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Meerut News: गंगा किनारे दिख रहे आस्था, उमंग और उल्लास के विभिन्न रंग
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मखदुमपुर गंगा घाट पर स्नान करते श्रद्धालु स्रोत संवाद
हस्तिनापुर। मखदूमपुर गंगा घाट पर आयोजित पांच दिवसीय कार्तिक पूर्णिमा मेले में आस्था और संस्कृति का संगम देखने को मिल रहा है। उद्घाटन के दूसरे दिन हजारों की संख्या में गंगा किनारे श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।
कार्तिक पूर्णिमा पर मखदूमपुर गंगा मेला आस्था के साथ ही विभिन्न संस्कृतियों का भी संगम है। मेले में कहीं साधु संत भक्तिभाव में लीन हैं, तो किसी स्थान पर भंडारा चल रहा है। मेले को यादगार बनाने के लिए जिला पंचायत की ओर से दिन-रात श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। मंगलवार को हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने गंगा किनारे पहुंचकर आस्था की डुबकी लगाई और अपने परिवार की खुशहाली की कामना की। महिलाओं ने मंगल गीतों के साथ मां गंगा का पूजन किया। 15 नवंबर को मुख्य कार्तिक पूर्णिमा का मुख्य स्नान है इसलिए इससे पहले ही सभी श्रद्धालु मेला स्थल पर पहुंच रहे हैं। वहीं, महाभारत कालीन ऐतिहासिक क्षेत्र आस्था व विभिन्न सांस्कृतियों का गवाह है। इसमें विभिन्न समुदायों एवं वर्गों के लोग दिखाई देते हैं। इस समय मखदूमपुर गंगा घाट पर पहुंचे युवा अपनी ही दुनिया में व्यस्त है। गंगा तट पर आए युवक दिन निकलते ही गंगा में डुबकी लगाने घाटों पर आ जाते हैं। दोपहर तक कबड्डी में जोर दिखाते हैं। उसके बाद जगह-जगह गंगा किनारे रेत और गंगा जल में अठखेलियां कर समय व्यतीत कर रहें है। महिलाएं सुबह ही स्नान के बाद परिवार के लोगों के लिए खिचड़ी बनाने में लग जाती हैं।
दूधिया रोशनी में नहाया मेला स्थल
मखदूमपुर गंगा मेला स्थल इस समय दूधिया रोशनी से नहाया हुआ है। मेला स्थल में रात में भी दिन सा नजारा दिखाई दे रहा है। मेले में लगे झूले, खेल-खिलौनों की दुकानें बच्चों के साथ बड़ों के भी आकर्षण का केंद्र बनी हैं।
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कार्तिक पूर्णिमा पर मखदूमपुर गंगा मेला आस्था के साथ ही विभिन्न संस्कृतियों का भी संगम है। मेले में कहीं साधु संत भक्तिभाव में लीन हैं, तो किसी स्थान पर भंडारा चल रहा है। मेले को यादगार बनाने के लिए जिला पंचायत की ओर से दिन-रात श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। मंगलवार को हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने गंगा किनारे पहुंचकर आस्था की डुबकी लगाई और अपने परिवार की खुशहाली की कामना की। महिलाओं ने मंगल गीतों के साथ मां गंगा का पूजन किया। 15 नवंबर को मुख्य कार्तिक पूर्णिमा का मुख्य स्नान है इसलिए इससे पहले ही सभी श्रद्धालु मेला स्थल पर पहुंच रहे हैं। वहीं, महाभारत कालीन ऐतिहासिक क्षेत्र आस्था व विभिन्न सांस्कृतियों का गवाह है। इसमें विभिन्न समुदायों एवं वर्गों के लोग दिखाई देते हैं। इस समय मखदूमपुर गंगा घाट पर पहुंचे युवा अपनी ही दुनिया में व्यस्त है। गंगा तट पर आए युवक दिन निकलते ही गंगा में डुबकी लगाने घाटों पर आ जाते हैं। दोपहर तक कबड्डी में जोर दिखाते हैं। उसके बाद जगह-जगह गंगा किनारे रेत और गंगा जल में अठखेलियां कर समय व्यतीत कर रहें है। महिलाएं सुबह ही स्नान के बाद परिवार के लोगों के लिए खिचड़ी बनाने में लग जाती हैं।
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दूधिया रोशनी में नहाया मेला स्थल
मखदूमपुर गंगा मेला स्थल इस समय दूधिया रोशनी से नहाया हुआ है। मेला स्थल में रात में भी दिन सा नजारा दिखाई दे रहा है। मेले में लगे झूले, खेल-खिलौनों की दुकानें बच्चों के साथ बड़ों के भी आकर्षण का केंद्र बनी हैं।
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