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जीवन में चाहे कुछ भी न करो, लेकिन पाप कभी न करो : आचार्य वसुनंदी
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सरधना। चौक बाजार स्थित श्री दिगंबर जैन बड़े मंदिर में आचार्य 108 वसुनंदी महाराज का ससंघ मंगल प्र
सरधना। चौक बाजार स्थित श्री दिगंबर जैन बड़े मंदिर में आचार्य वसुनंदी महाराज का ससंघ मंगल प्रवेश हुआ। समाज के लोगों ने पाद प्रक्षालन, आरती व चौक पूजकर महाराज का अभिनंदन किया। इस दौरान आचार्य भारत भूषण महाराज भी आचार्य संघ की मंगल अगवानी के लिए पहुंचे व महाराज की चरण वंदना की।
प्रवचन सभा में मंगलाचरण आशीष जैन ने किया। भगवान पदम प्रभु व आचार्य विद्यानंद महाराज के चित्र अनावरण मेरठ से आए अक्षत जैन, अंकुर जैन, प्रमोद जैन एडवोकेट, अजय जैन ने किया। पाद प्रक्षालन का लाभ सतीश जैन, श्रेयांस जैन, सुबोध जैन ने लिया। महाराज को शास्त्र भेंट का पुण्य सुनील जैन, संजीव जैन, राजीव जैन एवं हंस जैन, नवीन जैन ने लिया।
प्रवचन करते हुए भारत भूषण महाराज ने कहा कि उनका यह जीवन वसुनंदी महाराज की ही देन है। जब वह ग्रेटर नोएडा थे तो उनका स्वास्थ्य बहुत खराब हो गया था, उस समय वसुनंदी महाराज सूचना मिलते ही मेरे पास आ गए और एक पिता की तरह मेरी देखभाल की। आचार्य वसुनंदी महाराज ने कहा कि जीवन में चाहे कुछ भी न करो, लेकिन पाप कभी मत करो, क्योंकि पाप कर्म के कारण नरक में जाने का रास्ता तो खुलता ही है, साथ ही जीवन की शांति और संतुष्टि भी खत्म हो जाती है।
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उन्होंने कहा कि सरधना नगर की परंपरा रही है कि यहां सभी संतों का सम्मान होता रहा है। आप कभी भी संतवाद, पंथवाद, क्षेत्रवाद आदि में न बंटे, सभी का सम्मान करें, जिनवाणी माता की मानें। मंच संचालन नमन जैन ने किया।
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प्रवचन सभा में मंगलाचरण आशीष जैन ने किया। भगवान पदम प्रभु व आचार्य विद्यानंद महाराज के चित्र अनावरण मेरठ से आए अक्षत जैन, अंकुर जैन, प्रमोद जैन एडवोकेट, अजय जैन ने किया। पाद प्रक्षालन का लाभ सतीश जैन, श्रेयांस जैन, सुबोध जैन ने लिया। महाराज को शास्त्र भेंट का पुण्य सुनील जैन, संजीव जैन, राजीव जैन एवं हंस जैन, नवीन जैन ने लिया।
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प्रवचन करते हुए भारत भूषण महाराज ने कहा कि उनका यह जीवन वसुनंदी महाराज की ही देन है। जब वह ग्रेटर नोएडा थे तो उनका स्वास्थ्य बहुत खराब हो गया था, उस समय वसुनंदी महाराज सूचना मिलते ही मेरे पास आ गए और एक पिता की तरह मेरी देखभाल की। आचार्य वसुनंदी महाराज ने कहा कि जीवन में चाहे कुछ भी न करो, लेकिन पाप कभी मत करो, क्योंकि पाप कर्म के कारण नरक में जाने का रास्ता तो खुलता ही है, साथ ही जीवन की शांति और संतुष्टि भी खत्म हो जाती है।
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उन्होंने कहा कि सरधना नगर की परंपरा रही है कि यहां सभी संतों का सम्मान होता रहा है। आप कभी भी संतवाद, पंथवाद, क्षेत्रवाद आदि में न बंटे, सभी का सम्मान करें, जिनवाणी माता की मानें। मंच संचालन नमन जैन ने किया।