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लापरवाही करने वाले परीक्षकों को डिबार करने की मांग
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मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में मूल्यांकन कार्य में घोर लापरवाही का मामला एक बार फिर सामने आया है। चुनौती मूल्यांकन के परिणामों ने प्रारंभिक मूल्यांकन में हुई खामियों की पोल खोल दी है, जहां कई छात्रों के अंकों में कई गुना वृद्धि देखने को मिली है।
सोमवार को घोषित हुए चुनौती मूल्यांकन के परिणामों में बीएससी के एक छात्र को प्रारंभिक मूल्यांकन में मात्र 2 अंक दिए गए थे। परिणाम से असंतुष्ट छात्र ने चुनौती मूल्यांकन के लिए आवेदन किया, जिसके बाद उसके अंक बढ़कर 25 हो गए। इसी तरह एक अन्य छात्र के अंक 6 से बढ़कर 35 हो गए, जबकि एक अन्य छात्र के 9 से 29 और एक अन्य के 8 से 35 अंक हो गए। एक और छात्र को शुरुआती मूल्यांकन में 8 अंक मिले थे, जो चुनौती मूल्यांकन के बाद 25 हो गए। ये आंकड़े मूल्यांकन में हुई भारी विसंगतियों को दर्शाते हैं। पूर्व महामंत्री अंकित अधाना ने कहा है कि प्रारंभिक मूल्यांकन के बाद चुनौती मूल्यांकन में अंकों में कई गुना वृद्धि स्पष्ट रूप से मूल्यांकन कार्य में लापरवाही को दर्शाती है। उन्होंने बताया कि कई बार छात्र जब अपनी उत्तर पुस्तिकाएं निकलवाते हैं, तो वह या तो ठीक से जांची हुई नहीं मिलतीं या फिर पूरी तरह से चेक ही नहीं की गई होती। इसी लापरवाही के कारण छात्रों की बैक आ जाती है, जिससे उन्हें चुनौती मूल्यांकन के लिए अतिरिक्त पैसे खर्च करने पड़ते हैं। अंकित अधाना ने विश्वविद्यालय प्रशासन से ऐसे लापरवाह परीक्षकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और उन्हें डिबार करने की मांग की है।
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सोमवार को घोषित हुए चुनौती मूल्यांकन के परिणामों में बीएससी के एक छात्र को प्रारंभिक मूल्यांकन में मात्र 2 अंक दिए गए थे। परिणाम से असंतुष्ट छात्र ने चुनौती मूल्यांकन के लिए आवेदन किया, जिसके बाद उसके अंक बढ़कर 25 हो गए। इसी तरह एक अन्य छात्र के अंक 6 से बढ़कर 35 हो गए, जबकि एक अन्य छात्र के 9 से 29 और एक अन्य के 8 से 35 अंक हो गए। एक और छात्र को शुरुआती मूल्यांकन में 8 अंक मिले थे, जो चुनौती मूल्यांकन के बाद 25 हो गए। ये आंकड़े मूल्यांकन में हुई भारी विसंगतियों को दर्शाते हैं। पूर्व महामंत्री अंकित अधाना ने कहा है कि प्रारंभिक मूल्यांकन के बाद चुनौती मूल्यांकन में अंकों में कई गुना वृद्धि स्पष्ट रूप से मूल्यांकन कार्य में लापरवाही को दर्शाती है। उन्होंने बताया कि कई बार छात्र जब अपनी उत्तर पुस्तिकाएं निकलवाते हैं, तो वह या तो ठीक से जांची हुई नहीं मिलतीं या फिर पूरी तरह से चेक ही नहीं की गई होती। इसी लापरवाही के कारण छात्रों की बैक आ जाती है, जिससे उन्हें चुनौती मूल्यांकन के लिए अतिरिक्त पैसे खर्च करने पड़ते हैं। अंकित अधाना ने विश्वविद्यालय प्रशासन से ऐसे लापरवाह परीक्षकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और उन्हें डिबार करने की मांग की है।
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