तीन तलाक पर बने कानून को हमने न पहले माना न अब मानेंगे : देवंबदी उलेमा
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मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक, 2017 में संशोधन को मंजूरी मिलने पर देवबंदी उलेमा का कहना है कि जो शरीयत को जानते ही नहीं अगर वो इस पर कानून बनाएंगे तो जाहिर सी बात है कि वो फायदेमंद नहीं होगा। उन्होंने दो टूक यह भी कहा कि इस कानून को न पहले हमने माना और न ही आगे मानेंगे।
शुक्रवार को ऑल इंडिया मजलिस-ए-उलमा के अध्यक्ष मौलाना जैनुद्दीन कासमी ने कहा कि तीन तलाक बिल को वो लोग पास करा रहे हैं जो इस्लाम और इस्लामिक कानून को जरा भी नहीं जानते। विश्वविख्यात इस्लामिक शिक्षण संस्था दारुल उलूम, नदवा तुल उलमा लखनऊ, मदरसा मजाहिर उलूम सहारनपुर समेत मुल्क की बड़ी तंजीमे (संगठन) ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, जमीयत उलमा-ए-हिंद, मिल्ली कौंसिल, जमात-ए-इस्लामी आदि से जुड़े उलमा को बुलाकर इसमें मशविरा किया जाता। लेकिन ऐसा नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि यह वो जमाते हैं जिन्होंने मुल्क की आजादी के अंदर और मुल्क के आजाद होने के बाद भी इस मुल्क के हर वक्त साथ देने वाले लोग इसकी तरक्की में और इसको संवारने में अपने आपको हमेशा पेश किया है और इस मुल्क को संवारा है। उन्होंने कहा कि अफसोस की बात यह है कि मुल्क के अंदर ऐसे मुद्दों को उठाया जा रहा है जिससे मुल्क की तरक्की का कोई वास्ता नहीं है। यहां कोई रोजगार नहीं है जिसके चलते युवा पीढ़ी बेरोजगार होकर सड़कों पर घूम रही है। इस दिशा में कदम उठाने के बजाए मुसलमानों के धार्मिक कानूनों में हस्तक्षेप किया जा रहा है। मौलाना जैनुद्दीन ने कहा कि उलमा-ए-देवबंद ने इस बिल को न तो पहल कबूल किया और न ही आगे इसे मानेंगे।
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