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ईडी की कार्रवाई से हड़कंप: नोएडा, मेरठ और चंडीगढ़ तक जुड़ रही कड़ी, पूर्व IAS मोहिंदर से ये है कनेक्शन

Fri, 20 Sep 2024 10:24 AM IST
डिंपल सिरोही न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: डिंपल सिरोही Updated Fri, 20 Sep 2024 10:24 AM IST
सार

मेरठ में शारदा ग्रुप के ठिकानों पर ईडी की कार्रवाई के बाद चंडीगढ़ तक तार हिल गए हैं। सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी मोहिंदर सिंह की मुश्किलें बढ़ गई हैं। मोहिंदर सिंह पर साल 2007 से 2011 के बीच बसपा सरकार के कार्यकाल में लखनऊ में 1400 करोड़ के घोटालों और नोएडा में निजी बिल्डर को 330 फ्लैट बनवाने में फायदा पहुंचाने का आरोप है।

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आदित्य गुप्ता दाएं, मोहिंदर सिंह ऊपर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई के बाद हैसिंडा प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड के गबन की परतें खुलने लगी हैं। नोएडा से होते हुए मेरठ और चंडीगढ़ तक कड़ी जुड़ रही हैं। प्रमोटरों को बिना किसी राशि के निवेश के जमीन आवंटित कर दी गई। 

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घर खरीदारों से 636 करोड़ रुपये एकत्र किए गए। इसमें से लगभग 190 करोड़ रुपये का गबन किया। इस प्रोजेक्ट से जुड़े मेरठ के साकेत निवासी शारदा ग्रुप के आदित्य व आशीष गुप्ता से जुड़ी एक कंपनी ने एक महीने पहले मेरठ में 91 करोड़ की जमीन खरीदी है। जहां पर ग्रुप हाउसिंग बनाने की तैयारी है। माना यह जा रहा है कि यह सौदा भी जांच के दायरे में आ सकता है। 

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शारदा ग्रुप की फैक्टरी - फोटो : अमर उजाला

नोएडा में हैसिंडा प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के लोटस 300 प्रोजेक्ट में 330 फ्लैट बनाने के लिए निवेशकों से 636 करोड़ रुपये जुटाए गए थे। आरोप है कि कंपनी ने लोगों को फ्लैट देने के बजाय प्रोजेक्ट की सात एकड़ भूमि अन्य बिल्डर को विक्रय कर दी थी। इसके बाद निवेशकों ने दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा में शारदा ग्रुप के खिलाफ केस कराए थे। मामला कोर्ट पहुंचा जहां से ईडी को जांच के आदेश हुए। शारदा ग्रुप के मालिकों के मेरठ साकेत स्थित बंगला-192ए पर मंगलवार को ईडी ने इसी कड़ी में कार्रवाई की थी। 

रिठानी में उनके दफ्तर और गगोल रोड की फैक्टरी में भी जांच की। जिसमें पांच करोड़ रुपये के हीरे भी मिले। बताया गया है कि मेरठ के पूर्व कमिश्नर मोहिंदर सिंह की भूमिका जांच चल रही है, जोकि नोएडा के चेयरमैन और सीईओ भी रह चुके है। मेरठ में कमिश्नर रहने के दौरान गुप्ता बंधु से गठजोड़ होना बताया गया।

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बड़े ग्रुप हाउसिंग से भी जुड़े हैं तार 
ईडी ने गुप्ता बंधु का रिकाॅर्ड खंगाला, जिसमें पिछले महीने 91 करोड़ रुपये में मेरठ में जमीन खरीदने की बात सामने आई है। जिस कंपनी ने जमीन खरीदी है वह इसी परिवार से जुड़ी बताई जा रही है। जमीन पर ग्रुप हाउसिंग को विकसित करने की तैयारी है। शहर की विभिन्न सुविधाओं से युक्त कॉलोनी बसाने का भी दावा किया जा रहा था। इसके अलावा दिल्ली-देहरादून हाईवे पर कई साै बीघा जमीन खरीद का भी एक मामला सामने आया है। 
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ईडी की टीम मेरठ में - फोटो : अमर उजाला
बसपा सरकार में मोहिंदर सिंह की बोलती थी तूती
मोहिंदर की बसपा सरकार में तूती बोलती थी। वर्ष 2007 से लेकर 2012 तक उन्होंने नोएडा में सीईओ, चेयरमैन और चीफ सीईओ के पद पर कई फैसले लिए। किसी भी फैसले पर शासन की ओर से कोई आपत्ति नहीं होती थी। यही वजह है कि बिल्डरों से 10 प्रतिशत राशि लेकर रेवड़ी की तरह जमीन बांटी गई, जो अब करीब 28 हजार करोड़ के बकाये तक पहुंच चुकी है। पुराना घाव अब तक नहीं भरा है। यही वजह है कि नोएडा में उनकी तैनाती के कई मामलों में जांच अभी भी चल रही है।

वहीं, आम्रपाली समूह का साथ देने पर मोहिंदर सिंह पर सवाल उठे थे। इस मामले में उन्हें एजेंसियों के जांच के नोटिस भी भेजे गए थे। इस मामले में कई अन्य अधिकारी भी रडार पर रहे। इसमें बताया गया था कि आम्रपाली को नियमों से इतर जमीन दी गई। वहीं, ट्विन टावर मामले में खरीद योग्य एफएआर दिलाने के मामले में भी सवाल उठे। 26 आरोपी अधिकारियों की लिस्ट में मोहिंदर सिंह का नाम है।

84 करोड़ का एमओयू, खर्च हो गए 1400 करोड़
नोएडा में दलित प्रेरणा स्थल के निर्माण के दौरान लोकल फंड ऑडिट की रिपोर्ट में सवाल उठाए गए थे। उस समय नोएडा प्राधिकरण में मोहिंदर थे। रिपोर्ट में बताया गया था कि यूपी निर्माण निगम के साथ प्राधिकरण का 84 करोड़ का एमओयू कराया गया था। इसी फंड से दलित प्रेरणा स्थल का निर्माण होना था, लेकिन इसके निर्माण में जमकर पैसे खर्च किए गए। आलम यह रहा कि इसे बनाने में करीब 1000 से 1400 करोड़ रुपये तक खर्च हुए। यह नियम के इतर किए गए। इसकी जांच अभी भी चल रही है। यह मामला हाईकोर्ट में चल रहा था।

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