मेरठ में कोरोना का हमला तेज, 104 नए मरीज मिले, बुजुर्ग की मौत
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चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के कुलसचिव और राजकीय गर्ल्स डिग्री कॉलेज और मेरठ कॉलेज मेरठ की एसोसिएट प्रोफेसर कोविड-19 पॉजिटिव पाए गए हैं। सोमवार को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में कोरोना के टेस्ट कराए जाएंगे। मरीजों में से 72 मरीज नए केस हैं और बाकी पुरानी मरीजों के संपर्क वाले हैं।
इनमें एक साल के बालक से लेकर बुजुर्ग तक शामिल हैं। घरेलू महिलाएं, स्टूडेंट्स, नौकरीपेशा, शिक्षक, डॉक्टर, हेल्थ केयर वर्कर और कारोबारी आदि शामिल हैं। ये मरीज गंगानगर, बेगम बाग, जागृति विहार, शास्त्री नगर, कसेरू बक्सर, लल्लापुरा, रोहटा रोड, पुरानी तहसील, लाला का बाजार आदि के रहने वाले हैं।
रेलवे स्टेशन और बस अड्डे पर नहीं मिला मरीज
रेलवे स्टेशन पर 139 लोगों के सैंपल लिए गए। वहीं, 47 लोगों की जांच बस अड्डे पर की गई है। इनमें से किसी को कोरोना की पुष्टि नहीं हुई।
अपर जिलाधिकारी राजस्व एवं वित्त सुभाष चंद्र प्रजापति ने रविवार को कोविड-19 संक्रमण रोकने के।लिए समीक्षा की। उन्होंने निर्देशित किया है कि प्रत्येक विद्यालय में कोविड नियमों का पूरी तरह से पालन होना चाहिए। नियमों में शिथिलता बरती गई तो ऐसे लोगों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
कोरोना मरीज मिलने पर बनाया जाएगा कंटेनमेंट जोन
कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या के मद्देनजर मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी ने फिर से दिशा-निर्देश भेजे हैं। कंटेनमेंट जोन बनाए जाने की हिदायत दी गई है। निर्देश हैं कि प्रत्येक कोविड-19 केस को केंद्र मानते हुए 25 मीटर रेडियस के क्षेत्र को और एक से अधिक केस आने पर 50 मीटर के क्षेत्र को कंटेनमेंट जोन बनाया जाए।
वर्तमान में प्रदेश में औसत जनसंख्या घनत्व के अनुसार 25 मीटर रेडियस के क्षेत्र में करीब 20 घर होंगे और 50 मीटर के रेडियस में करीब 60 घर आएंगे (इसमें जनपद और क्षेत्रवारर अंतर संभव है।) कंटेनमेंट जोन का निर्धारण और गतिविधि के लिए कार्ययोजना बनाते समय पल्स पोलियो अभियान की तरह जांच की जाएगी। 14 दिन तक कोई केस न पाए जाने पर कंटेनमेंट जोन खत्म कर दिया जाएगा। हालांकि मेरठ में कैलाशपुरी में 16 मरीज मिलने के बाद कंटेनमेंट जोन बनाया गया था।
समितियों को किया अलर्ट
शहर और गांव स्तर पर पहले से बनी समितियों को अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए गए हैं। जो लोग दूसरे जिलों या प्रदेश से आ रहे हैं, ऐसे लोगों की सूची तैयार करने और जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। सीएमओ ने बताया कि इसका मकसद ज्यादा से ज्यादा लोगों की जांच करना और कोरोना के फैलाव को रोकना है।
मुख्यमंत्री आरोग्य मेले में 1152 लोगों की हुई जांच
मुख्यमंत्री आरोग्य मेला 57 स्वास्थ्य केंद्रों पर लगाया गया। मेले में 1152 लोगों की एंटीजन से जांच की गई। आरोग्य मेले में 2680 मरीजों को उपचार मिला। इनमें 990 पुरुष, 1336 महिलाएं और 354 बच्चे हैं।
इस दौरान 253 लोगों के आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत गोल्डन कार्ड बनाए गए। हेपेटाइटिस बी की जांच 133 लोगों की हुई और हेपेटाइटिस सी की जांच 86 लोगों की। इनमें से किसी को भी हेपेटाइटिस की पुष्टि नहीं हुई है। 48 लोगों को नेत्र की समस्या थी, 96 को लीवर की।
193 लोग सांस की बीमारी से ग्रसित थे, जबकि 269 पेट रोगी थे। 142 टीबी के मरीज थे, 654 त्वचा के रोगी, 28 टीबी के संदिग्ध मरीज थे और 43 खून की कमी के। 130 लोगों को हाइपरटेंशन की शिकायत थी और 27 कुपोषण के शिकार बच्चे थे। बाकी अन्य बीमारियों से ग्रसित थे।
11 मरीजों को सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए रेफर किया गया है। इस मेले के नोडल अधिकारी एसीएमओ डॉ. एसके शर्मा ने बताया कि पिछली सप्ताह होली के कारण मुख्यमंत्री आरोग्य मेला नहीं लगाया गया था। वैसे, हर रविवार को यह मेला लगाया जा रहा है। इसका उद्देश्य ज्यादा से ज्यादा मरीजों को छुट्टी के दिन भी उपचार देना है।