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हर रोज 210 लोगों को काट रहे कुत्ते

Thu, 30 May 2019 03:36 AM IST
Gaurav sharma न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Gaurav sharma Updated Thu, 30 May 2019 03:36 AM IST
सार

- इस साल 139 दिन में 29 हजार 223 लोगों को कुत्तों ने काटा
- बार-बार रिमाइंडर भेजने के बाद भी नहीं मिल रही वैक्सीन
 

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Dogs bite 210 people everyday
अावारा कुत्ते - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 कुत्ते हर रोज 210 लोगों को अपना निशाना बना रहे हैं। यानि हर महीने लगभग छह हजार से ज्यादा लोगों को कुत्ते काट रहे हैं। यह खुलासा स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट में हुआ है। इस साल जिले में पिछले 139 दिन में (एक जनवरी से 19 मई तक) 29 हजार 223 लोगों को कुत्तों ने काटा है। यह तो वह आंकडेे़ हैं जो जिला अस्पताल या स्वास्थ्य विभाग की सीएचसी-पीेएचसी और अर्बन हेल्थ सेंटर पर इलाज कराने के लिए आए। ऐसे लोग भी काफी संख्या संख्या में हैं जो कुत्ते काटे जाने के बावजूद एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने के लिए नहीं आते हैं। इन लोगों के आंकड़ों को भी इसमें शामिल कर लिया जाए तो आंकड़े और भयावह हो सकते हैं।
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स्वास्थ्य विभाग के पास बची है एक सप्ताह की वैक्सीन
स्वास्थ्य विभाग के चीफ फार्मासिस्ट वीके सिंह ने बताया कि हर माह एंटी रेबीज वैक्सीन के लिए दो हजार वॉयल की डिमांड की जाती है, लेकिन मिलती है सिर्फ 900 से 950 वॉयल। अब काफी संकट हो रहा है। सिर्फ एक सप्ताह की ही वैक्सीन बची है। तीन बार रिमाइंडर भेजा जा चुका है। स्वास्थ्य विभाग सीएचसी-पीएचसी, अर्बन हेल्थ सेंटर में एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाता है।
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जिला अस्पताल में 1400 वायल बची हैं
जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ. पीके बंसल ने बताया कि जिला अस्पताल में करीब 1400 वॉयल एंटी रेबीज वैक्सीन बची है। यह फिलहाल के लिए पर्याप्त है। अगर जरूरत पड़ेगी तो और डिमांड भेज दी जाएगी। जिला अस्पताल में हर रोज 17-18 वॉयल इस्तेमाल में आती हैं।
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नगर निगम खड़े कर चुका हाथ
नगर निगम कुत्तों को पकड़ने के लिए हाथ खड़े कर चुका है, दूसरी तरफ, सरकारी चिकित्सालयों में एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने के लिए मारामारी रहती है। जिला अस्पताल में तो मरीजों को कई बार कुत्ते का पीछा करने की सलाह तक दे दी जाती है, उनसे कहा जाता है कि कुत्ता अगर मरता नहीं तो घबराने की जरूरत नहीं है।

यह है रेबीज
कुत्ता, बंदर, लंगूर आदि के काटने से जो लार व्यक्ति के खून में मिल जाती है, उससे रेबीज की बीमारी होने का खतरा रहता है। रेबीज रोग मानसिक संतुलन बिगाड़ता है। यह रोग 19 साल तक मरीज को अपनी गिरफ्त में ले सकता है।

रेबीज के लक्षण
रेबीज रोगी को सबसे ज्यादा पानी से डर लगता है। रोगी के मुंह से लार निकलती है। यहां तक की वह भौंकना भी शुरू कर देता है।

रेबीज का उपचार
रेबीज रोग की रोकथाम के लिए अस्पतालों में एंटी रेबीज वैक्सीन के इंजेक्शन लगाए जाते हैं। इससे बचाव हो सकता है। नियमानुसार पहला इंजेक्शन 72 घंटे के अंदर, दूसरा तीन दिन बाद, तीसरा सात दिन बाद, चौथा 14 दिन बाद और पांचवा 28 दिन के बाद लगाया जाता है

पुराने टोटके अपनाने से बचें
चिकित्सक बताते हैं कि अगर कुत्ता काट ले तो पुराने टोटके अपनाने से परहेज करना चाहिए। कुत्ते के काटने पर पिसी मिर्च लगा लेने का प्रचलन अब भी है, लेकिन ऐसा करने से घाव में इंफेक्शन का खतरा ज्यादा रहता है। कुत्ते या किसी जानवर के काटने पर 72 घंटे में एंटी रेबीज वैक्सीन जरूर लगवानी चाहिए।  


माह          कुत्ते काटे के मरीज
जनवरी            5557
फरवरी              7146
मार्च                 5681
अप्रैल                5521
मई                    5307
(मई के आंकड़े 19 मई तक के हैं।)

बंदरों ने वृद्ध पर किया हमला
 लालकुर्ती क्षेत्र में बुधवार को बंदरों ने 60 वर्षीय रियाजुद्दीन पर हमला बोल दिया। इस दौरान बंदरों ने उनको कई जगह काट लिया।  परिवार के लोगों ने बचाने की कोशिश की तो बंदर उन पर भी झपटे। आसपास के लोगों ने बताया कि क्षेत्र में बंदर कई लोगों पर हमला कर चुके हैं, लेकिन प्रशासन की टीम यहां बंदर पकड़ने को लेकर कोई कार्रवाई नहीं करती। घायल वृद्ध को अस्पताल ले जाया गया।
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