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मेरठ में तड़प रहे मरीज, मस्ती में हेल्थ डिपार्टमेंट
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Sun, 01 Nov 2015 01:36 AM IST
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जिले में लोग वायरल और डेंगू से तड़प रहे हैं और स्वास्थ्य विभाग चैन की नींद सो रहा है। शनिवार को सामूहिक अवकाश का बहाना बनाकर चिकित्सकों ने सीएचसी और पीएचसी पर ताले जड़ दिए।
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अमर उजाला की टीम ने शनिवार को ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों का हाल जाना। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र दुल्हैड़ा, खरखौदा ब्लॉक के फफूंडा के स्वास्थ्य केंद्र पर ताला लटका मिला। किला परीक्षितगढ़ का अस्पताल तो खुला था, लेकिन वहां चिकित्सक नहीं थे। मरीजों की भीड़ लगी थी।
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सार्वजनिक अवकाश को चिकित्सकों ने कंप्लीट अवकाश मानकर स्वास्थ्य केंद्रों पर ताला गया दिया। नियम के हिसाब से सार्वजनिक अवकाश के दिन आधे टाइम ओपीडी होती है। यानी अगर आम दिनों में छह घंटे ओपीडी होती है तो अवकाश के दिन तीन घंटे ओपीडी होनी चाहिए। फफूंड़ा में डेंगू से छह से अधिक लोगों की जान जा चुकी है, तब भी पीएचसी पर ताला लगा मिला।
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नियम के तहत सर्दियों में ग्रामीण क्षेत्र के स्वास्थ्य केंद्रों में ओपीडी का टाइम सुबह 10 से शाम 4 बजे तक का होता है। सार्वजनिक अवकाश के दिन सुबह दस बजे से दोपहर एक बजे तक ओपीडी होनी चाहिए।
अधिकारियों के दावे की हवा निकली
कस्तला गांव में महामारी सामने आने पर डीएम पंकज यादव से लेकर कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर तक सख्त हो गए थे। डीएम ने सीएमओ डॉ. रमेश चंद्र को तलब कर लिया था। उन्होंने सीएमओ को मौके पर जाने की हिदायत दी थी। अधिकारियों के सख्त रवैये के कारण सीएमओ ने चिकित्सा सेवाओं को बेहतर करने का भरोसा दिलाया था, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। चिकित्सक पूरे समय ओपीडी नहीं कर रहे हैं। गांव में अलग से कैंप भी नहीं लगाए जा रहे हैं।