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गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कर सरकार कड़ा कानून बनाए : उलमा

Wed, 07 Feb 2018 11:52 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Wed, 07 Feb 2018 11:52 AM IST
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Deobandi Ulma support the demand for declaring cow as national animal of Maulana Arshad Madani
मौलाना अरशद मदनी - फोटो : ani
जमीयत उलमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी की गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किए जाने की मांग का देवबंदी उलमा ने भी खुलकर समर्थन किया है। उलमा का कहना है कि सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करते हुए कानून को पास कर देना चाहिए। ताकि गोहत्या के नाम पर हो रही मारकाट को रोका जा सके। 
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सहारनपुर के देवबंद में मदरसा दारुल उलूम निस्वाह के नायब मोहतमिम मौलाना नजीफ कासमी का कहना है कि मौलाना अरशद मदनी के बयान का वह समर्थन करते हैं। क्योंकि देश में पिछले लंबे समय से खास मानसिकता वाले लोग गोरक्षा के नाम पर बेकसूर मुसलमानों को मौत के घाट उतार रहे हैं। 
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इससे देश का माहौल भी खराब हो रहा है। उन्होंने कहा कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किए जाने और इस पर कानून बनाए जाने के बाद देश में इस प्रकार की शर्मनाक घटनाओं पर सिरे से पाबंदी लग जाएगी और निर्दोष लोगों का कत्ल-ए-आम रुक जाएगा। 
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मौलाना नजीफ ने यह भी कहा कि देश के तमाम लोगों को इस मांग को पुरजोर तरीके से उठाना चाहिए ताकि सरकार इस पर गंभीरता से विचार करने पर मजबूर हो और गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित कर उनके संरक्षित करने के लिए ठोस कानून बनाए।

Deobandi Ulma support the demand for declaring cow as national animal of Maulana Arshad Madani
ताकि देश की हिंदू मुस्लिम एकता को खंडित होने से बचाया जा सके और आपसी सौहार्द देश की पहचान बनी रहे। मजलिस इत्तेहाद-ए-मिल्लत के अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती तारिक कासमी ने भी मौलाना अरशद मदनी के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि जब कभी इस प्रकार की घटनाएं सुनने को मिलती है तो बेहद तकलीफ होती है। 

इस घटनाओं में किसी इंसान का कत्ल नहीं होता बल्कि इंसानियत का कत्ल होता है। जो सरासर गलत है। अब वक्त आ गया है जब सरकार इस मामले पर विचार विमर्श करे।
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