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ई-पोर्टल बताएगा कितनी गंभीरता से हो रही ऑनलाइन पढ़ाई
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ई-पोर्टल बताएगा कितनी गंभीरता से हो रही ऑनलाइन पढ़ाई
मेरठ। उच्च शिक्षा में ऑनलाइन पढ़ाई को लेकर जो काम पिछले कई साल में नहीं हो पाया वो 40 दिन के लॉकडाउन में होने जा रहा है। लॉकडान में किस शिक्षक ने अपने विषय में कुछ नया पढ़ाया। किताब को भाषा को सरल बनाया। कुछ नए इनोवेशन किए या फिर किताबों के फोटो खींचकर ही व्हाट्सएप पर अपलोड कर दिए। किसने कितनी भूमिका निभाई। किसने पूूरा दायित्व निभाया। इसकी पोल अब ई-कंटेंट्स पोर्टल से खुलेगी। उच्च शिक्षा विभाग ने सभी विश्वविद्यालयों से कहा है कि कैंपस-कॉलेजों में पढ़ाई गए ई-कंटेट को पार्टल पर उपलब्ध कराएं। साथ ही यह भी सुनिश्चित हो इसमें कोई कॉपी राइट तो कहीं से नहीं किया गया है। इसको लेकर सीसीएसयू विवि में तीन सदस्यीय समिति का गठन कर दिया गया है। जो कॉलेजों से भेजी गई सूची की जांच करेेगी। इससे न सिर्फ उच्च शिक्षा में गुणवत्ता बढ़ेगी बल्कि अच्छे लेक्चरों को पोर्टल पर अपलोड किए जाने से इसका फायदा प्रदेश के सभी छात्र-छात्राओं को मिलेेगा।
लॉकडाउन की वजह से सारे विश्वविद्यालय-कॉलेज 40 दिन से बंद हैं। परीक्षाएं स्थगित की जा चुकी हैं। ऐसे में मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने देश के सभी विश्वविद्यालयों-कॉलेजों को निर्देश दिए थे कि जिन विवि-कॉलेजों में कोर्स अधूरा है वहां पर ऑनलाइन कक्षाएं चलाकर उसे पूरा कराया जाए। सीसीएसयू की बात करें तो यहां पर दो तरह से कोर्स संचालित हैं। बीए, बीएससी-बीकॉम में वार्षिक प्रणाली के तहत एक साल में परीक्षाएं होती हैं। कैंपस के कोर्सों और कॉलेजों में एलएलबी-एलएलएम, एमए, एमससी एवं एमकॉम रेग्युलर में वर्ष में दो बार सेमेस्टर वाइज परीक्षाएं होती हैं। इनमें छात्र-छात्राओं की बात करें तो वार्षिक प्रणाली के कोर्सों में तीन लाख 70 हजार के करीब छात्र-छात्राएं हैं। इन सबका कोर्स पहले ही पूरा हो चुका है। इनकी परीक्षाएं 22 फरवरी से शुरू हो चुकी हैं। ये परीक्षाएं 27 अप्रैल को खत्म होनी थी, लेकिन कोरोना वायरस के चलते 18 मार्च से सारी परीक्षाएं स्थगित कर दी गईं। अब इन परीक्षाओं पर 18 मई के बाद ही निर्णय होगा। ऐसे में इन छात्रों को पढ़ाई करानी ही नहीं पड़ी।
विवि-कॉलेजों में हैं वार्षिक और सेमेस्टर के कोर्स
सीसीएसयू कैंपस और तमाम कॉलेजों में जितने भी सेल्फ फाइनेंस के दूसरे कोर्स हैं, उनमें छात्र-छात्राओं की संख्या डेढ़ लाख के करीब है। सीसीएसयू के राजकीय-एडेड के 68 कॉलेजों की बात करें तो इनमें एलएलबी, एलएलएम, एमए, एमएससी-एमकॉम के छात्रों की संख्या अधिक नहीं हैं। इन विषयों के छात्रों की परीक्षाएं मई में प्रस्तावित थी, लेकिन अब इनकी परीक्षाएं वार्षिक प्रणाली के बचे 93 पेपरों के बाद ही होंगी। इन्हीं छात्र-छात्राओं को ऑनलाइन पढ़ाकर कोर्स पूरा कराया जाना था।
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कुलपति ने दिए थे ई-कंटेंट वेबसाइट पर अपलोड करने के निर्देश
सीसीएसयू के कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने लॉकडाउन से पहले ही सभी कॉलेजों को स्पष्ट कर दिया था कि कॉलेजों के शिक्षक जो कक्षाओं में पढ़ाते हैं, उनकी गुणवत्ता के हिसाब से उस लेक्चर के ई-कंटेंट को कॉलेज की वेबसाइट पर अपलोड करा दें। ताकि जितना ई-कंटेंट छात्रों को कॉलेजों की वेबसाइट पर मिले उससे वह आराम से पढ़ाई कर सकें। इसका एक फायदा यह भी होना है कि एक ही कोर्स सारे कॉलेजों में होने की वजह से छात्र किसी भी कॉलेज की वेबसाइट पर जाकर अपने चेहेते शिक्षक के लेक्चर देख लेते। कुछ कॉलेजों ने तो वेबसाइट पर लेक्चर अपडेट कराए, लेकिन कुछ ने खानापूर्ति कर दी। कुछ का कहना है कि वे व्हाट्सएप ग्रुप पर पढ़ा रहे हैं। अब उच्च शिक्षा विभाग ई-कंटेंट का पोर्टल बना रहा है। ऐसे में सभी विवि से यह मांगा गया है कि जो ई-कंटेंट वेबसाइट पर अपलोड किया गया वह कितना गुणवत्तापरक है।
तीन सदस्यीय समिति करेगी कंटेंट की जांच
रजिस्ट्रार धीरेंद्र कुमार वर्मा ने बताया कि किस शिक्षक ने क्या ई-कंटेंट तैयार किया। इसको लेकर ई-कंटेंट पीडीएफ, वीडियो, ऑडियो, पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन आदि जिस माध्यम से पढ़ाई कराई गई, उसको लेकर एक तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है। इस कंटेंट की उपयोगिता की जांच के बाद उन सूची को उच्च शिक्षा विभाग को भेजा जाएगा। समिति में प्रति कुलपति प्रो. वाई विमला, प्रो. बीरपाल सिंह विभागाध्यक्ष फिजिक्स विभाग सीसीएसयू कैंपस एवं कैंपस के उप पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. जमाल अहमद सिद्दीकी शामिल हैं। प्रो. बीरपाल सिंह ने बताया कि जो सूची भेजी जाए उसमें कॉपीराइट का उल्लंघन न हो, एवं बौधिक संपदा अधिकार यानी इंटेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट का ध्यान रखा जाए।
किताबों की टीप नहीं, अलग क्या किया
इसमें वो लेक्चर शामिल नहीं होंगे जिनको किताबों से कॉपी किया गया है। कुछ शिक्षकों ने ऑनलाइन पढ़ाई के नाम पर किताबों के लेक्चर ही व्हाट्सएप और ईमेल पर भेज दिए। छात्रों का कहना है कि किताबों से ही पढ़ना है तो फिर कॉलेजों की जरूरत क्या है। ऐसे में किताब के अलावा लेक्चर में शिक्षक ने क्या बदलाव किया। भाषा पर काम किया या पढ़ाने का तरीका बदला। अपना कोई इनोवेशन किया। ये सब जिसने किया है, उसको पोर्टल पर तरजीह दी जाएगी।
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मेरठ। उच्च शिक्षा में ऑनलाइन पढ़ाई को लेकर जो काम पिछले कई साल में नहीं हो पाया वो 40 दिन के लॉकडाउन में होने जा रहा है। लॉकडान में किस शिक्षक ने अपने विषय में कुछ नया पढ़ाया। किताब को भाषा को सरल बनाया। कुछ नए इनोवेशन किए या फिर किताबों के फोटो खींचकर ही व्हाट्सएप पर अपलोड कर दिए। किसने कितनी भूमिका निभाई। किसने पूूरा दायित्व निभाया। इसकी पोल अब ई-कंटेंट्स पोर्टल से खुलेगी। उच्च शिक्षा विभाग ने सभी विश्वविद्यालयों से कहा है कि कैंपस-कॉलेजों में पढ़ाई गए ई-कंटेट को पार्टल पर उपलब्ध कराएं। साथ ही यह भी सुनिश्चित हो इसमें कोई कॉपी राइट तो कहीं से नहीं किया गया है। इसको लेकर सीसीएसयू विवि में तीन सदस्यीय समिति का गठन कर दिया गया है। जो कॉलेजों से भेजी गई सूची की जांच करेेगी। इससे न सिर्फ उच्च शिक्षा में गुणवत्ता बढ़ेगी बल्कि अच्छे लेक्चरों को पोर्टल पर अपलोड किए जाने से इसका फायदा प्रदेश के सभी छात्र-छात्राओं को मिलेेगा।
लॉकडाउन की वजह से सारे विश्वविद्यालय-कॉलेज 40 दिन से बंद हैं। परीक्षाएं स्थगित की जा चुकी हैं। ऐसे में मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने देश के सभी विश्वविद्यालयों-कॉलेजों को निर्देश दिए थे कि जिन विवि-कॉलेजों में कोर्स अधूरा है वहां पर ऑनलाइन कक्षाएं चलाकर उसे पूरा कराया जाए। सीसीएसयू की बात करें तो यहां पर दो तरह से कोर्स संचालित हैं। बीए, बीएससी-बीकॉम में वार्षिक प्रणाली के तहत एक साल में परीक्षाएं होती हैं। कैंपस के कोर्सों और कॉलेजों में एलएलबी-एलएलएम, एमए, एमससी एवं एमकॉम रेग्युलर में वर्ष में दो बार सेमेस्टर वाइज परीक्षाएं होती हैं। इनमें छात्र-छात्राओं की बात करें तो वार्षिक प्रणाली के कोर्सों में तीन लाख 70 हजार के करीब छात्र-छात्राएं हैं। इन सबका कोर्स पहले ही पूरा हो चुका है। इनकी परीक्षाएं 22 फरवरी से शुरू हो चुकी हैं। ये परीक्षाएं 27 अप्रैल को खत्म होनी थी, लेकिन कोरोना वायरस के चलते 18 मार्च से सारी परीक्षाएं स्थगित कर दी गईं। अब इन परीक्षाओं पर 18 मई के बाद ही निर्णय होगा। ऐसे में इन छात्रों को पढ़ाई करानी ही नहीं पड़ी।
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विवि-कॉलेजों में हैं वार्षिक और सेमेस्टर के कोर्स
सीसीएसयू कैंपस और तमाम कॉलेजों में जितने भी सेल्फ फाइनेंस के दूसरे कोर्स हैं, उनमें छात्र-छात्राओं की संख्या डेढ़ लाख के करीब है। सीसीएसयू के राजकीय-एडेड के 68 कॉलेजों की बात करें तो इनमें एलएलबी, एलएलएम, एमए, एमएससी-एमकॉम के छात्रों की संख्या अधिक नहीं हैं। इन विषयों के छात्रों की परीक्षाएं मई में प्रस्तावित थी, लेकिन अब इनकी परीक्षाएं वार्षिक प्रणाली के बचे 93 पेपरों के बाद ही होंगी। इन्हीं छात्र-छात्राओं को ऑनलाइन पढ़ाकर कोर्स पूरा कराया जाना था।
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कुलपति ने दिए थे ई-कंटेंट वेबसाइट पर अपलोड करने के निर्देश
सीसीएसयू के कुलपति प्रो. एनके तनेजा ने लॉकडाउन से पहले ही सभी कॉलेजों को स्पष्ट कर दिया था कि कॉलेजों के शिक्षक जो कक्षाओं में पढ़ाते हैं, उनकी गुणवत्ता के हिसाब से उस लेक्चर के ई-कंटेंट को कॉलेज की वेबसाइट पर अपलोड करा दें। ताकि जितना ई-कंटेंट छात्रों को कॉलेजों की वेबसाइट पर मिले उससे वह आराम से पढ़ाई कर सकें। इसका एक फायदा यह भी होना है कि एक ही कोर्स सारे कॉलेजों में होने की वजह से छात्र किसी भी कॉलेज की वेबसाइट पर जाकर अपने चेहेते शिक्षक के लेक्चर देख लेते। कुछ कॉलेजों ने तो वेबसाइट पर लेक्चर अपडेट कराए, लेकिन कुछ ने खानापूर्ति कर दी। कुछ का कहना है कि वे व्हाट्सएप ग्रुप पर पढ़ा रहे हैं। अब उच्च शिक्षा विभाग ई-कंटेंट का पोर्टल बना रहा है। ऐसे में सभी विवि से यह मांगा गया है कि जो ई-कंटेंट वेबसाइट पर अपलोड किया गया वह कितना गुणवत्तापरक है।
तीन सदस्यीय समिति करेगी कंटेंट की जांच
रजिस्ट्रार धीरेंद्र कुमार वर्मा ने बताया कि किस शिक्षक ने क्या ई-कंटेंट तैयार किया। इसको लेकर ई-कंटेंट पीडीएफ, वीडियो, ऑडियो, पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन आदि जिस माध्यम से पढ़ाई कराई गई, उसको लेकर एक तीन सदस्यीय समिति गठित की गई है। इस कंटेंट की उपयोगिता की जांच के बाद उन सूची को उच्च शिक्षा विभाग को भेजा जाएगा। समिति में प्रति कुलपति प्रो. वाई विमला, प्रो. बीरपाल सिंह विभागाध्यक्ष फिजिक्स विभाग सीसीएसयू कैंपस एवं कैंपस के उप पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ. जमाल अहमद सिद्दीकी शामिल हैं। प्रो. बीरपाल सिंह ने बताया कि जो सूची भेजी जाए उसमें कॉपीराइट का उल्लंघन न हो, एवं बौधिक संपदा अधिकार यानी इंटेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट का ध्यान रखा जाए।
किताबों की टीप नहीं, अलग क्या किया
इसमें वो लेक्चर शामिल नहीं होंगे जिनको किताबों से कॉपी किया गया है। कुछ शिक्षकों ने ऑनलाइन पढ़ाई के नाम पर किताबों के लेक्चर ही व्हाट्सएप और ईमेल पर भेज दिए। छात्रों का कहना है कि किताबों से ही पढ़ना है तो फिर कॉलेजों की जरूरत क्या है। ऐसे में किताब के अलावा लेक्चर में शिक्षक ने क्या बदलाव किया। भाषा पर काम किया या पढ़ाने का तरीका बदला। अपना कोई इनोवेशन किया। ये सब जिसने किया है, उसको पोर्टल पर तरजीह दी जाएगी।