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संगठित होकर देश की दिशा तय करें ब्राह्मण : डॉ. दिनेश
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
Updated Mon, 24 Oct 2016 01:59 AM IST
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जिमखाना मैदान में डा. दिनेश शर्मा और अन्य लोगों का सम्मान किया गया।
- फोटो : अमर उजाला
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जिमखाना मैदान में आयोजित ब्राह्मण महाकुंभ में संगठित होकर देश के दिशा परिवर्तन को तय करने का आह्वान किया गया। ब्राह्मणों को चाहिए कि वे अपने गौरव को कायम रखने के लिए अपनी संस्कृति से दूर न जाएं। समाज में आईं विकृतियां को दूर करें, जिससे परिवर्तन की दिशा तय हो सके।
यह बातें परशुराम स्वाभिमान सेना के तत्वावधान में आयोजित ब्राह्मण महाकुंभ में बतौर मुख्य अतिथि लखनऊ के मेयर डॉ. दिनेश शर्मा ने कहीं। उन्होंने कहा कि जो मन, विचार और कर्म से शुद्ध है, वही ब्राह्मण है। सच्चे ब्राह्मण के लिए राष्ट्र सर्वोपरि है। उन्होंने दहेज, भ्रष्टाचार आदि से मिलकर लड़ने का आह्वान किया। कहा कि अभाव, प्रभाव और लगाव से कई बार दिशा बदलती है। ब्राह्मण उनके साथ भी गया, जिन्होेंने तिलक-तराजू जैसा विवादित नारा दिया था। लेकिन, फिर फिर सबक भी सिखाया।
डॉ. शर्मा बोले कि लखनऊ रामलीला मैदान पर जय श्रीराम का प्रधानमंत्री ने जयघोष किया तो विरोधी इस पर भी बहस करने लगे। हैरत की बात तो यह है कि कुछ तो केवल जाति विशेष की ही कन्याओं को शादी का अनुदान देते हैं। बयान देते हैं कि राम जन्मभूमि विवाद में यदि 16 की जगह 32 लोगों की जान लेनी होती तो लेते और वही लोग फिर अयोध्या में राम की शरण में जाते हैं। उन्होंने आह्वान किया कि ब्राह्मण भाजपा से जुडे़ं, क्योंकि ब्राह्मण एक जाति नहीं विचारधारा है।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे यतिंद्रानंद गिरि महाराज ने कहा कि जिन्होंने कार सेवकों पर गोलियां बरसाईं, अब वे भी राम की शरण में हैं। राम विलास वेदांती महाराज ने कहा कि और लोगों को जोड़ना होगा। भाजपा ने हमेशा ब्राह्मणों को सम्मान दिया। सांसद शरद त्रिपाठी ने कहा कि जिस प्रधानमंत्री ने महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद के गांव जाकर उसे श्रद्धांजलि दी, उसके प्रति ब्राह्मणों का भी कर्तव्य बनता है। हरियाणा की राज्यमंत्री वंदना शर्मा ने कहा कि पाश्चात्य सभ्यता को हावी मत होने दो। जर्मनी, अमेरिका और इंग्लैंड के विश्वविद्यालय संस्कृत पर काम कर रहे हैं, जबकि यह हमारी भाषा है। इससे खुद भी जुड़ें और बच्चों को भी इसका ज्ञान दें। महिलाएं गांवों में अपने बड़ों से पर्दा करें, इस संस्कृति को बरकरार रखें, पर देश की उन्नति में सहयोग करें। ब्राह्मण ही एकजुट होकर सियासत और समाज की दिशा बदलता आया है और फिर से यही करना होगा।
विशिष्ट अतिथि सुनील भराला ने कहा कि ब्राह्मण एकजुट होकर दिशा तय करने को तैयार है। कार्यक्रम को पूर्व विधायक राजेंद्र शर्मा, सतीश्वर दत्त शर्मा, दीपक शर्मा आदि ने भी संबोधित किया। इस मौके पर पं. कौशलानंद महाराज, सत्यवीर त्यागी, पूर्व विधायक अमित अग्रवाल, महापौर हरिकांत अहलूवालिया, सांसद राजेंद्र अग्रवाल, कार्यक्रम सह आयोजक अजय भराला, कमल दत्त शर्मा, कुलदीप भारद्वाज, विनीत अग्रवाल शारदा, पंडित डीडी शर्मा, राजकुमार कौशिक, संगीता पंडित, आशु शर्मा, साध्वी राधे शर्मा, निलिमानंद जी, सुनील दत्त शर्मा, समय सिंह सैनी, चरण सिंह लिसाड़ी, विजय आनंद, रितु गोयल, मीरा सिंह, राकेश शर्मा, कादंबिनी कौशिक, जय गणेश शर्मा, मनोज शर्मा, राजीव भारद्वाज, धर्मपाल शर्मा, राजेश शर्मा, धर्मवीर कपिल, डॉ. राजीव गुप्ता आदि मौजूद रहे।
सियासी इरादा रहा हावी
कार्यक्रम को लेकर सियासी मंशा साफ दिखाई दी। कई स्थानीय वक्ताओं ने सुनील भराला को विधानसभा का टिकट देने की मांग की। मंच से एक वक्ता ने तो साफ ही कह दिया कि यदि टिकट नहीं दिया तो ठीक नहीं होगा। दोबारा से ब्राह्मण महाकुंभ का आयोजन किया जाएगा। ऐसे में श्रोताओं में बार-बार इसे लेकर असहज स्थिति रही। कहा कि यह चुनावी सभा है या सम्मेलन।
हंगामा विरोध, मंच से उतरे सांसद
कार्र्यक्रम में कई बार हंगामा और विरोध हुआ। कार्यक्रम में आए लोगों ने सवाल किया कि यह भाजपा का कार्यक्रम हैं या ब्राह्मण महाकुंभ। मंच पर भी भाजपाइयों का कब्जा है। कुछ लोग तो नाराज होकर चले गए तो कुछ को मनाकर लाया गया। इसके अलावा कार्यक्रम शुरू होते ही गैर ब्राह्मणों को मंच पर बैठाने का विरोध शुरू हो गया। कुछ लोगों ने हंगामा कर दिया। हंगामा ज्यादा बढ़ा तो सांसद राजेंद्र अग्रवाल मंच से उतरकर चले गए। बाद में किसी तरह से लोगों को शांत किया गया। इससे पूर्व रालोद नेता राजेंद्र शर्मा भी कार्यक्रम को संबोधित करते ही चले गए।
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यह बातें परशुराम स्वाभिमान सेना के तत्वावधान में आयोजित ब्राह्मण महाकुंभ में बतौर मुख्य अतिथि लखनऊ के मेयर डॉ. दिनेश शर्मा ने कहीं। उन्होंने कहा कि जो मन, विचार और कर्म से शुद्ध है, वही ब्राह्मण है। सच्चे ब्राह्मण के लिए राष्ट्र सर्वोपरि है। उन्होंने दहेज, भ्रष्टाचार आदि से मिलकर लड़ने का आह्वान किया। कहा कि अभाव, प्रभाव और लगाव से कई बार दिशा बदलती है। ब्राह्मण उनके साथ भी गया, जिन्होेंने तिलक-तराजू जैसा विवादित नारा दिया था। लेकिन, फिर फिर सबक भी सिखाया।
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डॉ. शर्मा बोले कि लखनऊ रामलीला मैदान पर जय श्रीराम का प्रधानमंत्री ने जयघोष किया तो विरोधी इस पर भी बहस करने लगे। हैरत की बात तो यह है कि कुछ तो केवल जाति विशेष की ही कन्याओं को शादी का अनुदान देते हैं। बयान देते हैं कि राम जन्मभूमि विवाद में यदि 16 की जगह 32 लोगों की जान लेनी होती तो लेते और वही लोग फिर अयोध्या में राम की शरण में जाते हैं। उन्होंने आह्वान किया कि ब्राह्मण भाजपा से जुडे़ं, क्योंकि ब्राह्मण एक जाति नहीं विचारधारा है।