{"_id":"63adfa37a4c40d3c8d0a1fa4","slug":"delhi-lucknow-race-will-stop-genome-sequencing-will-start-in-medical-college-meerut-news-mrt619807644","type":"story","status":"publish","title_hn":"Meerut News: दिल्ली-लखनऊ की दौड़ होगी बंद, मेडिकल कॉलेज में शुरू होगी जीनोम सीक्वेंसिंग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Meerut News: दिल्ली-लखनऊ की दौड़ होगी बंद, मेडिकल कॉलेज में शुरू होगी जीनोम सीक्वेंसिंग
विज्ञापन
दिल्ली-लखनऊ की दौड़ होगी बंद, मेडिकल कॉलेज में शुरू होगी जीनोम सीक्वेंसिंग
मेरठ। एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी लैब में वायरस की जीनोम सीक्वेंसिंग शुरू करने की तैयारी है। करीब दो करोड़ रुपये कीमत की मशीन आएगी। इसका प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, जो शासन को भेजा जाएगा। इसके शुरू होने से जांच का इंतजार खत्म हो जाएगा।
अभी जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए सैंपल दिल्ली या लखनऊ भेजने पड़ते हैं। रिपोर्ट आने में महीनों तक लग जाते हैं। अभी तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ऐसी कोई सरकारी लैब नहीं है। मेडिकल की माइक्रोबायोलॉजी लैब में ही इसका सेटअप तैयार किया जाएगा। यह बड़ी लैब है जिसमें पिछले तीन साल में कोरोना के 31 लाख से ज्यादा सैंपलों की जांच की गई है। मेरठ ही नहीं पूरे पश्चिम उत्तर प्रदेश के जिलों के सैंपल की जांच यहां होती है। एक दिन में 20 हजार से ज्यादा सैंपलों की जांच तक यहां हुई है। कोरोना के फिर से खतरे के मद्देनजर यह तैयारी शुरू की गई है।
दो माह में शुरू करने की कोशिश
माइक्रोबायोलॉजी लैब में जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भी पूरी तैयारी है। कोशिश है दो माह में इसे शुरू कर दिया जाए। शासन से अनुमति मिलने और मशीन आते ही जिनोम सीक्वेंसिंग शुरू कर दी जाएगी। - डॉ अमित गर्ग, प्रभारी, माइक्रोबायोलोजी लैब, मेडिकल कॉलेज
विज्ञापन
लैब प्रभारी को दी गई जिम्मेदारी
माइक्रोबायोलॉजी लैब के प्रभारी को जिम्मेदारी दी गई है कि वह जिनोम सीक्वेंसिंग के लिए प्रस्ताव तैयार करें। कोशिश है कि जल्द ही जिनोम सीक्वेंसिंग भी मेडिकल में शुरू करा दी जाए। - डॉ आरसी गुप्ता, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
क्या है जीनोम सीक्वेंसिंग
जीनोम सीक्वेंसिंग एक तरह से किसी वायरस का बायोडाटा होता है। कोई वायरस कैसा है, किस तरह दिखता है, इसकी जानकारी जीनोम से मिलती है। विशाल समूह को जीनोम कहा जाता है। वायरस के बारे में जानने की विधि को जीनोम सीक्वेंसिंग कहते हैं। इससे ही कोरोना के नए स्ट्रेन के बारे में पता चलता है।
मेरठ में कोरोना के मरीजों के इलाज के लिए तैयारी
अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र
12 ब्लॉक स्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 33 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, 26 नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, एक शासकीय मेडिकल कॉलेज, दो निजी मेडिकल कॉलेज, एक जिला अस्तपाल और एक महिला अस्पताल।
====
बेड
शासकीय चिकित्सालयों में कुल 1130 बेड और निजी चिकित्सालयों में 1764 बेड। इनमें एल-1 वन फैसेलिटी में 40, एल-दो में 585, एल-थ्री में 100 और नवजात शिशु के लिए 164 बेड आरक्षित।
====
ऑक्सीजन
13 शासकीय ऑक्सीजन प्लांट और 14 निजी ऑक्सीजन प्लांट। पांच लीटर क्षमता वाले ऑक्सीजन कंन्सनट्रेटर की संख्या 344 और 10 लीटर वाले कंन्सनट्रेटर 247
