Meerut News: ई संजीवनी बना सहारा, 600 से ज्यादा रोज ले रहे परामर्श
मरीज अब घर बैठे ही चिकित्सकों से सलाह ले रहे हैं। प्रदेश में ई संजीवनी एप पहले स्थान पर है। कोरोना के कारण तीन साल पहले ई संजीवनी ओपीडी शुरू की गई थी। इसके जरिये जिला अस्पताल के चिकित्सकों से घर बैठे सलाह लेकर उपचार करा सकते हैं।
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मेरठ मंडल के बुलंदशहर जिले में 116205 ई संजीवनी ओपीडी कर प्रदेश में चौथा स्थान प्राप्त किया है, जबकि बागपत ने 93016 ई संजीवनी ओपीडी कर प्रदेश में 10वां स्थान प्राप्त किया है। इनके अलावा टॉप टेन में प्रयागराज पांचवें, सिद्धार्थनगर छठे, बाराबंकी सातवें, गोरखपुर आठवें और बलरामपुर नवें नंबर पर है। कोरोना के कारण तीन साल पहले ई संजीवनी ओपीडी शुरू की गई थी। इसके जरिये जिला अस्पताल के चिकित्सकों से घर बैठे सलाह लेकर उपचार करा सकते हैं।
वीडियो कॉलिंग के माध्यम से डाक्टर से रूबरू हो सकते हैं या फिर मेसेज के जरिये भी बात कर सकते हैं। जिला अस्पताल के चिकित्सक अधीक्षक डॉ. कौशलेंद्र सिंह ने बताया कि कोविड के बचाव के साथ-साथ जन सामान्य को घर पर ही चिकित्सा उपलब्ध करवाने में चिकित्सकों और स्टाफ का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यह निशुल्क सेवा है। इसके तहत हर रोज चार अलग-अलग डॉक्टर रहते हैं, जो सुबह 9 से दोपहर दो बजे तक ऑनलाइन सेवा के लिए उपलब्ध रहते हैं। ई-संजीवनी कक्ष में चार कंप्यूटर लगे हैं, जिसे इंटरनेट से जोड़ा गया है।
घर बैठे ऐसे ले सकते हैं परामर्श
गूगल प्ले स्टोर पर जाकर ई संजीवनी एप इंस्टॉल करें या गूगल क्रॉम ब्राउजर द्वारा डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यूडॉट ई-संजीवनी ओपीडी डॉट इन पर जाएं। एप या वेबसाइट पर जाकर पेशेंट रजिस्ट्रेशन बटन पर क्लिक करें। अपना राज्य चुनें, जनरल ओपीडी के अंतर्गत कोविड ओपीडी का चयन करें, मोबाइल नंबर डालें और सेंड ओटीपी पर क्लिक करें। छह अंकों का ओटीपी दर्ज कर अपना मोबाइल नंबर सत्यापित करें।
पंजीकरण के बाद जेनरेट टोकन बटन पर क्लिक करके टोकन बनाएं। टोकन नंबर प्राप्त होने की सूचना मिलने पर टोकन नंबर और मोबाइल नंबर की सहायता से पेशेंट लॉगिन बटन पर क्लिककरें। अपनी बारी का इंतजार करें और डॉक्टर से सलाह लें। सबसे अंत में ई प्रिस्क्रिप्शन पर्चे को डाउनलोड करें। अब आसानी से चिकित्सक द्वारा बताए गए निर्देश के अनुसार उपचार करें।
मोबाइल नहीं है तो सीएचओ करेंगे मदद
अगर मरीज के पास एंड्रॉयड मोबाइल है तो ई.संजीवनी ओपीडी एप और पोर्टल के जरिये सलाह ले सकता है, पर जिसके पास मोबाइल नहीं है, वे लोग जिले के हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर कम्यूनिटी हेल्थ आफिसर (सीएचओ) से जाकर मिलें। सीएचओ अपने टैब या मोबाइल से ई-संजीवनी एप के जरिये डॉक्टर से मरीज का संपर्क कराएंगे। जिले में 97 स्थानों पर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर खुले हैं।