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे यतिंद्रानंद गिरि महाराज ने कहा कि जिन्होंने कार सेवकों पर गोलियां बरसाईं, अब वे भी राम की शरण में हैं। राम विलास वेदांती महाराज ने कहा कि और लोगों को जोड़ना होगा। भाजपा ने हमेशा ब्राह्मणों को सम्मान दिया। सांसद शरद त्रिपाठी ने कहा कि जिस प्रधानमंत्री ने महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद के गांव जाकर उसे श्रद्धांजलि दी, उसके प्रति ब्राह्मणों का भी कर्तव्य बनता है। हरियाणा की राज्यमंत्री वंदना शर्मा ने कहा कि पाश्चात्य सभ्यता को हावी मत होने दो। जर्मनी, अमेरिका और इंग्लैंड के विश्वविद्यालय संस्कृत पर काम कर रहे हैं, जबकि यह हमारी भाषा है। इससे खुद भी जुड़ें और बच्चों को भी इसका ज्ञान दें। महिलाएं गांवों में अपने बड़ों से पर्दा करें, इस संस्कृति को बरकरार रखें, पर देश की उन्नति में सहयोग करें। ब्राह्मण ही एकजुट होकर सियासत और समाज की दिशा बदलता आया है और फिर से यही करना होगा।
विशिष्ट अतिथि सुनील भराला ने कहा कि ब्राह्मण एकजुट होकर दिशा तय करने को तैयार है। कार्यक्रम को पूर्व विधायक राजेंद्र शर्मा, सतीश्वर दत्त शर्मा, दीपक शर्मा आदि ने भी संबोधित किया। इस मौके पर पं. कौशलानंद महाराज, सत्यवीर त्यागी, पूर्व विधायक अमित अग्रवाल, महापौर हरिकांत अहलूवालिया, सांसद राजेंद्र अग्रवाल, कार्यक्रम सह आयोजक अजय भराला, कमल दत्त शर्मा, कुलदीप भारद्वाज, विनीत अग्रवाल शारदा, पंडित डीडी शर्मा, राजकुमार कौशिक, संगीता पंडित, आशु शर्मा, साध्वी राधे शर्मा, निलिमानंद जी, सुनील दत्त शर्मा, समय सिंह सैनी, चरण सिंह लिसाड़ी, विजय आनंद, रितु गोयल, मीरा सिंह, राकेश शर्मा, कादंबिनी कौशिक, जय गणेश शर्मा, मनोज शर्मा, राजीव भारद्वाज, धर्मपाल शर्मा, राजेश शर्मा, धर्मवीर कपिल, डॉ. राजीव गुप्ता आदि मौजूद रहे।
सियासी इरादा रहा हावी
कार्यक्रम को लेकर सियासी मंशा साफ दिखाई दी। कई स्थानीय वक्ताओं ने सुनील भराला को विधानसभा का टिकट देने की मांग की। मंच से एक वक्ता ने तो साफ ही कह दिया कि यदि टिकट नहीं दिया तो ठीक नहीं होगा। दोबारा से ब्राह्मण महाकुंभ का आयोजन किया जाएगा। ऐसे में श्रोताओं में बार-बार इसे लेकर असहज स्थिति रही। कहा कि यह चुनावी सभा है या सम्मेलन।
हंगामा विरोध, मंच से उतरे सांसद
कार्र्यक्रम में कई बार हंगामा और विरोध हुआ। कार्यक्रम में आए लोगों ने सवाल किया कि यह भाजपा का कार्यक्रम हैं या ब्राह्मण महाकुंभ। मंच पर भी भाजपाइयों का कब्जा है। कुछ लोग तो नाराज होकर चले गए तो कुछ को मनाकर लाया गया। इसके अलावा कार्यक्रम शुरू होते ही गैर ब्राह्मणों को मंच पर बैठाने का विरोध शुरू हो गया। कुछ लोगों ने हंगामा कर दिया। हंगामा ज्यादा बढ़ा तो सांसद राजेंद्र अग्रवाल मंच से उतरकर चले गए। बाद में किसी तरह से लोगों को शांत किया गया। इससे पूर्व रालोद नेता राजेंद्र शर्मा भी कार्यक्रम को संबोधित करते ही चले गए।