Kanwar Yatra: हाथ में छड़ी, झुकी कमर... फिर भी नहीं टूटा हौसला, आस्था के सहारे मंजिल की ओर बढ़ते रहे शिवभक्त
कांवड़ यात्रा सिर्फ पैदल सफर नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और संकल्प की मिसाल भी है। मेरठ से गुजर रहे कांवड़ मार्ग पर 70 वर्षीय महादेवी छड़ी के सहारे पैदल चलकर शिवभक्ति का संदेश दे रही हैं। वहीं किसी ने बीमार बहन की सलामती के लिए तो किसी ने पति के स्वस्थ होने की कामना लेकर कांवड़ उठाई है। उम्र, दर्द और छालों के बावजूद शिवभक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ।
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कांवड़ यात्रा में आस्था की ऐसी तस्वीरें सामने आ रही हैं, जो हर किसी को भावुक कर रही हैं। कोई उम्र के आखिरी पड़ाव में भी पैदल चलकर भगवान शिव का जलाभिषेक करने निकला है तो कोई अपनों के स्वस्थ जीवन की कामना लेकर हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रहा है। चौधरी चरण सिंह कांवड़ मार्ग पर ऐसे ही कई शिवभक्तों ने अपनी आस्था और संकल्प की कहानी साझा की।
दिल्ली के जसवंत नगर निवासी 70 वर्षीय महादेवी हाथ में छड़ी लेकर, झुकी कमर और पैरों में पड़े छालों के बावजूद लगातार पैदल चल रही थीं। सीने से गंगाजल की कैन बांधे वह अपनी बेटी हेमलता और रिश्तेदार राजरानी के साथ हरिद्वार से दिल्ली लौट रही थीं।
महादेवी ने बताया कि यह उनकी तीसरी कांवड़ यात्रा है। उन्होंने कहा कि भगवान भोलेनाथ की कृपा पूरे परिवार पर बनी हुई है। उम्र भले बढ़ गई हो, लेकिन हौसला आज भी पहले जैसा है। उनका कहना है कि अगर स्वास्थ्य ने साथ दिया तो अगले साल भी कांवड़ लेकर आएंगी।
महादेवी की बेटी हेमलता ने बताया कि वह पिछले दो वर्षों से बीमार थीं, लेकिन अब बाबा भोलेनाथ की कृपा से स्वस्थ हैं। उन्होंने कहा कि जब तक शरीर साथ देगा, वह हर साल कांवड़ लेकर आएंगी। उनके साथ दिल्ली की नंदनगरी निवासी 60 वर्षीय राजरानी भी दूसरी बार कांवड़ यात्रा कर रही हैं। उनका कहना है कि गंगा मैया और भोले बाबा की कृपा से परिवार के सभी कार्य पूरे हो रहे हैं।
बहन की सलामती के लिए उठाई कांवड़
दिल्ली निवासी 16 वर्षीय साहिल अपनी बीमार बहन के लिए हरिद्वार से कांवड़ लेकर आया है। उसने बताया कि उसकी बहन लंबे समय से बीमार है। वह भोलेनाथ से उसकी जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहा है और मनोकामना पूरी होने पर अगले वर्ष भी कांवड़ यात्रा करेगा।
किसी ने पति तो किसी ने परिवार के लिए मांगी मन्नत
इटावा की 70 वर्षीय महादेवी तीसरी बार कांवड़ यात्रा कर रही हैं। वहीं दिल्ली के बुराड़ी निवासी 73 वर्षीय रामबिहारी अपनी 70 वर्षीय पत्नी ओमवती के साथ पहली बार संयुक्त रूप से हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रहे हैं।
उधर, गाजियाबाद की 60 वर्षीय रामवती ने बताया कि उनके पति फालिज से पीड़ित हैं और लंबे समय से बिस्तर पर हैं। उन्होंने भोले बाबा से पति के जल्द स्वस्थ होने की मन्नत मांगी है। उनका विश्वास है कि भगवान शिव उनकी प्रार्थना जरूर सुनेंगे।