फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   Effect of not publicity: Meerut people are reducing travel in electric buses

प्रचार न करने का असर: महीने में 68 लाख खर्च, आमदनी 30 लाख, इलेक्ट्रिक बसों में लोग कम कर रहे सफर

Mon, 30 May 2022 12:50 PM IST
Dimple Sirohi अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Mon, 30 May 2022 12:50 PM IST
सार

मेरठ से मोदीपुरम, लखवाया, मोदीनगर, सरधना, हस्तिनापुर और कैली तक चल रही 27 बसों में रोजाना करीब 2500 यात्री सफर कर रहे हैं। इनसे कंपनी को रोजाना करीब एक लाख रुपये की आमदनी हो रही है, लेकिन खर्च दोगुने से ज्यादा हो रहा है।

विज्ञापन
Effect of not publicity: Meerut people are reducing travel in electric buses
ई बस, इलेक्ट्रॉनिक बस - फोटो : amar ujala

विस्तार

शहरी जनता को यातायात का अलग अहसास कराने और पर्यावरण बचाने के लिए इलेक्ट्रिक बसें तो दे दी गईं, लेकिन इसका प्रचार-प्रसार नहीं किया गया। ऑटो व ई-रिक्शा के मुकाबले किराया महंगा रखा है, जिस कारण ज्यादा लोग सफर नहीं कर रहे हैं। नतीजतन, पिछले चार महीने में मेरठ सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड (एमसीटीएसएल) कंपनी का बसों पर जहां करीब 68 लाख रुपये खर्च हो चुका है वहीं कमाई आधी से भी कम करीब 30 लाख रुपये ही हुई है। कई रूटों पर तो भारी घाटा होने के बाद भी बसों को चलाना पड़ रहा है। यही हाल रहा तो संचालन अटकने की भी आशंका जताई जा रही है।

विज्ञापन


प्रदेश के बड़े शहरों का वायु और ध्वनि प्रदूषण कम करने और शहरवासियों को वातानुकूलित सफर कराने के लिए नगर विकास विभाग ने इलेक्ट्रिक बस सेवा मुहैया कराई है। इसमें मेरठ के लिए भी 50 इलेक्ट्रिक बस स्वीकृत की गई है, जिसमें 30 बसें मिल चुकी है। 
विज्ञापन


24 जनवरी से शुरू हुई सेवा के संचालन पर नजर डाले तो चार महीने में इलेक्ट्रिक बसों ने करीब एक लाख किलोमीटर का सफर तय किया है। कंपनी का बिल 67.43 लाख रुपये का बन गया है जबकि 30 लाख रुपये की ही कमाई हुई है।
विज्ञापन
विज्ञापन


यह भी पढ़ें: UP: राज्यसभा में मेरठ के हो जाएंगे तीन सदस्य, पांच साल बाद राजनीति की मुख्यधारा में वापसी करेंगे लक्ष्मीकांत वाजपेयी

रोजाना करीब 2500 लोग कर रहे यात्रा 
मेरठ से मोदीपुरम, लखवाया, मोदीनगर, सरधना, हस्तिनापुर और कैली तक चल रही 27 बसों में रोजाना करीब 2500 यात्री सफर कर रहे हैं। इनसे कंपनी को रोजाना करीब एक लाख रुपये की आमदनी हो रही है, लेकिन खर्च दोगुने से ज्यादा हो रहा है।

140 किलोमीटर चल रही एक चार्जिंग में
बस कंपनी ने एक चार्जिंग के बाद बसों के 230 किलोमीटर तक चलने का दावा किया था। लेकिन बसें 140 किलोमीटर तक ही चल पा रही है। मेरठ से हस्तिनापुर रूट पर बस का आना-जाना करीब 100 किलोमीटर पड़ता है। बैटरी डाउन होने पर बस कहीं रास्ते में न खड़ी हो जाए, इसलिए दोबारा चार्ज करके ही भेजना पड़ रहा है। इसके चलते इस रूट पर बस केवल दो चक्कर ही लगा पा रही हैं।

ये है किराया
-इलेक्ट्रिक बसों का किराया- 10 रुपये लेकर 50 रुपये
-ऑटो-ई-रिक्शा का किराया- पांच रुपये से लेकर 40 रुपये
-अनुबंध अनुसार बसों को कम से कम 200 किलोमीटर चलाना अनिवार्य
-अनुबंध के अनुसार इलेक्ट्रिक बसों को रूट पर रोजाना करीब 200 किलोमीटर चलाया जाना अनिवार्य है। बस में यात्री बैठे या न बैठे सेवा प्रदाता कंपनी को 67.43 रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से 200 किलोमीटर का 13486 रुपये भुगतान होना है। हालांकि वर्तमान में बसें 180 से 200 किलोमीटर चल रही हैं।

ज्यादा हो रहा है खर्चा
अनुबंध अनुसार पीएमआई सॉल्यूशन कंपनी को इलेक्ट्रिक बस और चालक मुुहैया कराने है। इसके साथ ही मेंटीनेंस भी करनी है। फिलहाल बसों के संचालन पर कमाई से ज्यादा खर्चा हो रहा है। हालांकि जैसे-जैसे यात्री बढ़ेंगे तो कमाई बढ़ेगी और खर्च का अंतर भी कम हो जाएगा। - केके शर्मा, एमडी, एमसीटीएसएल मेरठ

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed