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सूर्यदेव को समर्पित माह में प्यासों को पिलाएं जल
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सूर्यदेव को समर्पित माह में प्यासों को पिलाएं जल
मेरठ। हिन्दू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह वर्ष का तीसरा महीना है। ज्योष्ठ मास में सूर्यदेव अपने रौद्र रूप में रहते हैं जिस कारण प्रचंड गर्मी भी पड़ती है और उत्तर भारत लू की चपेट में रहता है। इंडियन कॉउन्सिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के संयुक्त सचिव आचार्य कौशल वत्स के मुताबिक ज्येष्ठ मास में प्यासे को पानी पिलाने और दान करने का विशेष महत्व होता है। यह मास सूर्यदेव को समर्पित है।
जल संरक्षण पर विशेष जोर
ज्येष्ठ माह में पानी का वाष्पीकरण तेजी से होता है जिसके कारण से नदियां और तालाब सूख जाते हैं। हिन्दू सभ्यता में इस महीने जल के संरक्षण का विशेष जोर दिया जाता है। ज्येष्ठ महीने में गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी जैसे व्रत भी रखे जाते हैं। ये व्रत प्रकृति में जल को बचाने का संदेश देते हैं। गंगा दशहरा में नदियों की पूजा और निर्जला एकादशी में बिना जल का व्रत रखा जाता है।
ज्येष्ठ माह में पड़ने वाले व्रत एवं त्योहार
माह का पहला पर्व जहां नारद जयंती शनिवार 9 मई को है। वहीं इस माह के अंतिम पर्वों में गायंत्री जयंती 2 जून एवं जयेष्ठ पूर्णिमा 5 जून को है। गुरुवार 14 मई को सूर्य अपनी राशि मेष को बदलकर वृष राशि में प्रवेश करेंगे। अपरा एकादशी 18 मई को है। सनातन मान्यता के अनुसार, एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष में प्रदोष व्रत बुधवार 20 मई को है। शनि जयंती 22 मई को है। आचार्य हिमांशु के अनुसार इस दिन शनि देव की विशेष पूजा की जाती है। महाराणा प्रताप जयंती सोमवार 25 मई को मनाई जाएगी। मां विंध्यवासिनी देवी पूजन गुरुवार 28 मई, मां धूमावती जयंती शनिवार 30 मई, महेश नवमी 31 मई को है।
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श्री गंगा दशहरा पर्व
देश भर में सोमवार 1 जून को गंगा दशहरा पर्व हैं। ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष के दसवें दिन गंगा दशहरा का पर्व होता है । निर्जला एकादशी मंगलवार 2 जून को है। आचार्य संजय त्रिपाठी के अनुसार ज्येष्ठ मास में शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को निर्जला एकादशी और भीमसेनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। इस एकादशी व्रत में जल पीना वर्जित माना जाता है।
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मेरठ। हिन्दू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह वर्ष का तीसरा महीना है। ज्योष्ठ मास में सूर्यदेव अपने रौद्र रूप में रहते हैं जिस कारण प्रचंड गर्मी भी पड़ती है और उत्तर भारत लू की चपेट में रहता है। इंडियन कॉउन्सिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के संयुक्त सचिव आचार्य कौशल वत्स के मुताबिक ज्येष्ठ मास में प्यासे को पानी पिलाने और दान करने का विशेष महत्व होता है। यह मास सूर्यदेव को समर्पित है।
जल संरक्षण पर विशेष जोर
ज्येष्ठ माह में पानी का वाष्पीकरण तेजी से होता है जिसके कारण से नदियां और तालाब सूख जाते हैं। हिन्दू सभ्यता में इस महीने जल के संरक्षण का विशेष जोर दिया जाता है। ज्येष्ठ महीने में गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी जैसे व्रत भी रखे जाते हैं। ये व्रत प्रकृति में जल को बचाने का संदेश देते हैं। गंगा दशहरा में नदियों की पूजा और निर्जला एकादशी में बिना जल का व्रत रखा जाता है।
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ज्येष्ठ माह में पड़ने वाले व्रत एवं त्योहार
माह का पहला पर्व जहां नारद जयंती शनिवार 9 मई को है। वहीं इस माह के अंतिम पर्वों में गायंत्री जयंती 2 जून एवं जयेष्ठ पूर्णिमा 5 जून को है। गुरुवार 14 मई को सूर्य अपनी राशि मेष को बदलकर वृष राशि में प्रवेश करेंगे। अपरा एकादशी 18 मई को है। सनातन मान्यता के अनुसार, एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष में प्रदोष व्रत बुधवार 20 मई को है। शनि जयंती 22 मई को है। आचार्य हिमांशु के अनुसार इस दिन शनि देव की विशेष पूजा की जाती है। महाराणा प्रताप जयंती सोमवार 25 मई को मनाई जाएगी। मां विंध्यवासिनी देवी पूजन गुरुवार 28 मई, मां धूमावती जयंती शनिवार 30 मई, महेश नवमी 31 मई को है।
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श्री गंगा दशहरा पर्व
देश भर में सोमवार 1 जून को गंगा दशहरा पर्व हैं। ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष के दसवें दिन गंगा दशहरा का पर्व होता है । निर्जला एकादशी मंगलवार 2 जून को है। आचार्य संजय त्रिपाठी के अनुसार ज्येष्ठ मास में शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को निर्जला एकादशी और भीमसेनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। इस एकादशी व्रत में जल पीना वर्जित माना जाता है।