रजिस्ट्रेशन चल रहे कुल चार नशा मुक्ति केंद्रों पर छापा मारकर 24 लोगों को बंधनमुक्त कराया है। जिनकी मानसिक स्थिति को देखते हुए सुभारती मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया। फर्जी नशा मुक्ति केंद्र को सील करके संचालक पर मुकदमा कराया। इस मामले में परिवार के लोगों से भी पूछताछ हो सकती है।
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कोतवाली के एक मोहल्ले में रहने वाला एक युवक को सात साल से परतापुर के भूड़बराल स्थित नशा मुक्ति केंद्र में इलाज के नाम पर रखा हुआ था। उक्त युवक का कसूर था कि वह शराब पीने का आदी है। परिवार हर माह पांच हजार रुपये संचालक को पहुंचा देते है, लेकिन कभी उसका हाल नहीं जाना। जर्मनी में बैठी भाभी को तरस आया और उन्होंने देवर की तलाश शुरू कर दी। महिला ने गृह मंत्रालय और मानवाधिकार आयोग में शिकायत कर दी।
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खोजबीन की तो नशा मुक्ति केंद्र की जानकारी भी महिला को मिल गई। जर्मनी से महिला मेरठ पहुंची और डीएम से मुलाकात की। सूचना गोपनीय बताई तो डीएम ने एसडीएम सदर कमल किशोर देशभूषण कंडारकर की देखरेख में कमेटी गठित कर दी। एसडीएम सदर ने सीओ ब्रह्मपुरी प्रमोद कुमार सिंह, परतापुर पुलिस के साथ सोमवार शाम भूड़बराल में नशा मुक्ति केंद्र में छापा मारा।
शराब की बोतलें और सिगरेेट मिलीं
जहां से उक्त युवक सहित 12 लोगों को मुक्त करा दिया। नशा मुक्ति केंद्र का रजिस्ट्रे्शन नहीं था और मानकों के विरुद्ध संचालित होता मिला। मुक्त हुए युवकों ने बताया कि उनका मानसिक उत्पीड़न हो रहा है। पुलिस ने तलाशी ली, जहां पर सिगरेट और शराब की बोतलें मिली। बताया गया कि उक्त युवकों को नशे का सेवन भी कराया जाता था। सवाल उठता कि यहां पर इलाज के नाम पर परिवार की दुश्मनी का दंश लोग झेल रहे हैं। परिवार उनके इलाज के नाम पर रिश्तों को खत्म कर रहे हैं। कई लोगों ने अपने परिवार में जाने से इनकार कर दिया।
चार केेंद्रों पर पर मारा छापा
पुलिस-प्रशासन को देखकर आसपास के लोगों की भीड़ लग गई। लोगों ने परतापुर में कई फर्जी नशा मुक्ति केंद्र संचालित होने बताए। पुलिस टीम ने चार केंद्रों पर छापा मारा। जहां से कुल 24 लोगों को बंधन मुक्त कराया। सभी नशा मुक्ति केंद्र फर्जी चलते मिले हैं। वहां पर इलाज नहीं, मुक्ति के नाम पर अवैध हिरासत में लोगों को रखा हुआ था।
परिवार का दंश झेल रहा देवर
महिला ने बताया कि वह मूलरूप से मेरठ के शास्त्रीनगर की रहने वाली हैं और अब जर्मनी में शिफ्ट हो गई हैं। मंगलवार को सुभारती मेडिकल कॉलेज में पहुंचकर वह देवर से मिलेंगी और आगे की कार्रवाई भी करेंगी। महिला का कहना है कि उनके देवर अपने ही परिवार का दंश झेल रहे हैं। सात साल से उनको बंधक बनाकर रखा हुआ था। फर्जी नशा मुक्ति केंद्र में जब पुलिस और प्रशासन की टीम पहुंची तो उन्होंने खुद देखा कि वहां पर किस तरह लोगों को रखा हुआ था।
क्या पुलिस की मिलीभगत से चल रहा था केंद्र
परतापुर में एक नहीं, चार फर्जी नशा मुक्ति केंद्र का भंडाफोड़ हुआ है। जहां पर लोगों को इलाज के नाम पर परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर लोगों को अवैध हिरासत में रखा हुआ था। लोगों ने बताया कि नशा मुक्ति केंद्र में पुलिस भी आती रहती थी। सवाल उठता है कि क्या पुलिस की मिलीभगत से यह अवैध नशा मुक्ति केंद्र चल रहे थे। जहां पर न कोई मनोचिकित्सक और न नशा छुड़ाने की दवाई मिली।
जर्मनी में रहने वाली एक महिला ने शिकायत की थी। जिस पर प्रशासन ने कार्रवाई की है। फर्जी नशा मुक्ति केंद्र में लोगों को अवैध तरीके से रखा हुआ था, जिनको मुक्त कराया है। लोगों के इलाज के बहाने उनका मानसिक उत्पीड़न हो रहा था। केंद्र को सीज कर दिया है और डिप्टी सीएमओ की ओर से परतापुर में मुकदमा दर्ज कराया गया है। दो लोग पुलिस ने हिरासत में लिए हुए हैं।
दीपक मीणा, डीएम