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खौफ में चश्मदीद गवाह... अपराधियों को मिल गईं क्लीनचिट, तमाशबीन बनी पुलिस
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खौफ में चश्मदीद, अपराधी जमानत पर, पुलिस तमाशबीन बनी
मेरठ। खौफ और सुरक्षा न मिलने के चलते चश्मदीद गवाह कई अपराधियों के खिलाफ गवाही नहीं दे पाए। नतीजा पुलिस अपराधियों के खिलाफ मजबूत पैरवी नहीं कर पाई और अपराधियों को जमानत मिल गई। हालांकि कई बड़े बदमाश दूसरे मुकदमों में जमानत न मिलने या बरी न होने पर अभी जेल में ही हैं।
शातिर अपराधी योगेश भदौड़ा, उधम सिंह, भूपेंद्र बाफर, सुमित जाट, मोनू जाट व भरतू नाई सहित 52 बड़े अपराधी जेल में बंद हैं। ठोस गवाही और पीड़ित पक्ष की पैरवी के अभाव में किसी एक भी बड़े अपराधी को मेरठ पुलिस सजा नहीं करा पाई है। चश्मदीदों का दबी जुबान से कहना है कि अपराधियों से वह दुश्मनी कैसे लें लें। जब कोई घटना चर्चा में रहती है तो पुलिस सुरक्षा देती है, लेकिन बाद में भूल जाती है।
केस 01
साल 2011 में तेरहवीं में योगेश भदौडा के बड़े भाई प्रमोद भदौडा की गोलियां बरसाकर हत्या करने में उधमसिंह नामजद आरोपी बनाया गया था। चश्मदीद गवाह डॉ. सुभाष मलिक समेत 12 लोग थे। गवाही से पहले ही डॉ. मलिक की हत्या कर दी गई। उसके बाद खौफ में किसी ने भी गवाही नहीं दी।
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केस 02
साल 2012 में सरूरपुर के जंगल में तीन लोगों की हत्या में योगेश भदौड़ा व उसके साथियों को नामजद किया गया। इस घटना में उधम सिंह की पत्नी गीतांजलि समेत कई चश्मदीद गवाह मुकर गए। सभी आरोपियों को जमानत मिल गई। पांच जून 2014 को पुलिस कस्टडी में नितिन गंजा की कचहरी में हत्या हुई थी, जिसमें योगेश भदौड़ा समेत कई आरोपी बने थे, जिनके खिलाफ भी गवाही नहीं हुई।
केस 03
साल 2016 में रोहटा गांव में तीन व्यापारियों, दंपती समेत आठ लोगों की हत्या हुई। सभी में आरोपी मोनू जाट के खिलाफ किसी ने गवाही नहीं दी। जबकि सभी घटनाओं में 10-12 चश्मदीद गवाह बने थे। एक के बाद एक केस में मोनू की जमानत हो गई। यही हाल मोनू के साथी और कई हत्या करने वाले भरतू नाई निवासी रोहटा का भी है।
केस 04
साल 2012 में केबल व्यापारी पवित्र मैत्रेय की दिनदहाड़े छीपी टैंक के पास हत्या करने में भूपेंद्र बाफर समेत कई आरोपी बने थे। यहां भी कई चश्मदीद गवाह पुलिस ने बनाए थे, लेकिन किसी ने गवाही नहीं दी और बाफर को जमानत मिल गई। इसके अलावा भी भूपेंद्र ने मुजफ्फरनगर में रोहित सांडू को पुलिस कस्टडी से छुड़वाया, जिसमें एक दरोगा की हत्या हो गई थी। इस मामले में भी मुजफ्फरनगर पुलिस ने ठोस सुबूत नहीं तलाशे और उसे जमानत मिल गई है। उसकी रिहाई से पहले पुलिस ने गैंगस्टर की कार्रवाई की, तब जाकर वह जेल में रोका है।
पुलिस के खिलाफ होगी कार्रवाई
एडीजी जोन राजीव सभरवाल का कहना है कि हापुड़ और मुजफ्फरनगर में पुलिस ने कड़ी पैरवी करके अपराधियों को सजा दिलाई है। यह प्रक्रिया पूरे जोन में चलाई जा रही है। अपराधियों के खिलाफ चश्मदीद गवाह को सुरक्षा दी जाएगी। सभी जिले के कप्तानों को निर्देश दिए हैं कि गंभीर अपराध में लिप्त अपराधियों को सजा दिलाने के लिए प्रयासरत रहें। किसी केस में लापरवाही करने पर पुलिस के खिलाफ कार्रवाई भी होगी।
