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धर्म-कर्म: कल ध्रुव योग में हलहारिणी अमावस्या, शनिवार को पितृकार्येषु, रविवार को स्नान-दान

Thu, 15 Jun 2023 10:25 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Thu, 15 Jun 2023 10:25 AM IST
सार

मान्यताओं के अनुसार अमावस्या तिथि पितरों के तर्पण के लिए बहुत अनुकूल मानी जाती है। इस दिन काली चींटियों को शक्कर मिला हुआ आटा खिलाएं। ऐसा करने से पाप-कर्मों का क्षय और पुण्य-कर्म उदय होते हैं।

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Dharma-karma: Halharini Amavasya in Dhruva Yoga tomorrow, Pitrikaryeshu on Saturday, bath-dan on Sunday
हलहारिणी अमावस्या - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास साल का चौथा महीना होता है। इस बार अमावस्या तिथि की शुरुआत शनिवार 17 जून को सुबह 09 बजकर 12 मिनट पर हो रही है। यह तिथि रविवार 18 जून को सुबह 10 बजकर 07 मिनट तक रहेगी। पितृ कार्यों के लिए शनिवार और स्नान दान आदि के लिए रविवार का दिन विशेष होगा।

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सनातन धर्म में आषाढ़ मास का विशेष धार्मिक महत्व होता है। इस माह में आने वाली अमावस्या तिथि को आषाढ़ अमावस्या, आषाढ़ी अमावस्या और हलहारिणी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। यह अमावस्या बेहद खास है। इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि इस तिथि में स्नान, ध्यान, पूजा, पाठ करना पितरों की प्रसन्नता के लिए मंगलकारी और शुभदायक है।
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आचार्य मनीष स्वामी ने बताया कि मान्यताओं के अनुसार अमावस्या तिथि पितरों के तर्पण के लिए बहुत अनुकूल मानी जाती है। कहा जाता है इस दिन पवित्र नदियों, कुंड तथा सरोवर में स्नान करने से पुण्य प्राप्त होता है। इस दिन लोग नदी, कुंड या सरोवर में स्नान करने के बाद दान करते हैं।

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अमावस्या - फोटो : Amar Ujala Digital

किसानों के लिए महत्वपूर्ण है तिथि
किसानों के लिए यह तिथि बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। ज्योतिष विद्वान विनोद त्यागी ने बताया कि हलहारिणी अमावस्या यानि आषाढ़ी अमावस्या पर हल पूजन का विधान है। इस दिन उन सभी उपकरणों की पूजा की जाती है जिनका उपयोग खेती में किया जाता है। इस दिन किसान अच्छी फसल के लिए भगवान की पूजा करते हैं।

इस तिथि पर किसान विधि-विधान से हल पूजन करके ईश्वर से फसल हरी-भरी बनी रहने की कामना करते हैं। आचार्य कौशल ने बताया कि इसके साथ ही अमावस्या के दिन पितरों का श्राद्ध करने के लिए भी शुभ दिन होता है। पितरों के तर्पण के लिए आषाढ़ अमावस्या के दिन पवित्र नदी में स्नान एवं दान-पुण्य किया जाता है।

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बारिश - फोटो : अमर उजाला

शुरू हो जाएगी वर्षा ऋतु
भारत के मौसम विभाग के अनुसार आषाढ़ मास के अंत में वर्षा ऋतु प्रारंभ होती है। इसलिए किसान आषाढ़ अमावस्या को हलहारिणी अमावस्या के रूप में मनाते हैं।

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अमावस्या - फोटो : अमर उजाला
आषाढ़ अमावस्या की पूजा विधि
इस दिन पवित्र नदी, जलाशय अथवा कुंड आदि में स्नान करें। इसके बाद तांबे के पात्र में जल, लाल चंदन और लाल रंग के पुष्प डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। यथाशक्ति किसी गरीब व्यक्ति को दान-दक्षिणा दें। अमावस्या के दिन पितरों की आत्मा की शांति के लिए उपवास भी करें। पानी में गंगा जल मिलाकर भी स्नान कर सकते हैं।

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चींटी - फोटो : Flickr

काली चींटियों को शक्कर मिला हुआ आटा खिलाएं
इस दिन काली चींटियों को शक्कर मिला हुआ आटा खिलाएं। ऐसा करने से पाप-कर्मों का क्षय और पुण्य-कर्म उदय होते हैं। पितरों की प्रसन्नता और तृप्ति के लिए तर्पण दान और कालसर्प दोष निवारण के लिए सुबह स्नान के बाद चांदी से निर्मित नाग-नागिन की पूजा करें। सफेद पुष्प के साथ इसे बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें।

इस दिन स्वच्छ वस्त्र पहनकर पितरों की प्रसन्नता के लिए हाथ में कुश की पवित्री लें और तिल जल से पितरों को तर्पण करें। इससे पितृ संतुष्ट होते हैं और पितृ दोष दूर होता है। साथ ही शिव रुद्राभिषेक, पितृदोष शांति पूजन और शनि उपाय करने से जीवन के सभी कष्ट समाप्त होते हैं।

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