गंगा में अठखेलियां करती दिखीं छह डॉल्फिन, बिजनौर छोड़ मेरठ की ओर किया रुख
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बिजनौर में शुक्रवार को गंगा में छह और डॉल्फिन दिखी हैं। ‘मेरी गंगा, मेरी सूंस’ अभियान में अब तक कुल 18 डॉल्फिन दिख गई हैं। इसके अलावा शुक्रवार को 14 घड़ियाल भी दिखे हैं। बिजनौर में इस बार डॉल्फिन की संख्या में कमी आई है और मेरठ में डॉल्फिन बढ़ गई हैं। गंगा की धारा में होने वाले परिवर्तनों के कारण अब डॉल्फिन बिजनौर से मेरठ की ओर रुख कर रही हैं।
‘मेरी गंगा, मेरी सूंस’ अभियान के तहत डॉल्फिन की गणना तीसरे दिन भी जारी रही। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के वरिष्ठ परियोजना निदेशक मोहम्मद शाहनवाज खान व समन्वयक संजीव यादव के निर्देशन में टीम ने शुक्रवार को गंगा की धारा में 55 किलोमीटर का एरिया तय किया। टीम को गंगा में छह और डॉल्फिन अठखेलियां करती मिलीं। सभी डॉल्फिन वयस्क थीं। डॉल्फिन को बिजनौर के मुकाबले मेरठ की धरती ज्यादा भाने लगी है। पिछली बार टीम को बिजनौर एरिया में 11 और मेरठ में तीन डॉल्फिन दिखीं थी, लेकिन इस बार बिजनौर क्षेत्र में डॉल्फिन की संख्या कम हुई है। बिजनौर में टीम को केवल सात डॉल्फिन मिली हैं।
वहीं मेरठ में डॉल्फिन की संख्या बढ़ गई है। मेरठ में पिछले साल तीन डॉल्फिन मिली थीं। इस बार मेरठ में टीम को आठ डॉल्फिन दिखी हैं। डॉल्फिन धीरे- धीरे मेरठ क्षेत्र की ओर प्रवास कर रही हैं। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के अधिकारियों का कहना है कि डॉल्फिन अधिक गहरे पानी में रहती हैं। गंगा की धारा की गहराई सब जगह एक जैसी नहीं होती है। पहाड़ों पर बारिश का ज्यादा प्रकोप बिजनौर में रहता है। वहां से आने वाली मिट्टी बिजनौर में ही धारा में जम जाती है। इससे धारा की गहराई कम हो जाती है। शायद इसी वजह से डॉल्फिन मेरठ की ओर प्रवास कर रही हैं। टीम को सोमवार को 14 घड़ियाल भी दिखे हैं। इनमें से कुछ घड़ियाल गंगा की धारा में भी थे।
बता दें कि गुरुवार को टीम को सात घड़ियाल दिखे थे। शुक्रवार को 14 घड़ियाल दिखने से इनकी संख्या बढ़कर 21 हो गई है। शुक्रवार को टीम को तीन-चार मादा घड़ियाल भी दिखी हैं। यह घड़ियालों की संख्या वृद्धि के लिए बहुत अच्छा संकेत माना जा रहा है।
भारतीय घड़ियाल होते हैं विशालकाय
विश्व में मगरमच्छ की 23 प्रजाति पाई जाती हैं। घड़ियाल भी उनमें से एक है। यह कुछ ही देशों में मिलते हैं। नील नदी के मगरमच्छों के बाद भारतीय घड़ियाल ही सबसे विशालकाय होते हैं। इनकी लंबाई साढ़े पांच मीटर तक भी हो सकती है।
घड़ियालों के अस्तित्व पर खतरा
घड़ियालों के अस्तित्व पर खतरा बना हुआ है। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम ने बताया कि एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में केवल 200 मादा घड़ियाल ही अंडे दे रही हैं। ऐसे में इनकी संख्या बढ़ाने के लिए भी डब्ल्यूडब्ल्यूएफ द्वारा अभियान चलाया जा रहा है। घड़ियाल केवल मछली खाते हैं। टीम को गंगा में तीन मीटर से अधिक लंबे घड़ियाल भी दिखे हैं।
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