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Meerut News: बीस बरस बाद भी सुलगता विक्टोरिया पार्क अग्निकांड का दर्द

Fri, 10 Apr 2026 03:03 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 10 Apr 2026 03:03 AM IST
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Even Twenty Years Later, the Pain of the Victoria Park Fire Still Smolders
मेरठ। कुछ हादसे वक्त के साथ धुंधले नहीं होते बल्कि हर साल और गहरे जख्म बनकर उभरते हैं। विक्टोरिया पार्क अग्निकांड भी ऐसा ही एक दर्द है, जिसकी चीखें आज भी मेरठ की आबोहवा में महसूस होती हैं। दो दशक बाद भी यह हादसा सिर्फ एक याद नहीं बल्कि एक ऐसा जख्म है जो हर साल फिर से हरा हो जाता है। इंसाफ की अधूरी उम्मीद के साथ।
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विक्टोरिया पार्क में 10 अप्रैल 2006 को अग्निकांड हुआ था। इस भयावह हादसे को बीस वर्ष गुजर चुके हैं लेकिन उस दिन की भयावहता, चीखें और अपनों को खोने का दर्द आज भी लोगों की स्मृतियों में ताजा है। इस त्रासदी में 64 लोगों की जान चली गई थी, जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए थे। कई लोग आज भी उस हादसे के शारीरिक और मानसिक घाव ढो रहे हैं।
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न्याय की अधूरी उम्मीद
मृतकों की आत्मा की शांति के लिए आज मेरठ विक्टोरिया पार्क अग्निकांड आहत कल्याण समिति की ओर से शांति यज्ञ और श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया जा रहा है। समिति के सचिव संजय गुप्ता ने बताया कि पीड़ित परिवार आज भी न्याय की बाट जोह रहे हैं। इतने वर्षों बाद भी न तो उचित मुआवजा मिल पाया और न ही दोषियों को सजा मिल सकी।
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हादसे का भयावह मंजर
उन्होंने बताया कि उस समय विक्टोरिया पार्क में पहली बार एसी पंडाल में प्रदर्शनी लगाई गई थी, जिसमें हजारों लोग प्रतिदिन पहुंच रहे थे लेकिन सुरक्षा इंतजाम बेहद लचर थे। पंडाल में प्रवेश और निकास के लिए सिर्फ एक ही संकरा द्वार था। अचानक शॉर्ट सर्किट से आग भड़क उठी और देखते ही देखते पूरा पंडाल धुएं और लपटों से घिर गया। धुएं और जहरीली गैस के कारण लोग बेहोश होने लगे, वहीं ऊपर से पिघलती प्लास्टिक लोगों के शरीर पर गिर रही थी। भगदड़ मच गई और लोग बाहर निकलने के लिए एक-दूसरे पर गिरते चले गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उस दिन का मंजर इतना भयावह था कि लोगों की रूह तक कांप उठी थी। चारों ओर धुएं का गुबार था और पंडाल के भीतर हर तरफ शव बिखरे पड़े थे।
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