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एमबीबीएस कॉपी घोटाले में फिर बड़ी कार्रवाई, डिप्टी रजिस्ट्रार को हटाया, दो समिति करेंगी जांच

Thu, 10 Sep 2020 12:28 PM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Thu, 10 Sep 2020 12:28 PM IST
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Deputy Registrar removed in MBBS result case, two committee will investigate
सीसीएसयू - फोटो : अमर उजाला

मुजफ्फरनगर के जैन कन्या कॉलेज में नकल के आरोप में पकड़े गए 12 छात्रों और एमबीबीएस की कॉपी बदलने वाले दो छात्रों का रिजल्ट जारी करने पर सीसीएसयू ने डिप्टी रजिस्ट्रार अरुण यादव को कार्य से विरत कर दिया है। दोनों मामलों में कमेटी बनाकर जांच शुरू करा दी गई है। शासन को पूरे प्रकरण से अवगत करा दिया है।

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18 मार्च को एसटीएफ ने एमबीबीएस की कॉपियां बदलने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया था। कविराज नाम के एक छात्र नेता को गिरफ्तार कर मामले का खुलासा किया था। एसटीएफ ने विवि के आठ कर्मचारियों को भी जेल भेजा था। कॉपी बदलवाने वाले एमबीबीएस के दो छात्रों स्वर्णजीत और आयुष को भी जेल भेजा गया था। दोनों को यूएफएम की श्रेणी में डाल दिया गया था। छात्रों के जेल से आने के बाद घोटाला फिर से शुरू हो गया। विवि के कर्मचारियों ने मिलीभगत से दोनों का रिजल्ट जारी कर दिया था। गोपनीय विभाग के प्रभारी डिप्टी रजिस्ट्रार अरुण यादव ने भी रिजल्ट रोकने की जरूरत नहीं समझी। जांच में मामला उजागर होने पर चार कर्मचारियों, कार्यालय अधीक्षक अमित कौशिक, प्रभारी हर्ष गुप्ता, प्रभारी राजकुमार गौतम और वरिष्ठ सहायक तृप्ति रस्तोगी को निलंबित कर दिया था।
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नहीं दे पाए स्पष्ट जवाब
बुधवार को रजिस्ट्रार कार्यालय से जारी आदेश में डिप्टी रजिस्ट्रार को कुलपति द्वारा मांगे गए स्पष्टीकरण के जवाब में उचित जवाब नहीं देने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। उनकी कर्तव्य निष्ठा की जांच के लिए विभागीय कार्रवाई उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय एक्ट 1975 के नियम 36-2 के तहत कार्रवाई शुरू करते हुए नियमावली के नियम 36-6 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए कुलपति ने दोनों मामलों में प्रति कुलपति और संकायाध्यक्ष को जांच सौंपी है।
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पहले भी हुई थी कार्रवाई
इससे पहले इस तरह की कार्रवाई पूर्व रजिस्ट्रार मनोज चौहान के खिलाफ की गई थी। तत्कालीन कुलपति ने उनसे सारे कार्यों का अधिकार छीन लिया था। इस फैसले के खिलाफ मनोज चौहान सुप्रीमकोर्ट तक गए थे, लेकिन उनको राहत नहीं मिली थी।

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