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दीपावली: आतिशबाजी से पहले जान लें ये खतरे, तेज धमाका छीन सकता है सुनने की क्षमता, बच्चों को रखें 7-8 मीटर दूर

Fri, 06 Nov 2026 11:28 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Fri, 06 Nov 2026 11:28 AM IST
सार

दिवाली पर पटाखे जलाते समय सावधानी बरतें। तेज धमाकों से सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। डॉक्टरों ने बच्चों को पटाखों से 7-8 मीटर दूर रखने की सलाह दी।

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Diwali Fireworks Safety: Loud Noise Can Damage Hearing, Keep Children 7-8 Metres Away
दीपावली पर पटाखे चलाते हुए लोग

विस्तार

दिवाली खुशियों और रोशनी का त्योहार है, लेकिन आतिशबाजी के दौरान जरा सी लापरवाही गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। पटाखों की तेज आवाज कानों की सुनने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है, वहीं बारूद और रसायनों से निकलने वाला धुआं सांस और आंखों से जुड़ी समस्याएं बढ़ा सकता है। डॉक्टरों ने लोगों को तेज धमाकेदार पटाखों से परहेज करने और बच्चों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी है।

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दिवाली पर अक्सर एक-दूसरे से तेज धमाका करने की होड़ में लोग तेज आवाज वाले पटाखे चलाते हैं। अचानक कान के पास तेज धमाका होने से असहनीय पीड़ा हो सकती है और कान के पर्दे को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए आतिशबाजी करते समय दूरी बनाए रखना और सावधानी बरतना जरूरी है।
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तेज आवाज से कानों को हो सकता है नुकसान
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. संजीव मिगलानी ने बताया कि पटाखों की तेज आवाज कानों के लिए नुकसानदायक हो सकती है। कान के पास अचानक तेज धमाका होने से दर्द और सुनने की क्षमता प्रभावित होने का खतरा रहता है। तेज आवाज के संपर्क में आने से कानों में झनझनाहट और कुछ समय के लिए सुनाई देना बंद होने जैसी परेशानी भी हो सकती है।

उन्होंने बताया कि धुएं वाले पटाखों से निकलने वाले एसपीएम, कार्बन मोनोऑक्साइड और सल्फर डाईऑक्साइड जैसे प्रदूषक स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकते हैं। इनकी वजह से दमा, सांस की नली में सूजन, नजला, साइनोसाइटिस और लेरिंजाइटिस जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। ऐसे में सांस संबंधी बीमारी से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

बच्चों को पटाखों से रखें 7-8 मीटर दूर
जिला महिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सफल कुमार ने बताया कि पटाखे जलाते समय छोटे बच्चों को कम से कम सात से आठ मीटर की दूरी पर रखना चाहिए। पटाखों के बारूद और धुएं के संपर्क में आने से बच्चों की त्वचा पर दाने निकल सकते हैं। उनकी आंखों में जलन की शिकायत भी हो सकती है।

बच्चों को पटाखे जलाने की जगह से दूर रखें और उन्हें अकेले आतिशबाजी न करने दें। पटाखों के धुएं से बचाव के साथ आंखों और त्वचा की सुरक्षा का भी ध्यान रखना जरूरी है।

ध्वनि की तीव्रता बढ़ने पर बढ़ता है खतरा
पटाखों की तेज आवाज से कानों को होने वाले नुकसान को लेकर डॉक्टरों ने सावधानी बरतने की सलाह दी है। ध्वनि की तीव्रता बढ़ने के साथ कानों में दर्द, झनझनाहट और सुनने की क्षमता प्रभावित होने का खतरा भी बढ़ सकता है।

ध्वनि की तीव्रता और संभावित नुकसान

ध्वनि की तीव्रता

संभावित असर

35 डेसीबल

कष्टदायक हो सकती है

40 से 50 डेसीबल

दर्द और कानों में झनझनाहट

50 से 60 डेसीबल

दर्द, कुछ पल के लिए बहरापन

60 से 70 डेसीबल

तीव्र दर्द, कान के पर्दे को नुकसान

70 डेसीबल से अधिक

असहनीय पीड़ा और सुनने की क्षमता को गंभीर नुकसान

सावधानी बरतकर मनाएं सुरक्षित दिवाली
डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि त्योहार पर तेज धमाकेदार पटाखों से बचें। पटाखे जलाते समय बच्चों को सुरक्षित दूरी पर रखें और धुएं के सीधे संपर्क में आने से बचें। आंखों, त्वचा और कानों की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए आतिशबाजी करें, ताकि त्योहार की खुशियां किसी हादसे या स्वास्थ्य समस्या में न बदलें।

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