===
ग्रामीण स्तर पर 30 कोविड जांच टीम
नगरीय स्तर पर 52 जांच टीम
जिले में कुल 77 एंबुलेंस हैं, जिसमें 102 एंबुलेंस 35 हैं। 108 एंबुलेंस 38 हैं। चार एंबुलेंस एडवांस लाइफ सपोर्ट की सुविधा वाली हैं।
विज्ञापन
मेरठ। एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी लैब में वायरस की जीनोम सीक्वेंसिंग शुरू करने की तैयारी है। करीब दो करोड़ रुपये कीमत की मशीन आएगी। इसका प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, जो शासन को भेजा जाएगा। इसके शुरू होने से जांच का इंतजार खत्म हो जाएगा।
अभी जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए सैंपल दिल्ली या लखनऊ भेजने पड़ते हैं। रिपोर्ट आने में महीनों तक लग जाते हैं। अभी तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश में ऐसी कोई सरकारी लैब नहीं है। मेडिकल की माइक्रोबायोलॉजी लैब में ही इसका सेटअप तैयार किया जाएगा। यह बड़ी लैब है जिसमें पिछले तीन साल में कोरोना के 31 लाख से ज्यादा सैंपलों की जांच की गई है। मेरठ ही नहीं पूरे पश्चिम उत्तर प्रदेश के जिलों के सैंपल की जांच यहां होती है। एक दिन में 20 हजार से ज्यादा सैंपलों की जांच तक यहां हुई है। कोरोना के फिर से खतरे के मद्देनजर यह तैयारी शुरू की गई है।
विज्ञापन
दो माह में शुरू करने की कोशिश
माइक्रोबायोलॉजी लैब में जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए भी पूरी तैयारी है। कोशिश है दो माह में इसे शुरू कर दिया जाए। शासन से अनुमति मिलने और मशीन आते ही जिनोम सीक्वेंसिंग शुरू कर दी जाएगी। - डॉ अमित गर्ग, प्रभारी, माइक्रोबायोलोजी लैब, मेडिकल कॉलेज
विज्ञापन
लैब प्रभारी को दी गई जिम्मेदारी
माइक्रोबायोलॉजी लैब के प्रभारी को जिम्मेदारी दी गई है कि वह जिनोम सीक्वेंसिंग के लिए प्रस्ताव तैयार करें। कोशिश है कि जल्द ही जिनोम सीक्वेंसिंग भी मेडिकल में शुरू करा दी जाए। - डॉ आरसी गुप्ता, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
क्या है जीनोम सीक्वेंसिंग
जीनोम सीक्वेंसिंग एक तरह से किसी वायरस का बायोडाटा होता है। कोई वायरस कैसा है, किस तरह दिखता है, इसकी जानकारी जीनोम से मिलती है। विशाल समूह को जीनोम कहा जाता है। वायरस के बारे में जानने की विधि को जीनोम सीक्वेंसिंग कहते हैं। इससे ही कोरोना के नए स्ट्रेन के बारे में पता चलता है।
मेरठ में कोरोना के मरीजों के इलाज के लिए तैयारी
अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र
12 ब्लॉक स्तरीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 33 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, 26 नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, एक शासकीय मेडिकल कॉलेज, दो निजी मेडिकल कॉलेज, एक जिला अस्तपाल और एक महिला अस्पताल।
====
बेड
शासकीय चिकित्सालयों में कुल 1130 बेड और निजी चिकित्सालयों में 1764 बेड। इनमें एल-1 वन फैसेलिटी में 40, एल-दो में 585, एल-थ्री में 100 और नवजात शिशु के लिए 164 बेड आरक्षित।
====
ऑक्सीजन
13 शासकीय ऑक्सीजन प्लांट और 14 निजी ऑक्सीजन प्लांट। पांच लीटर क्षमता वाले ऑक्सीजन कंन्सनट्रेटर की संख्या 344 और 10 लीटर वाले कंन्सनट्रेटर 247
===
ग्रामीण स्तर पर 30 कोविड जांच टीम
नगरीय स्तर पर 52 जांच टीम
जिले में कुल 77 एंबुलेंस हैं, जिसमें 102 एंबुलेंस 35 हैं। 108 एंबुलेंस 38 हैं। चार एंबुलेंस एडवांस लाइफ सपोर्ट की सुविधा वाली हैं।