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नकली सीमेंट फैक्टरी का भंडाफोड, चंद रुपयों के लालच में लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे थे आरोपी

Thu, 10 Sep 2020 11:56 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Thu, 10 Sep 2020 11:56 PM IST
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Fake cement factory busted in Muzaffarnagar in UP
cement
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में चंद रुपयों के लालच में नकली सीमेंट फैक्टरी चला रहे आरोपी लोगों को दुहरा नुकसान पहुंचा रहे थे। एक ओर तो आरोपी लोगों की खून-पसीने की गाढ़ी कमाई लूट रहे थे, वहीं उनके पूरे परिवार के जीवन से भी खिलवाड़ कर रहे थे। 
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रामपुर तिराहे के पास पकड़ी गई नकली सीमेंट फैक्टरी में आरोपी सीमेंट बनाने के लिए जिस सामग्री का इस्तेमाल कर रहे थे, उसे पुराना जमा हुआ सीमेंट व पत्थरों को पीसकर तैयार किया जा रहा था। दरअसल, सीमेंट नमी खाकर कुछ समय में खराब होकर जम जाता है। जमने के बाद सीमेंट की मजबूती या उसकी ताकत खत्म हो जाती है, जिसके बाद वह अनुपयोगी हो जाता है।
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आरोपी इसी का फायदा उठाकर इस बेकार व जम चुके सीमेंट को औने-पौने दाम पर खरीद लाते थे। इसके बाद इस सीमेंट को फिर से पीसकर पाउडर बनाया जाता था, जिसमें पत्थरों का चूरा और थोड़ी सी मात्रा में असली सीमेंट मिला लिया जाता था।
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इसके बाद इस सीमेंट को पैक कर बाजार में उतार दिया जाता था। पुरानी सीमेंट की इस्तेमाल होने के कारण आम व्यक्ति इस सीमेंट में फर्क भी नहीं कर पाता। सीमेंट विक्रेता भी मोटे मुनाफे की चाह में नकली सीमेंट बेचकर इनके गुनाह में शामिल हो जाता था।

हर कट्टे पर कमाते थे दो सौ रुपये मुनाफा
नकली सीमेंट बना रहे आरोपी रोजाना लाखों के वारे-न्यारे कर रहे थे। दरअसल, जांच में सामने आया कि पुराने सीमेंट को पीसकर नया बनाने में प्रति कट्टा लागत 140 रुपये तक आती थी। तैयार होने के बाद यह कट्टा 335-340 रुपये में सीमेंट विक्रेता को सप्लाई किया जाता था, जिसके बाद इसे बाजार दाम पर असली सीमेंट के कट्टों में मिलाकर बेचा जाता था।

इन्होंने कहा 
भवन निर्माण विशेषज्ञ मयंक कुमार का कहना है कि सीमेंट एक बार जम जाने के बाद उसकी ताकत पूरी तरह खत्म हो जाती है। उसे पीसकर फिर से नया बनाने से उसकी मजबूती नहीं लौटती। ऐसे में नकली सीमेंट के इस्तेमाल से बनी कोई भी इमारत मजबूत नहीं हो पाती और वह कभी भी भरभराकर ढह सकती है।

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