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Election : यूपी की इस लोकसभा पर नजर आया ध्रुवीकरण, अन्य सात सीटों के वोटरों ने भी चौंकाया, पढ़ें खास रिपोर्ट

Sat, 20 Apr 2024 11:42 AM IST
कपिल kapil सैयद यासिर रजा, अमर उजाला, मेरठ
सैयद यासिर रजा, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Sat, 20 Apr 2024 11:42 AM IST
सार

Election 2024 : उत्तर प्रदेश की इस लोकसभा सीट पर ध्रुवीकरण नजर आया है। वहीं, पश्चिमी यूपी की इन सातों सीटों पर भी मतदाताओं ने चौंका दिया है। अमर उजाला की विशेष रिपोर्ट पढ़िए-

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Election 2024 : Amar Ujala special report on eight Lok Sabha seats of Uttar Pradesh
मुजफ्फरनगर में मतदान। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पश्चिमी उत्तर प्रदेश से शुरू हुए पहले चरण के चुनाव में मतदाताओं का उत्साह पिछले दो चुनाव के मुकाबले काफी कम दिखाई दिया। सहारनपुर की सीट छोड़ दें तो किसी भी सीट पर ध्रुवीकरण नजर नहीं आया। यहां तक कि मुजफ्फरनगर और कैराना जिसे 2014 में ध्रुवीकरण का केंद्र माना गया था वहां मतदाता जातियों में बंटे नजर आए। 2014 के चुनाव में कैराना से उठे पलायन के मुद्दे और मुजफ्फरनगर क दंगे के मुद्दे ने मतदाताओं को दो भागों में बांट दिया था। 2019 के चुनाव में जब अजित सिंह समाजवादी पार्टी के साथ आए तो इसका असर कुछ हद तक कम जरूर हुआ था, लेकिन पूरी तरह से खत्म नहीं हुआ था। 

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इस चुनाव में ध्रुवीकरण की हवा महसूस नहीं की गई। इसके पीछे एक बड़ा कारण भाजपा में हुए टिकट वितरण को माना जा रहा है, जिसका असर यह हुआ कि भाजपा के जो मतदाता थे वह या तो बिखरे नजर आए या फिर मतदान के प्रति उदासीन दिखे। इसके उलट मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में लंबी-लंबी कतारों में मतदाता नजर आ रहे थे। कई क्षेत्रों में बहुजन समाज पार्टी भी अच्छी लड़ाई में नजर आ रही थी। सैयद यासिर रज़ा की रिपोर्ट...

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कैसे 2009 के पैटर्न पर नजर आया चुनाव
पहले चरण में जिन आठ सीटों पर चुनाव हुआ है उसमें सहारनपुर, कैराना, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, मुरादाबाद, रामपुर और पीलीभीत की सीट शामिल रहीं। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार इन सीटों पर मतदान का औसत प्रतिशत 61 रहा। जबकि 2009 के चुनाव में इन्हीं सीटों औसत मतदान 56.77 प्रतिशत हुआ था। 

2009 में कांग्रेस और राष्ट्रीय लोकदल का गठबंधन था। सपा, बसपा और भाजपा अलग-अलग चुनाव लड़े थे। उस समय बसपा ने तीन, सपा ने दो, रालोद, कांग्रेस और भाजपा को एक-एक सीट मिली थी। खास बात यह थी कि पीलीभीत छोड़ कर किसी भी सीट पर हार जीत का अंतर एक लाख से कम था। 

वहीं, पीलीभीत में वरुण गांधी ने दो लाख 81 हजार से अधिक मतों से जीत हासिल की थी। 2014 और 2019 में मतदाताओं में जबर्दस्त उत्साह दिखा था। इन दोनों चुनावों में औसत मतदान 66 प्रतिशत से अधिक रहा था। 

आठ प्रतिशत कम हुआ मतदान मुजफ्फरनगर में 2019 के मुकाबले 
2019 के मुकाबले इस बार जिन सीटों पर शुक्रवार को चुनाव संपन्न हुआ उसमें तीन से नौ प्रतिशत वोटिंग कम हुई। मसलन नगीना में 2019 में 63 प्रतिशत मतदान हुआ था, इस बार 59.54 प्रतिशत रहा। पीलीभीत में करीब चार प्रतिशत कम मतदान हुआ। पिछले चुनाव में 67 प्रतिशत और इस चुनाव में 63.70 प्रतिशत रहा। मुजफ्फरनगर में पिछले चुनाव के मुकाबले आठ प्रतिशत कम लोगों ने मतदान किया। वहीं, रामपुर में नौ प्रतिशत कम मतदान हुआ। मुरादाबाद में यह अंतर पांच प्रतिशत, सहारनपुर में दो प्रतिशत देखने को मिला। बिजनौर में इस बार 58.21 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि 2019 में 66.22 रहा था।

