{"_id":"6989d682160444fb8a0990be","slug":"drug-dealers-should-not-be-harassed-gopal-agarwal-meerut-news-c-14-1-mrt1002-1103543-2026-02-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"दवा व्यापारियों का उत्पीड़न न किया जाए : गोपाल अग्रवाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दवा व्यापारियों का उत्पीड़न न किया जाए : गोपाल अग्रवाल
विज्ञापन
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। उत्तर प्रदेश रिटेल केमिस्ट एंड डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल अग्रवाल ने कहा कि खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की ओर से हाल ही में जारी निर्देशों के अनुपालन के नाम पर समस्त लाइसेंसी दवा विक्रेताओं की जांच की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस जांच के नाम पर दवा व्यापारियों का उत्पीड़न न किया जाए।
सोमवार को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन कार्यालय में ज्ञापन देते समय उन्होंने यह बात कही। उन्होंने कहा कि यदि विभाग अपना बहुमूल्य समय और संसाधन लाइसेंसधारी दवा व्यापारियों की कुंडली तैयार करने में नष्ट करेगा तो वास्तविक आपराधिक तत्वों पर फोकस नहीं हो सकेगा। क्राइम कंट्रोल नीति के अनुसार जहां अपराध होता है, वहीं पर फोकस होना चाहिए।
जिला चेयरमैन रविंद्र दुग्गल ने कहा कि प्रदेश में दो लाख लाइसेंसधारी दवा विक्रेता हैं जबकि नशीली, नकली या तस्करी की गतिविधियों में संलिप्त लोग गिनती के और चिन्हित हैं। विभाग को ऐसी जगहों पर जांच करनी चाहिए जहां नकली या नशीली दवाएं बनाई जा रही हैं।
विज्ञापन
अध्यक्ष अमित मोहन शर्मा ने बताया कि अवैध कारोबार करने वालों में अधिकतर लाइसेंसधारी नहीं हैं। इसके बावजूद यदि पूरा विभाग हर दुकान, हर गोदाम और हर व्यापारी की जांच करेगा तो इससे व्यापार प्रभावित होगा और अनावश्यक परेशानी होगी। महामंत्री अरुण शर्मा ने कहा कि पूरी प्रणाली को संदेह में लेना उचित नहीं है। कोषाध्यक्ष राम अवतार गुप्ता ने कहा कि अंधाधुंध चेकिंग के बजाय असली अपराधियों पर ही शिकंजा कसा जाए।
विज्ञापन
मेरठ। उत्तर प्रदेश रिटेल केमिस्ट एंड डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल अग्रवाल ने कहा कि खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की ओर से हाल ही में जारी निर्देशों के अनुपालन के नाम पर समस्त लाइसेंसी दवा विक्रेताओं की जांच की तैयारी की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस जांच के नाम पर दवा व्यापारियों का उत्पीड़न न किया जाए।
सोमवार को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन कार्यालय में ज्ञापन देते समय उन्होंने यह बात कही। उन्होंने कहा कि यदि विभाग अपना बहुमूल्य समय और संसाधन लाइसेंसधारी दवा व्यापारियों की कुंडली तैयार करने में नष्ट करेगा तो वास्तविक आपराधिक तत्वों पर फोकस नहीं हो सकेगा। क्राइम कंट्रोल नीति के अनुसार जहां अपराध होता है, वहीं पर फोकस होना चाहिए।
विज्ञापन
जिला चेयरमैन रविंद्र दुग्गल ने कहा कि प्रदेश में दो लाख लाइसेंसधारी दवा विक्रेता हैं जबकि नशीली, नकली या तस्करी की गतिविधियों में संलिप्त लोग गिनती के और चिन्हित हैं। विभाग को ऐसी जगहों पर जांच करनी चाहिए जहां नकली या नशीली दवाएं बनाई जा रही हैं।
विज्ञापन
अध्यक्ष अमित मोहन शर्मा ने बताया कि अवैध कारोबार करने वालों में अधिकतर लाइसेंसधारी नहीं हैं। इसके बावजूद यदि पूरा विभाग हर दुकान, हर गोदाम और हर व्यापारी की जांच करेगा तो इससे व्यापार प्रभावित होगा और अनावश्यक परेशानी होगी। महामंत्री अरुण शर्मा ने कहा कि पूरी प्रणाली को संदेह में लेना उचित नहीं है। कोषाध्यक्ष राम अवतार गुप्ता ने कहा कि अंधाधुंध चेकिंग के बजाय असली अपराधियों पर ही शिकंजा कसा जाए।