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ये है इंडिया: पूर्व राज्यपाल के गांव में 65 साल से नहीं बनी सड़क

Fri, 22 Mar 2019 02:37 PM IST
कपिल kapil राजकुमार सैनी, अमर उजाला, मेरठ
राजकुमार सैनी, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Fri, 22 Mar 2019 02:37 PM IST
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Development work has not been done for 65 years in Jogipura village of former Governor Mahmood Ali
गांव जोगीपुरा मढ़ैया को जाने वाला कच्चा मार्ग - फोटो : अमर उजाला

मेरठ-हापुड़ सीमा पर बसे एनसीआर के गांव जोगीपुरा के मजरा जोगीपुरा मढ़ैया में 65 साल पुराने भारत की तस्वीर दिखती है। पूर्व राज्यपाल कुंवर महमूद अली का यहां जन्म हुआ था। 65 वर्षों में सरकारें आईं-गईं। लेकिन यहां की किस्मत नहीं बदली। जबकि 350 लोगों की आबादी वाले इस गांव के प्रधान भी पूर्व राज्यपाल के परिवार से हैं। मगर यहां के दिन नहीं फिरे। 

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जोगीपुरा मढ़ैया मार्ग कच्चा है। बारिश होते ही जलभराव होने पर दूसरे गांवों से संपर्क टूट जाता है। बच्चे स्कूल नहीं जा पाते। बीमार लोगों को उपचार नहीं मिलता है। मार्ग बनवाने के वादे करने वाले नेताओं ने चुनाव बाद पलटकर नहीं देखा। यहां आज भी कच्चे मकान और उन पर पॉलीथिन की छत है। अनेकों बार ग्राम प्रधान और नेताओं से मांग की। लेकिन प्रधानमंत्री आवास योजना भी यहां तक नहीं पहुंची।  
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बदल देंगे सूरत
प्रधान कुंवर साहिब अली दावा करते हैं कि छह माह में जोगीपुरा मढै़या की सूरत बदल दी जाएगी। वहीं, गाजियाबाद के सांसद प्रतिनिधि अजीत तोमर कहते हैं कि लोकसभा मेरठ-हापुड़ में गांव का रास्ता होने के कारण मार्ग नहीं बन पाया है। जनता को मेरठ के सांसद के सामने भी मामला रखना चाहिए। 
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क्या कहते हैं ग्रामीण
जय सिंह, जसवंत सिंह, राजेश कुमार, राजेश कुमार, चतर सिंह, भोले राम, जगदीश कुमार आदि का कहना है कि हमारे बच्चे स्कूल जाने के लिए 6-8 किमी पैदल जाते हैं। गांव में प्रत्याशी नहीं कार्यकर्ता वोट लेने आते हैं। हम सभी चुनावों में वोट देते हैं। लेकिन बदले में मायूसी मिलती है। गांव का विकास मेरठ-हापुड़ के अधिकारियों के सीमा विवाद में फंसा है। मुख्य मार्ग कच्चा होने से रिश्तेदार भी नहीं आते। युवाओं के पास रोजगार नहीं है। आजादी के बाद से बस्ती को केवल एक हैंडपंप और सौर ऊर्जा लाइट मिली। अधिकारी कहते हैं कि सरकार के पास पैसा ही नहीं है।

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