मेरठ। पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड का निजीकरण किए जाने को लेकर बुधवार को प्रदेश भर के सभी जिलों में विरोध सभाएं की गईं। पूर्वांचल और दक्षिणांचल में कर्मचारियों ने हड़ताल कर विरोध जताया। मेरठ में विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के तहत कर्मचारियों ने विरोध सभा की। इस दौरान कर्मचारियों ने प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की।
बिजली के निजीकरण के विरोध में देशभर में लाखों कर्मचारी बुधवार को हड़ताल पर रहे। मेरठ में पूरे दिन कर्मचारियों की ओर से विरोध सभाएं की गईं। नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स के आह्वान पर बिजली के निजीकरण का विरोध किया गया। इस दौरान संविदा कर्मी, जूनियर इंजीनियर और अभियंता पूरे दिन कार्यालयों के बाहर विरोध प्रदर्शन करते रहे। बिजली विभाग के कर्मचारियों के अलावा रेल, बैंक, बीमा, बीएसएनएल, पोस्टल आदि विभागों के कर्मचारियों ने भी विरोध प्रदर्शन कर निजीकरण का विरोध जताया। इस दौरान समिति के निखिल कुमार ने कहा कि विरोध प्रदर्शन के दौरान भारत सरकार से मांग की गई है कि वह इस मामले में हस्तक्षेप कर उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दें कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का फैसला बिजली कर्मचारियों के हित में वापस लिया जाए। केके सारस्वत ने कहा कि अगर प्रदेश सरकार ने यह निर्णय वापस नहीं लिया और निजीकरण का कार्य शुरू किया तो अधिकारियों और कर्मचारियों की ओर से जेल भरो आंदोलन की तैयारी की जाएगी। इसे लेकर मुख्यालय स्तर पर पहले ही तैयारी की जा चुकी है। बुधवार को कर्मचारियों से किए गए प्रदर्शन के दौरान सौरभ कुमार, गुरुदेव सिंह, कपिल देव, जितेंद्र कुमार समेत काफी संख्या में कर्मचारी मौजूद रहे। यहां विरोध प्रदर्शन में मेरठ, मवाना, सरधना आदि क्षेत्रों से भी काफी संख्या में कर्मचारी पहुंचे और विरोध जताया।