Exclusive: 100 मीटर नाले का निर्माण शुरू होने में लग गए 40 साल, 14 हजार लोग झेल रहे थे जलभराव का दंश
यूपी के बागपत में खिलाड़ियों के गांव मलकपुर में एक नाले के निर्माण को शुरू होने में 40 साल का वक्त लग गया। यह मामला हाईकोर्ट और एससीएसटी आयोग तक भी पहुंचा था। तीनों तहसीलों की टीमें तालाब को कब्जामुक्त और सर्वे कराने में नाकाम हो गई थी।
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उत्तर प्रदेश के बड़ौत में मात्र सौ मीटर नाले के निर्माण की मांग पूरी होने में 40 साल लग गए। ग्रामीणों ने आंदोलन किए, नाला निर्माण के लिए चंदा एकत्र किया, हाईकोर्ट और अनुसूचित जाति जनजाति आयोग तक भी यह मामला पहुंचा, लेकिन समाधान नहीं निकला और 14 हजार की आबादी जलभराव का दंश झेलती रही। अब प्रधान ने गांव के ही एक व्यक्ति की जमीन खरीदकर नाले का निर्माण शुरू कराया है।
भले ही आपको जानकर हैरानी होगी, लेकिन यह सच है। खेल की दुनिया में धाक जमाने वाले खिलाड़ियों के गांव मलकपुर की बड़ी आबादी पिछले 40 सालों से जलभराव की समस्या का दंश झेल रही है। जल निकासी की गांव में उचित व्यवस्था नहीं थी और गांव में दो से तीन फीट गंदा पानी भरा रहता था, लोगों को जल भराव से होकर गुजरना पड़ता। जलभराव व गंदगी बीमारियों के फैलने की भी वजह बनी हुई थी। तालाब को कब्जामुक्त कराने में बड़ौत, खेकड़ा और बागपत तहसील की टीमें भी नाकाम रही थीं।
वर्तमान प्रधान रणवीर सिंह ने तालाब के गंदे पानी की निकासी के लिए नाले निर्माण के लिए जगह तलाश की और बाधा उत्पन्न करने वाले लोगों से निपटने के लिए प्रशासन से सहयोग मांगा। अब निर्माण शुरू होने से ग्रामीणों को राहत मिली है।
एसडीएम सुभाष सिंह ने ग्राम प्रधान रणवीर सिंह की सराहना की और बताया कि वह स्वयं कई बार समस्या के निदान को लेकर गांव में गए तो ग्रामीण नाराजगी जताते थे। अब नाला निर्माण में प्रशासन का पूरा सहयोग रहेगा, किसी तरह की अड़चन आने नहीं दी जाएगी।
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साढ़े पांच लाख रुपये में बनेगा नाला, दस लाख पंपसेट से पानी निकालने में फूंक दिए
जिस नाले के निर्माण पर पांच लाख रुपये की लागत आ रही है, उसके नहीं बनने से रास्तों में जलभराव रहता था और पंपसेट से पानी की निकासी कराने में ही पंचायत ने दस लाख रुपये फूंक दिए थे।
लगभग 35 साल पहले गांव में कोई निधि नहीं आती थी, जिस कारण गांव के पूर्व प्रधान सरदार सिंह ने लगभग 35 साल पहले चंदा एकत्रित कर नाले के निर्माण कार्य शुरू कराने का प्रयास किया था, लेकिन जगह न मिलने चंदा वापस कर दिया था। गांव के लोगों ने कई बार कलक्ट्रेट व तहसीलों में भूख हड़ताल तक की, लेकिन आश्वासन देकर ग्रामीणों को वापस भेज दिया जाता। जलभराव के चलते गांव से 12 से अधिक परिवार पलायन कर चुके हैं।
गांव के हालात ऐसे थे कि बिना बरसात ही गांव की गलियों में गंदा पानी भरा रहता था, बरसात के दिनों में तो लोग घरों में कैद हो जाते थे। यहां पर तक रिश्तेदारों ने भी गांव में आना छोड़ दिया था। कई बार पंप सेट लगाकर तालाब व गलियों में भरा गंदा पानी निकाला जाता था, जिसमें अब तक लगभग 10 लाख रुपये खर्च हो चुके हैं। गांव के राजपाल, कश्मीरी देवी, इंदू, आदित्य का कहना है कि नाला निर्माण कार्य शुरू हो गया हैै। कहा कि अब तो हमारे दिन बदलने वाले है। वर्षों हो गए गंदगी व जल भराव के बीच रहते हुए।
80 मीटर जमीन खरीदी गई : प्रधान
ग्राम प्रधान रणवीर व ग्राम सचिव राहुल सरोरा ने बताया कि खरीदी गई 80 मीटर व अन्य 20 मीटर जगह से नाले निर्माण का कार्य शुरू हो गया है। इसके निर्माण में लगभग साढ़े पांच लाख रुपये की लागत आएगी। नाले का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद तालाब का गंदा पानी नाले के माध्यम से मलकपुर चीनी मिल के नाले के माध्यम से गांव से बाहर निकाला जाएगा।
ये हैं गांव के नामचीन खिलाड़ी
अर्जुन अवार्डी शौकेंद्र पहलवान, अर्जुन अवार्डी सुभाष पहलवान, राजीव तोमर, अंतरराष्ट्रीय कबड्डी प्लेयर नितिन तोमर, अंतरराष्ट्रीय पहलवान संदीप तोमर के अलावा यश भारती, भारत केसरी व लक्ष्मीबाई अवार्डी महिला मल्ला अंशु तोमर के नाम से मलकपुर गांव की पहचान है।