फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   election

फलायर::: बदल देते हैं सरकारें...दम रखते हैं चुनावी नारे

Mon, 08 Apr 2024 07:08 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 08 Apr 2024 07:08 PM IST
विज्ञापन
election
बदल देते हैं सरकारें...दम रखते हैं चुनावी नारे
विज्ञापन


- लोकसभा चुनाव में भी सभी पार्टियों का नारों पर ज़ोर

अरीश रिज़वी
मेरठ। जिस तरह एक तस्वीर हज़ार शब्दों पर भारी होती है, वैसे ही छोटे छोटे चुनावी नारे, लंबे भाषणों पर भारी पड़ते हैं। बिना नारों के चुनाव कुछ ऐसे ही लगता है कि जैसे कोई सेना बिना असलहे के युद्ध में उतर गई हो। कई चुनावी नारे विवादित भी रहे हैं, पर लहर पैदा करके अप्रत्याशित नतीजे दिलाने का दम रखते हैं।
इस बार भी लोकसभा चुनाव में राजनीतिक दल चुनावी नारों के सहारे जनता में पैठ बनाने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा के नारे हैं,अब की बार 400 पार। मोदी की गारंटी। फिर से मोदी सरकार। सपा-कांग्रेस गठबंधन का नारा है, होगा पीडीए का नाम, अबकी एकजुट मतदान।
विज्ञापन

आम आदमी पार्टी का का नारा है, जेल का जवाब वोट से।
इससे पहले भी लोकसभा चुनाव हों या विधानसभा, नारों की अपनी अहमियत रही है।
पहले के नारों की बानगी देखिए। समाजवादी पार्टी के नारे रहे हैं, जिसका जलवा कायम है, उसका बाप मुलायम है। जीत की चाभी, डिंपल भाभी। यूपी की मजबूरी है, अखिलेश यादव जरूरी है। वहीं, बसपा के नारे महिलाओं को आकर्षित करने के लिए बनाए गए थे। बेटियों को मुस्कुराने दो, बहन जी को आने दो। इस तरह डर से नहीं हक से वोट दो, बेइमानों को चोट दो।
विज्ञापन
विज्ञापन

हालांकि विधानसभा हो या लोकसभा। पिछले एक दशक से भाजपा के नारे सब पर भारी पड़ रहे हैं। गली-गली में मचा है शोर, जनता चली भाजपा की ओर। जन-जन का संकल्प, परिवर्तन एक विकल्प। जनता ने इन नारों पर रीझकर भाजपा को देश और सूबे में प्रचंड बहुमत भी दिया।
====
उत्तर प्रदेश की राजनीति के कुछ खास पुराने नारे...

भाजपा का नारा (राम मंदिर आंदोलन के वक्त): राम लला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे

बसपा का नारा: चढ़ गुंडों की छाती पर, मुहर लगेगी हाथी पर

सपा का नारा: जिसका जलवा कायम है, उसका नाम मुलायम है
====
पुराने चुनाव जिताऊ नारे

1965: जय जवान, जय किसान (कांग्रेस)

1967: समाजवादियों ने बांधी गांठ, पिछड़े पावै सौ में साठ (सोशलिस्ट पार्टी)

1971: गरीबी हटाओ (कांग्रेस)

1975-1977: सिंहासन खाली करो कि जनता आती है (सोशलिस्ट पार्टी/जनता दल)

1978: एक शेरनी सौ लंगूर, चिकमंगलूर,चिकमंगलूर (कांग्रेस)

1984: जब तक सूरज चांद रहेगा, इंदिरा तेरा नाम रहेगा (कांग्रेस)

1989: राजा नही फकीर है, जनता की तकदीर (कांग्रेस)

1989: सेना खून बहाती है, सरकार कमीशन खाती है (जनता दल/बीजेपी)

पुराने लोकप्रिय नारे

इस दीपक में तेल नहीं, सरकार बनाना खेल नहीं

जली झोपडी़ भागे बैल,यह देखो दीपक का खेल

स्वर्ग से नेहरू रहे पुकार, अबकी बिटिया जहियो हार

इंदिरा लाओ देश बचाओ

आधी रोटी खाएंगे, इंदिरा को लाएंगे

सौगंध राम की खाते हैं, मंदिर वहीं बनाएंगे

जिसने कभी न झुकना सीखा, उसका नाम मुलायम है

अबकी बारी अटल बिहारी
=====
ये नारे भी खूब चले...
भाजपा
सोच ईमानदार, काम दमदार, फिर एक बार भाजपा सरकार

सौ में साठ हमारा है, चालीस में बंटवारा है, उसमें भी हमारा है

सपा
यूपी का ये जनादेश, आ रहे हैं अखिलेश

युवा बेरोजगारों का इंकलाब होगा, बाइस में बदलाव होगा

बसपा
भाईचारा बढ़ाना है बसपा को लाना है

सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय

कांग्रेस
हाथ को मिलेगा सबका साथ

लड़की हूं, लड़ सकती हूं
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed