खराब प्लानिंग से ठिठक गई दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे की राह
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दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस वे की राह खराब प्लानिंग की वजह से ठिठक गई है। योजनाकारों ने डासना से निकलते ही सघन आबादी के बीच से एक्सप्रेस वे का एलाइनमेंट बना दिया, जिसे लेकर हंगामा हो रहा है। लोग मकान तोड़ने का विरोध कर रहे हैं। कुछ लोग कह रहे हैं कि यदि जमीन दें तो मकान बनाने का पैसा कौन देगा।
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे का काम जमीन अधिग्रहण में देरी, धार्मिक प्रतिष्ठानों को हटाने में रुकावट और अन्य तकनीकी कारणों के बीच लेट हुआ। लेकिन अब इसमें तेजी आई है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) ने भी नए सिरे से प्रोजेक्ट पूरा करने की समय सीमा तय की है। अब यह प्रोजेक्ट मई, 2019 तक पूरा करने की मशक्कत है। हालांकि पहले दिसंबर 2018 तक इसे पूरा होना था। हालांकि डासना से हापुड़ तक एक्सप्रेस-वे का काम दिसंबर 2018 तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद जनवरी, 2019 से एक्सप्रेस वे पर वाहन दौड़ने लगेंगे।
94 किमी का है पूरा प्रोजेक्ट
दिल्ली सराय काले खां से मेरठ तक करीब 94 किमी के एक्सप्रेस-वे का निर्माण किया जा रहा है। पूरे प्रोजेक्ट को चार पैकेज में बांटकर टेंडर जारी किए गए हैं, जिनमें से हापुड़ तक के तीन पैकेजों को निर्माण कार्य चल रहा है। डासना से मेरठ तक के करीब 31 किमी पैकेज पर काम हिस्सों में शुरू किया गया है। सराय काले खां से यूपी गेट तक का 14 लेन हिस्सा पूरा हो चुका है। मेरठ से डासना का हिस्सा कनेक्टिविटी को पूरा करेगा।
प्लानिंग ने कर दी समस्या पैदा
डासना की बाहरी कॉलोनी में आईएमएस कालेज के सामने से लगभग चार सौ मीटर के इस एक्सप्रेस वे का एलाइनमेंट इस तरह बनाया है, जो सघन बस्ती के बीच से निकलेगा। हालांकि अधिकारियों का दावा था कि जब यह एलाइनमेंट बना, तब यहां मकान नहीं थे। बस्ती बनी नहीं थी और इसे बाद में डेवलप किया गया। उधर, लोगों का कहना है कि यहां उनके पुराने मकान हैं।
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...मुआवजा तो कोई और ले गया
एलाइनमेंट बदला गया है, यह बात तय है। कई किसानों को मुआवजा दिया गया है। लेकिन अब उनकी जमीन से एक्सप्रेस वे नहीं निकलेगा। किसान मुआवजा ले चुके हैं। 49-49 लाख रुपये दो बार मुआवजा लेने वाले किसानों का कहना है कि उसकी जमीन का अधिग्रहण हुआ तो उसने मुआवजा ले लिया। अब एलाइनमेंट कहीं ओर से निकाला गया है तो उसका क्या दोष है। उसकी जमीन पड़ी है, वहां से ही ट्रैक निकालो।
मकान और जमीन दोनों का चाहिए मुआवजा
सघन बस्ती क्षेत्र के बाशिंदे यहां से एक्सप्रेस वे निकालने का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि उनके मकान तोड़ने जाएंगे। प्रशासन मुआवजे की बात कह रहा है तो उनका कहना है जो मकान उन्होंने बनाए हैं, उसका पैसा कौन देगा? इसी को लेकर पेंच अटक गया है। कई बार एनएचएआई के अधिकारी मशक्कत कर चुके हैं।
कमेटी करेगी निपटारा
इस मसले पर आयुक्त डा. प्रभात कुमार नजर रखे हैं। इस मसले के निस्तारण को कमेटी का गठन किया गया है जो पूरे मामले का अध्ययन कर रही है। जल्द ही इसका निस्तारण करने को कहा गया है।
क्या है एक्सप्रेस वे की अंतिम समय सीमा
पैकेज कहां से कहां तक दूरी कंपनी निर्माण कार्य पूरा काम की स्थिति
1 सरायं काले खां-यूपी गेट 9 किमी एपको पूरा हो गया पूरा हो गया
2 यूपी गेट- डासना 22 किमी वेलस्पून मई 2019 20 फीसदी
3 डासना - हापुड़ 32 किमी चेतक दिसंबर 2018 50 फीसदी
4 डासना - मेरठ 31 किमी जीआर इंफ्रा मई 2019 हिस्सों में काम शुरू
जल्द दूर होगा विवाद
एक्सप्रेस वे के सारे मामलो को निपटाने की मशक्कत चल रही है। कमेटी को कहा है कि इन सभी प्रकरणों को निपटाए। डासना के विवाद को भी जल्द दूर करने को कहा गया है। -डॉ. प्रभात कुमार, आयुक्त मेरठ मंडल
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