एक साथ जलीं पांच चिताएं, फूट-फूटकर रोए अपने

अमर उजाला ब्यूरों Updated Sun, 09 Oct 2016 02:28 AM IST
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अरोड़ा फैमिली की तीन पीढ़ियों के पांच सदस्यों का शनिवार को सूरजकुंड पर एकसाथ अंतिम संस्कार किया गया। विनीत के ताऊ के लड़के विपिन ने पांचों की चिता को मुखाग्नि दी। एक साथ पांच चिताएं जलती देख वहां मौजूद परिवार, समाज के लोगों और रिश्तेदारों की आंखों से अश्रुधारा बह उठी। महिलाएं फूट-फूट कर रोईं।
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पोस्टमार्टम के बाद करीब ढाई बजे पांचों का शव परिजनों को दिया गया। शवों को एक वाहन से सूरजकुुंड लाया गया। जहां मृतक श्रीमोहन अरोड़ा के दोनों भाई हरिमोहन व उनकी पत्नी, बेटा विपिन व उसकी पत्नी निशा, निशा की बेटी मीनू व नीनू, दूसरे भाई कृष्ण मोहन व उनकी पत्नी और चार बेटियां पहले ही पहुंच चुकी थीं। श्रीमोहन की बहन मिथलेश और सुमन भी मुरादाबाद और नोएडा से पहुंच गई थीं। विनीत की पत्नी पूजा के परिजन और तमाम रिश्तेदार मौजूद थे।
वाहन से उतारकर शवों को एक-एक कर अर्थियों पर रखा गया। विनीत की अंतिम इच्छा के अनुसार उनके ताऊ के बेटे विपिन ने क्रियाएं कीं। शवों को श्मशान घाट के अंदर ले जाकर चिताओं पर रखा और हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार विपिन ने मुखाग्नि दी। परिवार की महिलाएं एक-दूसरे से लिपटकर बिलखने लगीं। अंतिम संस्कार के दौरान अरोड़ा फैमिली के रिश्तेदार, सगे संबंधियों के साथ ही पंजाबी समाज के लल्लू मक्कड़, राम प्रकाश सेठी, बलकीत सिंह, शेखर, सुशील आदि मौजूद रहे।
विनीत तुमने ये क्या किया
अपने चाचा, चाची, चचेरे भाई, भाभी और भतीजे की चिता को मुखाग्नि देते हुए विपिन फूट-फूटकर रो रहे थे। विपिन मेरठ में इनकम टैक्स विभाग में आफिसर हैं। उनके मुंह से बार-बार यही निकल रहा था विनीत तुमने ये क्यों किया। दिक्कत थी तो हमें बताते। हम तो थे।

गंभीरता से जांच करे पुलिस : सांसद
सांसद राजेंद्र अग्रवाल और विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल भी अंतिम संस्कार के दौरान सूरजकुंड स्थित श्मशान घाट पहुंचे। दोनों ने इस घटना पर दुख जताया और अरोड़ा परिवार के रिश्तेदार, सदस्यों को सांत्वना दी। दोनों ने कहा कि ये केस आत्महत्या का बताया जा रहा है, लेकिन लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखकर पुलिस को मामले की गंभीरता से जांच करनी चाहिए। परिवार को भी संतुष्ट करना चाहिए।

पहली बार जलीं एकसाथ परिवार के पांच सदस्यों की चिताएं
श्मशान घाट के आसपास रहने वाले लोगों ने बताया कि इस तरह एकसाथ परिवार के पांच सदस्यों की अर्थियां कभी नहीं देखीं। कुछ कर्मचारियों ने बताया कि दो या तीन सदस्यों की चिता तो पहले भी जल चुकी हैं। श्मशान घाट पर एकसाथ एक ही परिवार की पांच चिताएं जलती पहली बार देखी हैं।
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