- एक दूसरे से ज्यादा सीट लाने की होड़
एक तरफ भाजपा जहां 400 पार के नारे के साथ मैदान में है और यूपी की सभी 80 सीटों को जीतने का दावा कर रही है। वहीं, बसपा और सपा के बीच एक-दूसरे से अधिक सीट लाने की होड़ है। दरअसल, 2019 के चुनाव में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी गठबंधन के साथ चुनाव लड़ रही थीं। रालोद भी उनके साथ थी। नतीजा आया तो सपा को पांच और बसपा को 10 सीटें मिलीं। रालोद की झोली खाली रही थी। इस बार दोनों ही दल अलग-अलग चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में दोनों की कोशिश एक दूसरे से अधिक सीट हासिल करने की है। शुक्रवार को जिन आठ सीटों पर चुनाव हुआ है उनमें तीन सीटों सहारनपुर, बिजनौर और नगीना पर बसपा, तीन सीटों कैराना, मुजफ्फरनगर और पीलीभीत पर भाजपा और दो सीटों मुरादाबाद और रामपुर पर समाजवादी पार्टी का कब्जा था। वहीं, 2014 में इन सभी सीटों पर भाजपा ने जीत का परचम लहराया था। देखना दिलचस्प होगा कि 2024 के चुनाव में कौन सी पार्टी अपनी सीट बचा पाती है और कौन सी पार्टी अपनी सीट गंवाती है। 

- जितना अधिक मतदान भाजपा की उतनी बड़ी जीत
2014 के चुनाव में भाजपा ने इन सभी आठ सीटों पर बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी। मुजफ्फरनगर में संजीव बालियान ने 4 लाख एक हजार के अंतर से, पीलीभीत में मेनका गांधी ने 3 लाख सात हजार के अंतर से, कैराना में हुकुम सिंह ने दो लाख 36 हजार वोटों से, बिजनौर में कुंवर भारतेंद्र ने दो लाख पांच हजार से, सहारनपुर, नगीना, मुरादाबाद और रामपुर में हार जीत का अंतर एक  लाख से कम का था।

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- अपने-अपने तरीके से लगा रहे गणित 
2014 और 2019 के मुकाबले कम हुए मतदान ने राजनैतिक दलों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। इस आंकड़े को राजनैतिक दल अपने-अपने पक्ष में देख सकते हैं। चुनाव के समय देश में  कांग्रेस की सरकार थी और 2009 के चुनाव में कांग्रेस दोबारा सत्ता में आ गई। ऐसे में भाजपा के हिमायती कह सकते हैं क्योंकि 2009 में तत्कालीन सरकार की वापसी हुई थी, इसबार भी मतदान का पैटर्न वही रहा है तो भाजपा सरकार वापस आने जा रही है। वहीं विपक्ष इस बात पर खुश हो सकता है कि कम मतदान में उसके प्रत्याशियों की जीत होती रही है। ऐसे में इस चुनाव में हुआ कम मतदान उसके पक्ष में जा सकता है।

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क्षत्रिय समाज के विरोध का कई जगह दिखा असर
पश्चिम यूपी में सबसे पहले राजपूत समाज की संघर्ष समिति की तरफ से महाकुंभ नानौता में सात अप्रैल को हुआ। वहां पर बड़ी संख्या में लोग जुटे थे। उसमें भाजपा पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए नाराजगी जताई गई थी।

पंचायत में आह्वान भी किया गया था कि जो भाजपा को हराएगा उसे वोट दिया जाएगा, लेकिन मतदान के दौरान अलग-अलग ट्रेंड दिखाई दिया। कई जगहों पर राजपूत समाज का वोट प्रतिशत कम रहा, तो कई जगहों पर भाजपा के साथ-साथ दूसरे दलों को भी वोट मिलते दिखाई दिए। दिनभर में नानौता के तीन मतदान केंद्रों पर मात्र 51.81 प्रतिशत मतदान हुआ, जो अन्य स्थानों के मुकाबले काफी कम है। 

मुजफ्फरनगर में लगने वाली सरधाना विधानसभा क्षेत्र के क्षत्रिय बाहुल्य गांवों कम मतदान हुआ। जहां मतदान हुआ वहां सपा और भाजपा के बीच बराबर का बंटवारा हुआ। जबकि मुजफ्फरनगर के गांवों में बंटवारा तो जरूर हुआ लेकिन ज्यादातर वोट भाजपा की झोली में गए।

कैराना में भी राजपूत बाहुल्य गांवों में विरोध का असर साफ देखने को मिला यहां भी अच्छी खासी तादाद में राजपूत वोटरों ने उदासीनता अख्तियार की। बाकी वोटर सपा और भाजपा के बीच बंटते नजर आए।

पिछले तीन चुनाव की 2024 से तुलना
 सीट                   2024            2019          2014    2009

 सहारनपुर            68.94           70.87        74.82    63.24
 मुजफ्फरनगर       60.02           68.42         70.81   54.37
 कैराना                 61.17           67.45        73.64    56.56
 बिजनौर               58.21           66.22        68.01    54.96
 नगीना                 59.54           63.66        60.88    53.79
 मुरादाबाद            60.60          65.45        63.66    54.82
 रामपुर                 54.77          63.17         59.16   52.49
 पीलीभीत             63.70           67.37        60.88    63.95
 
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