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सरकारी जमीन वापस लेने के नाम पर न करें किसानों को परेशान
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- चकबंदी में मिली भूमि को वापस लेने के आदेश का विरोध, अपर आयुक्त को सौंपा ज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
सरधना। महादेव और सरधना क्षेत्र में चकबंदी के दौरान किसानों को दी गई सरकारी जमीन को वापस लेने के शासनादेश का भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक ने विरोध किया है। बुधवार को संगठन के कार्यकर्ताओं ने जिलाध्यक्ष कालू प्रधान के नेतृत्व में चकबंदी कार्यालय पहुंचकर अपर आयुक्त मधुसूदन दुबे को ज्ञापन सौंपा और आदेश वापस लेने की मांग की।
ज्ञापन में बताया कि वर्ष 1984 में हुई चकबंदी के दौरान कुछ किसानों को सरकारी जमीन की कीमत निर्धारित कर उनके खेतों में मिलान कर दिया गया था। तकनीकी कारणों से डोलबंदी उस समय नहीं हो सक, लेकिन करीब छह महीने पहले विभाग द्वारा डोलबंदी भी पूरी करा दी गई है। अब शासन द्वारा दिए गए निर्देशों के आधार पर विभाग उन जमीनों को किसानों से दोबारा वापस लेने की कार्रवाई में जुटा है, जिसका संगठन ने कड़ा विरोध किया है।
भाकियू अराजनैतिक ने चेतावनी दी कि यदि पूर्व में हुई डोलबंदी और कागजी कार्रवाई को ही अंतिम रूप से मान्यता नहीं दी गई तो किसान संगठन न्यायालय की शरण लेने को बाध्य होगा। इस दौरान जिलाध्यक्ष कालू प्रधान, अमित चौधरी छबड़िया, सत्यपाल, श्रीपाल, नरेंद्र कुमार, सुबोध कुमार, महावीर सिंह सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सरधना। महादेव और सरधना क्षेत्र में चकबंदी के दौरान किसानों को दी गई सरकारी जमीन को वापस लेने के शासनादेश का भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक ने विरोध किया है। बुधवार को संगठन के कार्यकर्ताओं ने जिलाध्यक्ष कालू प्रधान के नेतृत्व में चकबंदी कार्यालय पहुंचकर अपर आयुक्त मधुसूदन दुबे को ज्ञापन सौंपा और आदेश वापस लेने की मांग की।
ज्ञापन में बताया कि वर्ष 1984 में हुई चकबंदी के दौरान कुछ किसानों को सरकारी जमीन की कीमत निर्धारित कर उनके खेतों में मिलान कर दिया गया था। तकनीकी कारणों से डोलबंदी उस समय नहीं हो सक, लेकिन करीब छह महीने पहले विभाग द्वारा डोलबंदी भी पूरी करा दी गई है। अब शासन द्वारा दिए गए निर्देशों के आधार पर विभाग उन जमीनों को किसानों से दोबारा वापस लेने की कार्रवाई में जुटा है, जिसका संगठन ने कड़ा विरोध किया है।
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भाकियू अराजनैतिक ने चेतावनी दी कि यदि पूर्व में हुई डोलबंदी और कागजी कार्रवाई को ही अंतिम रूप से मान्यता नहीं दी गई तो किसान संगठन न्यायालय की शरण लेने को बाध्य होगा। इस दौरान जिलाध्यक्ष कालू प्रधान, अमित चौधरी छबड़िया, सत्यपाल, श्रीपाल, नरेंद्र कुमार, सुबोध कुमार, महावीर सिंह सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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