{"_id":"699dcb931c093d3c560b7d79","slug":"discussion-on-the-unity-and-diversity-of-indian-languages-meerut-news-c-72-1-mct1014-149347-2026-02-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Meerut News: भारतीय भाषाओं की एकात्मता और विविधता पर हुआ मंथन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Meerut News: भारतीय भाषाओं की एकात्मता और विविधता पर हुआ मंथन
विज्ञापन
सीसीएसयू में हुआ व्याख्यान का समापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सीसीएसयू में दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का समापन, 500 से अधिक प्रोफेसर, शोधार्थी और छात्र शामिल हुए
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के चाणक्य सभागार में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का मंगलवार को समापन हुआ। आयोजन में देशभर से 500 से अधिक विद्वान, प्रोफेसर, शोधार्थी और छात्र शामिल हुए।
कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला सम्मेलन की मुख्य संरक्षक रहीं। प्रथम सत्र की शुरुआत डॉ. मुनेश कुमार द्वारा अतिथियों के स्वागत से हुई। इस सत्र में आशीष कुमार, शगुन बालियान, रुपेश कुमार यादव, प्रो. हरेंद्र सिंह, डॉ. देवानंद सिंह, भविष्य और गणेश कुमार ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। डॉ. अंजू ने अपने उद्बोधन में कहा कि भाषा किसी प्रकार का गतिरोध नहीं पैदा करती, अपितु यह मानव की सामाजिकता का सबसे महत्वपूर्ण उत्पाद है।
प्रो. वाचस्पति मिश्रा ने भारतीय भाषाओं की सनातनता पर प्रकाश डाला। डॉ. राजेश कुमार (एनसीईआरटी) ने विलुप्त होती स्थानीय, क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. नरेंद्र कुमार ने मातृभाषा को पहचान का आधार बताया। प्रो. जितेंद्र साहू ने उड़िया भाषा का उदाहरण देते हुए कहा कि जिसे अपनी मातृभाषा से प्रेम नहीं, उसे अपनी माटी से भी प्रेम नहीं हो सकता।
विज्ञापन
प्रो. वंदना शर्मा ने काव्य पाठ से साहित्य की सृजनात्मकता को रेखांकित किया। समापन सत्र में प्रो. मनोज दीक्षित ने भारत को भाषाओं का सबसे बड़ा गुलदस्ता बताया और विविधता को विकास की पोषक शक्ति माना। प्रो. राका आर्या ने शोध में पूर्वाग्रह मुक्ति और डिजिटल माध्यमों के सही उपयोग पर जोर दिया। सम्मेलन ने भारतीय भाषाओं के संरक्षण, मातृभाषा शिक्षा के महत्व और डिजिटल युग में उनकी प्रासंगिकता पर गहन संवाद स्थापित किया।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग के चाणक्य सभागार में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का मंगलवार को समापन हुआ। आयोजन में देशभर से 500 से अधिक विद्वान, प्रोफेसर, शोधार्थी और छात्र शामिल हुए।
कुलपति प्रो. संगीता शुक्ला सम्मेलन की मुख्य संरक्षक रहीं। प्रथम सत्र की शुरुआत डॉ. मुनेश कुमार द्वारा अतिथियों के स्वागत से हुई। इस सत्र में आशीष कुमार, शगुन बालियान, रुपेश कुमार यादव, प्रो. हरेंद्र सिंह, डॉ. देवानंद सिंह, भविष्य और गणेश कुमार ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। डॉ. अंजू ने अपने उद्बोधन में कहा कि भाषा किसी प्रकार का गतिरोध नहीं पैदा करती, अपितु यह मानव की सामाजिकता का सबसे महत्वपूर्ण उत्पाद है।
विज्ञापन
प्रो. वाचस्पति मिश्रा ने भारतीय भाषाओं की सनातनता पर प्रकाश डाला। डॉ. राजेश कुमार (एनसीईआरटी) ने विलुप्त होती स्थानीय, क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. नरेंद्र कुमार ने मातृभाषा को पहचान का आधार बताया। प्रो. जितेंद्र साहू ने उड़िया भाषा का उदाहरण देते हुए कहा कि जिसे अपनी मातृभाषा से प्रेम नहीं, उसे अपनी माटी से भी प्रेम नहीं हो सकता।
विज्ञापन
प्रो. वंदना शर्मा ने काव्य पाठ से साहित्य की सृजनात्मकता को रेखांकित किया। समापन सत्र में प्रो. मनोज दीक्षित ने भारत को भाषाओं का सबसे बड़ा गुलदस्ता बताया और विविधता को विकास की पोषक शक्ति माना। प्रो. राका आर्या ने शोध में पूर्वाग्रह मुक्ति और डिजिटल माध्यमों के सही उपयोग पर जोर दिया। सम्मेलन ने भारतीय भाषाओं के संरक्षण, मातृभाषा शिक्षा के महत्व और डिजिटल युग में उनकी प्रासंगिकता पर गहन संवाद स्थापित किया।