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Meerut News: अस्पताल में जल्द शुरू होगी थैलेसीमिया की जांच, मिला बजट

Thu, 23 Nov 2023 11:47 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 23 Nov 2023 11:47 PM IST
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Eight lakh people will be screened for TB, campaign started
-थैलेसीमिया जांच के लिए अभी तक हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं
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-जागरूकता नहीं होने से बढ़ रही थैलेसीमिया के मरीजों की संख्या

-70 बच्चे थैलेसीमिया के सरकारी ब्लड बैंक में पंजीकृत
-43 लाख रुपये थैलेसीमिया स्क्रीनिंग शुरू करने के लिए मिले हैं

अमन कुमार शर्मा
बिजनौर। जिला अस्पताल में ही थैलेसीमिया की जांच हो सकेगी। इसके लिए बजट मिल गया है। जांच के बाद इस गंभीर बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है। अस्पताल प्रशासन की ओर से जांच करने वाली मशीनों की मांग भी भेजी जा रही है।

जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में थैलेसीमिया के 70 बच्चे पंजीकृत हैं, जिन्हें हर महीने एक यूनिट रक्त की जरूरत पड़ती है। थैलेसीमिया के मरीजों की रोकथाम के लिए अब बिजनौर के जिला अस्पताल में भी थैलेसीमिया जांच शुरू करने की तैयारी है। थैलेसीमिया जांच शुरू करने के लिए 43 लाख रुपये का बजट भेजा गया है। जांच के साथ-साथ संक्रमित लोगों की काउंसलिंग भी की जाएगी। चिकित्सक उन्हें बच्चे नहीं करने की सलाह देंगे। क्योंकि उनसे ही उनके बच्चों को बीमारी होगी।
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निजी लैब में करीब चार हजार रुपये में होती है थैलेसीमिया की जांच
थैलेसीमिया की जांच के लिए निजी लैब में करीब चार हजार रुपये तक लिए जाते हैं। सरकारी लैब में यह जांच 300 रुपये तक में हो जाती है। जिला अस्पताल में थैलेसीमिया की जांच शुरू होने से मरीजों को फायदा मिलेगा।
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ऐसे होती है थैलेसीमिया बीमारी
चिकित्सकों का कहना है कि थैलेसीमिया एक आनुवांशिक बीमारी है। बच्चे को यह बीमारी तभी होती है, जब उसके माता-पिता इस बीमारी से ग्रसित हो। यह रोग होने से हीमोग्लोबिन निर्माण प्रकिया गड़बड़ा जाती है। हीमोग्लोबिन में अल्फा और बीटा प्रोटीन का उत्पादन नहीं होता है। इसकी वजह से रक्त बनना बंद होता है। इसलिए समय-समय पर बच्चे को रक्त चढ़ता है। इस बीमारी से ग्रसित बच्चा 15 साल तक जीवित रह सकता है। इलाज कराने के बाद मरीज का जीवन बढ़ जाता है।

केस नंबर एक
बिजनौर के गांव निवासी एक ही परिवार के तीन बच्चे थैलेसीमिया बीमारी से ग्रसित हैं। जागरूक नहीं होने की वजह से तीनों बच्चों को यह बीमारी हुई है। अगर माता-पिता जागरूक होेते तो वह थैलेसीमिया बीमारी से बच्चों को बचा सकते हैं।
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केस नंबर दो
कोतवाली देहात निवासी व्यक्ति का एक बच्चा थैलेसीमिया बीमारी से ग्रसित है। जबकि इससे पहले उसके एक बेटे की इसी बीमारी से मौत हो चुकी है। इसमें जागरूकता का अभाव सामने आया है।



ऐसे कर सकते हैं थैलेसीमिया बीमारी से बचाव
-विवाह से पहले महिला-पुरुष के रक्त की जांच कराएं
-गर्भावस्था के दौरान जांच कराएं
-रोगी का हीमोग्लोबिन 11 या 12 रखने की कोशिश करें
-समय पर दवाई लें औ इलाज कराएं

जिला अस्पताल में जल्द ही थैलेसीमिया जांच शुरू की जाएगी। जांच शुरू करने के लिए शासन स्तर से बजट भी भेज दिया गया है। अब स्टाफ की इसकी ट्रेनिंग दिलाई जाएगी। यह प्रक्रिया शुरू होने पर थैलेसीमिया की जांच में लोगों को काफी मदद मिलेगी।....डॉ. मनोज सेन, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, बिजनौर
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