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कजरी लोक गायन भारतीय संस्कृति की गौरवशाली विरासत
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सुभारती में दस दिवसीय कार्यशाला का हुआ समापन
मेरठ। सुभारती विश्वविद्यालय के भाषा विभाग, कला एवं सामाजिक विज्ञान संकाय के संयुक्त तत्वावधान में दस दिवसीय कजरी लोक गायन एवं नृत्य कार्यशाला का समापन समारोह हुआ। इसमें वक्ताओं ने कजरी लोक गायन भारतीय संस्कृति को भारतीय संस्कृति की गौरवशाली विरासत बताया।
सामाजिक विज्ञान संकाय के डीन प्रो. सुधीर त्यागी ने कार्यशाला के उद्देश्यों और उसकी सांस्कृतिक महत्ता पर प्रकाश डाला। कलाकारों ने कजरी की प्रस्तुति देकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. शल्या राज ने सभी प्रतिभागियों को बधाई दी।
मुख्य अतिथि अतुल द्विवेदी रहे। उन्होंने कजरी को जनभावनाओं की सशक्त अभिव्यक्ति बताते हुए इसके संवर्धन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कजरी भारतीय संस्कृति की गौरवशाली विरासत है। लोक संगीत मन से आता है, इसे बाहरी उपकरण की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कार्यशाला के सभी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया। समारोह में प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित कर सम्मानित किया गया।
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सामाजिक विज्ञान संकाय के डीन प्रो. सुधीर त्यागी ने कार्यशाला के उद्देश्यों और उसकी सांस्कृतिक महत्ता पर प्रकाश डाला। कलाकारों ने कजरी की प्रस्तुति देकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. शल्या राज ने सभी प्रतिभागियों को बधाई दी।
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मुख्य अतिथि अतुल द्विवेदी रहे। उन्होंने कजरी को जनभावनाओं की सशक्त अभिव्यक्ति बताते हुए इसके संवर्धन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कजरी भारतीय संस्कृति की गौरवशाली विरासत है। लोक संगीत मन से आता है, इसे बाहरी उपकरण की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कार्यशाला के सभी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन किया। समारोह में प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित कर सम्मानित किया गया।
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सुभारती में दस दिवसीय कार्यशाला का हुआ समापन