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मेरठ। खौफ और सुरक्षा न मिलने के चलते चश्मदीद गवाह कई अपराधियों के खिलाफ गवाही नहीं दे पाए। नतीजा पुलिस अपराधियों के खिलाफ मजबूत पैरवी नहीं कर पाई और अपराधियों को जमानत मिल गई। हालांकि कई बड़े बदमाश दूसरे मुकदमों में जमानत न मिलने या बरी न होने पर अभी जेल में ही हैं।
शातिर अपराधी योगेश भदौड़ा, उधम सिंह, भूपेंद्र बाफर, सुमित जाट, मोनू जाट व भरतू नाई सहित 52 बड़े अपराधी जेल में बंद हैं। ठोस गवाही और पीड़ित पक्ष की पैरवी के अभाव में किसी एक भी बड़े अपराधी को मेरठ पुलिस सजा नहीं करा पाई है। चश्मदीदों का दबी जुबान से कहना है कि अपराधियों से वह दुश्मनी कैसे लें लें। जब कोई घटना चर्चा में रहती है तो पुलिस सुरक्षा देती है, लेकिन बाद में भूल जाती है।
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केस 01
साल 2011 में तेरहवीं में योगेश भदौडा के बड़े भाई प्रमोद भदौडा की गोलियां बरसाकर हत्या करने में उधमसिंह नामजद आरोपी बनाया गया था। चश्मदीद गवाह डॉ. सुभाष मलिक समेत 12 लोग थे। गवाही से पहले ही डॉ. मलिक की हत्या कर दी गई। उसके बाद खौफ में किसी ने भी गवाही नहीं दी।
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केस 02
साल 2012 में सरूरपुर के जंगल में तीन लोगों की हत्या में योगेश भदौड़ा व उसके साथियों को नामजद किया गया। इस घटना में उधम सिंह की पत्नी गीतांजलि समेत कई चश्मदीद गवाह मुकर गए। सभी आरोपियों को जमानत मिल गई। पांच जून 2014 को पुलिस कस्टडी में नितिन गंजा की कचहरी में हत्या हुई थी, जिसमें योगेश भदौड़ा समेत कई आरोपी बने थे, जिनके खिलाफ भी गवाही नहीं हुई।
केस 03
साल 2016 में रोहटा गांव में तीन व्यापारियों, दंपती समेत आठ लोगों की हत्या हुई। सभी में आरोपी मोनू जाट के खिलाफ किसी ने गवाही नहीं दी। जबकि सभी घटनाओं में 10-12 चश्मदीद गवाह बने थे। एक के बाद एक केस में मोनू की जमानत हो गई। यही हाल मोनू के साथी और कई हत्या करने वाले भरतू नाई निवासी रोहटा का भी है।
केस 04
साल 2012 में केबल व्यापारी पवित्र मैत्रेय की दिनदहाड़े छीपी टैंक के पास हत्या करने में भूपेंद्र बाफर समेत कई आरोपी बने थे। यहां भी कई चश्मदीद गवाह पुलिस ने बनाए थे, लेकिन किसी ने गवाही नहीं दी और बाफर को जमानत मिल गई। इसके अलावा भी भूपेंद्र ने मुजफ्फरनगर में रोहित सांडू को पुलिस कस्टडी से छुड़वाया, जिसमें एक दरोगा की हत्या हो गई थी। इस मामले में भी मुजफ्फरनगर पुलिस ने ठोस सुबूत नहीं तलाशे और उसे जमानत मिल गई है। उसकी रिहाई से पहले पुलिस ने गैंगस्टर की कार्रवाई की, तब जाकर वह जेल में रोका है।
पुलिस के खिलाफ होगी कार्रवाई
एडीजी जोन राजीव सभरवाल का कहना है कि हापुड़ और मुजफ्फरनगर में पुलिस ने कड़ी पैरवी करके अपराधियों को सजा दिलाई है। यह प्रक्रिया पूरे जोन में चलाई जा रही है। अपराधियों के खिलाफ चश्मदीद गवाह को सुरक्षा दी जाएगी। सभी जिले के कप्तानों को निर्देश दिए हैं कि गंभीर अपराध में लिप्त अपराधियों को सजा दिलाने के लिए प्रयासरत रहें। किसी केस में लापरवाही करने पर पुलिस के खिलाफ कार्रवाई भी होगी।