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भ्रष्टाचार में घिरे विभाग एक-दूसरे के पाले में डाल रहे गेंद
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मेरठ। मोहिउद्दीनपुर गन्ना विकास समिति में किसानों को उनकी साख से आठ गुना कर्ज देने और उनके नाम पर खाद तथा बीज जारी कर पैसा हड़पने के मामले में गन्ना विभाग और जिला लेखा परीक्षा विभाग गेंद एक-दूसरे के पाले में डाल रहे हैं। इससे भ्रष्टाचार का मामला संज्ञान में आने के बाद भी कार्रवाई नहीं करने पर सवाल उठ रहे हैं।
गन्ना विकास समितियों की जांच जिला लेखा परीक्षा अधिकारी, सहकारी समितियां एवं पंचायतें द्वारा की जाती है। मोहिउद्दीनपुर गन्ना विकास समिति का वर्ष 2014-15 का ऑडिट 30 सितंबर 2019 को पूरा हुआ। इस दौरान समिति में किसानों को उनकी साख से आठ गुना तक ऋण देने और उनके नाम पर खाद तथा बीज चढ़ाकर पैसा हजम करने का मामला पकड़ में आया। ऑडिट टीम ने इसकी जानकारी जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय को उसी समय दी थी। वहीं, ऐसे मामले बाकी समितियों में भी होने का संदेह जताया था। इस पर गन्ना विभाग ने टीका-टिप्पणी करने के बजाय फाइनल रिपोर्ट मांगी थी। नौ महीने बाद भी जिला लेखा परीक्षा कार्यालय ने रिपोर्ट नहीं भेजी है। इसको लेकर दोनों विभाग एक-दूसरे के पाले में गेंद डाल रहे हैं। जिला गन्ना अधिकारी डॉ. दुष्यंत कुमार का कहना है कि जिला लेखा परीक्षा विभाग ने मांगने के बाद भी रिपोर्ट नहीं दी है। वहीं, उप मुख्य लेखा परीक्षा अधिकारी सुरेंद्र कुमार पांडेय का कहना है कि गन्ना विभाग को हस्तलिखित रिपोर्ट भिजवाई गई थी। उसने लेने से इनकार कर दिया। अब रिपोर्ट टाइप कराकर भेजी जाएगी।
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गन्ना विकास समितियों की जांच जिला लेखा परीक्षा अधिकारी, सहकारी समितियां एवं पंचायतें द्वारा की जाती है। मोहिउद्दीनपुर गन्ना विकास समिति का वर्ष 2014-15 का ऑडिट 30 सितंबर 2019 को पूरा हुआ। इस दौरान समिति में किसानों को उनकी साख से आठ गुना तक ऋण देने और उनके नाम पर खाद तथा बीज चढ़ाकर पैसा हजम करने का मामला पकड़ में आया। ऑडिट टीम ने इसकी जानकारी जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय को उसी समय दी थी। वहीं, ऐसे मामले बाकी समितियों में भी होने का संदेह जताया था। इस पर गन्ना विभाग ने टीका-टिप्पणी करने के बजाय फाइनल रिपोर्ट मांगी थी। नौ महीने बाद भी जिला लेखा परीक्षा कार्यालय ने रिपोर्ट नहीं भेजी है। इसको लेकर दोनों विभाग एक-दूसरे के पाले में गेंद डाल रहे हैं। जिला गन्ना अधिकारी डॉ. दुष्यंत कुमार का कहना है कि जिला लेखा परीक्षा विभाग ने मांगने के बाद भी रिपोर्ट नहीं दी है। वहीं, उप मुख्य लेखा परीक्षा अधिकारी सुरेंद्र कुमार पांडेय का कहना है कि गन्ना विभाग को हस्तलिखित रिपोर्ट भिजवाई गई थी। उसने लेने से इनकार कर दिया। अब रिपोर्ट टाइप कराकर भेजी जाएगी।
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