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Meerut News: दो दिन मनेगी देव प्रबोधनी एकादशी, होंगी 1200 शादियां

Fri, 31 Oct 2025 06:59 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 31 Oct 2025 06:59 PM IST
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Dev Prabodhini Ekadashi will be celebrated for two days, 1200 marriages will take place.
शहर के मंदिरों में धूमधाम से होगा तुलसी-शालिग्राम विवाह
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देव प्रबोधनी एकादशी व्रत शनिवार (1 नवंबर को स्मार्थ) ,( 2 नवंबर को वैष्णव )
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। देवोत्थान एकादशी पर 119 दिनी योग निद्रा से श्रीहरि विष्णु को जगाया जाएगा। इसके साथ ही एक बार फिर वे सृष्टि का काज संभालेंगे और मांगलिक आयोजन का श्रीगणेश भी होगा। इस वर्ष कार्तिक शुक्ल द्वादशी का क्षय हुआ है। धर्मशास्त्र निर्णयानुसार स्मार्त (गृहस्थी) लोगों को पहली दशमी एकादशी वाले दिन 1 नवंबर को और वैष्णव संन्यासी, साधु संत रविवार 2 नवंबर को उपवास करेंगे। शहर में विभिन्न मंदिरों में तुलसी शालिग्राम का विवाह होगा। अनुमान है कि शहर में 1200 से अधिक विवाह होंगे।
इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंस के सचिव आचार्य कौशल वत्स ने बताया कि प्रत्येक वर्ष चौबीस एकादशियां होती हैं। जब अधिकमास या मलमास आता है तब इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है। आषाढ शुक्ल पक्ष एकादशी को देव शयन हो जाने के बाद से प्रारंभ हुए चातुर्मास का समापन कार्तिक शुक्ल एकादशी के दिन देवोत्थान उत्सव पर होता है। चातुर्मास में भगवान विष्णु के आराम के पश्चात कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को भगवान विष्णु का शयन काल समाप्त होता है। ऐसे में दीपावली के बाद आने वाली इस एकादशी को प्रबोधिनी एकादशी और देव उठनी एकादशी या देवोत्थानी एकादशी भी कहते हैं। इस दिन वैष्णव ही नहीं, स्मार्त श्रद्धालु भी बडी आस्था के साथ व्रत करते हैं।
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- सृष्टि में सकारात्मक शक्तियों का होता है संचार
- ज्योतिषाचार्य विनोद त्यागी ने बताया कि भगवान के जगने से सृष्टि में सकारात्मक शक्तियों का संचार होने लगता है। इस दिन भगवान के जागने पर देवतागण भी व्रत पूजन करते हैं। कार्तिक मास में इस तिथि को शालिग्राम और तुलसी माता का विवाह संपन्न करवाया जाता है। इस दिन तुलसी पूजा का अधिक महत्व माना जाता है। इस दिन इनकी पूजा से व्यक्ति को अकाल मृत्यु का भय नहीं सताता है।
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- भगवान विष्णु की पूजा से मिलती है पितृ दोष से मुक्ति
- भगवान विष्णु की पूजा से पितृदोष से भी राहत मिलती है। ज्योतिषाचार्य मनीष स्वामी ने बताया देव प्रबोधनी एकादशी पर भगवान विष्णु की चार माह का शयनकाल पूर्ण होता हैं। इस दिन विधिवत उनकी पूजा कर उन्हें जगाया जाता है। गोधूलि वेला यानी की सूर्यास्त के बाद भगवान विष्णु के शालीग्राम रूप का तुलसी माता के साथ विवाह होगा। इस दिन व्यक्ति को ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः मंत्र का जाप करना चाहिए।

- प्रभु को पुष्प अर्पित कर करें मंत्र जाप
- देव प्रबोधिनी एकादशी के दिन स्नान के बाद घर के आंगन या बालकनी में चौक बनाकर श्रीहरि के चरण बनाएं। भगवान को पीले वस्त्र पहनाए और शंख बजा कर भगवान को उठाएं। मंत्र जाप करें। मंत्र जाप के बाद भगवान विष्णु को तिलक लगाएं। श्रीफल अर्पित करें और मिठाई का भोग लगाएं। आरती कर कथा सुनें। प्रभु को पुष्प अर्पित कर इस मंत्र का जाप करें।
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